New Champak Stories in Hindi with PDF चंपक की कहानियाँ

Read free Famous and Most Popular Champak Stories in Hindi with Moral Values. दुनिया में हर किसी को चंपक कहानियां पसंद हैं। There are sets of many Champak’s Moral Stories in Hindi.

(1) चंपक की कॉमिक Champak Stories in Hindi with Moral

Champak Moral Stories

चंपक को कॉमिक बुक पढ़ना बहुत पसंद था। लेकिन कॉमिक किताबें महंगी थीं और उसके पिता इसे खरीद नहीं सकते थे। चंपक के पिता कबाड़ी का काम करते थे। पूरे दिन कड़ी मेहनत करने के बाद वह किसी तरह अपने परिवार को दिन का का दो बार का खाना ही दे सकता था।

रोज की तरह सुबह चंपक स्कूल गया। लेकिन वह आज खुश था क्योंकि उसके पिता स्कूल के छूटने के बाद उसे लेने आने वाले थे। चंपक स्कूल के बाद अपने पिता के साथ घूमने के लिए बहुत उत्साहित था।

सुबह से दोपहर हो गयी और अब चंपक का स्कूल खत्म होने वाला था। चंपक लगातार खिड़की से बाहर देख रहा था। कुछ समय बाद स्कूल की घंटी बजी। हर कोई दौड़ता हुआ बहार आया और उनके साथ चंपक भी।

चंपक ने देखा कि उसके पिता पहले से ही अपना ठेला लेकर बाहर उसका इंतजार कर रहे थे। चंपक कूद कर ठेले पर जा बैठा। पिता जी ने ठेले को धक्का दिया और जोर से पुकार लगाई, “पेपरवाला..कबाड़ी!!” चंपक ने भी पुकार लगाई। 

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कुछ दूरी तक जाने के बाद एक इमारत के सुरक्षा गार्ड ने उन्हें रोक दिया। इमारत बहुत बड़ी थी और उन्हें बोरी भरकर सामान मिलने की आशा भी। उन्होंने प्रत्येक अपार्टमेंट से पेपर, अख़बार  और अन्य सामान इकट्ठा करना शुरू कर दिया।

आज उनका भाग्यशाली दिन था क्योंकि उन्हें कई सामान मिले थे। उनका ठेला लगभग पूरा भर गया था। इमारत से सामान इकट्ठा करने के बाद दोनों घर चलने लगे। चंपक पीछे से ठेले को धक्का दे रहा था।

१५ मिनट कड़ी धुप में चलने के बाद चंपक और उसके पिता घर पहुच गए। दोनों बहुत थक गए थे।  खाना खाने के बाद चंपक ने अपने पुराने खिलौनों से खेलना शुरू कर दिया। तभी चंपक के पिताजी ने उसे बुलाया और कहा “तुम्हारे लिए कुछ है।” 

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चंपक अपनी खुशी व्यक्त नहीं कर सका क्योंकि उसने अपने पिता द्वारा रखी गई कॉमिक पुस्तकों के सेट को बेचने के बजाय वह उसे उपहार के रूप में दे रहा था। उसके पिता उन पुस्तकों को बेचकर बहुत पैसा कमा सकता था।

चंपक बहुत खुश था क्योंकि उसके सपने सच हो गए थे। उसने किताबों के लिए अपने पिता को धन्यवाद कहा।

Moral of Short Champak Stories- खुशिया हमारे आसपास की हर एक छोटी-बड़ी चीजों में मौजूद होती है।

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(2) चंपक की दिवाली Champak Story in Hindi

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दिवाली की छुट्टिया चल रही थी। चंपक अपने दोस्तों के साथ पूरा दिन घूमता फिरता था। हर जगह अच्छा माहौल था। लेकिन इस दीवाली गाँव में कुछ अजीब सा हो रहा था। पुरे गांव में चोरिया हो रही थी। अब तक कम से कम पांच घरो में चोरिया हो चुटी थी।

गाँव में हर कोई अलर्ट पर था। लेकिन चोर बहुत ही चालाक था। चंपक भी अपने दोस्तों के साथ चोर के बारे में चर्चा कर रहा था। तब सब दोस्तों में मिलकर एक उपाय सोचा।

उन्होंने घोषणा की कि चंपक के पिता ने १० लाख की लॉटरी जीती है। जब पुरे गांव में खबर आग की तरह फ़ैल गयी, तो भला चोरो को कैसे न पता चलता, जो हमेशा सबके घरो में रखे धन के बारे में पता करते रहते थे।

जब १० लाख की लॉटरी की खबर उनके कान पर पड़ी, तब दोनों ने चंपक के घर चोरी करने का योजना बनाई।

दोनों आधी रात को चंपक के घर पहुंचे। वहा पहुँचते ही उन्हें एक खिड़की खुली हुई देखी। दोनों चोरो के चेहरे पर मुस्कान तैर गयी और जैसे ही पहले चोर ने खिड़की के अंदर पैर रखा वह गम से भरे बॉक्स में फंस गया। घबराहट के कारण वह रोने लगा।

दूसरे कमरे में आवाज़ सुनकर चंपक और उसका परिवार जाग उठा। चंपक ने देखा की एक चोर दूसरे चोर को बाहर  निकलने की कोशिश कर रहा है। उसने तुरंत ही पुलिस को फोन किया और उन्हें सब कुछ बताया।

१० मिनट के भीतर पुलिस ने पुरे इलाके को घेर लिया और चोरों को आसानी से पकड़ लिया। चंपक की बहादुरी से सब गांव वाले खुश थे। पुलिस की तरफ से चंपक को इनाम भी मिला।

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(3) चंपक के गांव की सफर Champak Stories with Moral

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हर साल की तरह गर्मियों के छुट्टी में चंपक अपने दादा-दादी के घर जाने के लिए तैयार हो गया। चंपक अपने माता-पिता के साथ शहर में रहा करता था। उसके दादा-दादी का घर गांव में था।

चंपक के माता-पिता को ऑफिस से छुट्टी ना मिलने के कारन चंपक को अकेले ही गांव जाना था। उसके माता-पिता ने उसे रास्ते में खाने के लिए कुछ फल दिए और बस पर बैठा दिया। चंपक को शहर के बजाय गांव में रहने में अच्छा लगता था।

जब चंपक गांव के बस स्टैंड पर पहुंच गया, तो उसने देखा की उसके दादाजी पहले से ही उसका इंतज़ार कर रहे थे। गाँव में पहुँचने पर चम्पक बहुत खुश था।  

दादा-दादी के घर उसने खाना खाया और तीनो बात करने बैठे।  कुछ देर बाते करने के बाद दादाजी अपने दुकान पर चले गए और चंपक दादाजी की साइकिल लेके गांव में घूमने लगा।

अगले दिन जब चंपक उठा, तो उन्होंने एक अजीब चीज देखी। उसके दादाजी बहुत सारी प्लास्टिक की बोतल लेकर फ्रिज में रख रहा है। उनका पूरा फ्रिज पानी की बोतल से भर हुआ था।

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“दादाजी इतनी सारी बोतलें फ्रिज में क्यों रख रहे हो?” चंपक ने पूछा। दादाजी ने हस्ते हुए जवाब दिया “तुम्हे थोड़ी देर में पता चलेगा। तुम बस देखते ही रहो।”

कुछ समय बाद एक फल विक्रेता उनके घर आया। दादाजी ने उनसे थोड़े-बहुत फल ख़रीदे और पैसो के साथ फ्रिज में पड़ी एक ठंडी पानी की बोतल दे दी। चंपक ये सब देख रहा था लेकिन उसने कुछ नहीं बोला।

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थोड़ी देर के बाद एक मछली वाला उनके घर आ पहुंचा। दादाजी ने फिर से वही किया और उसे ठंडी पानी की बोतल दे दी। कुछ देर सोचने के बाद चंपक ने अपने दादाजी से पानी की बोतलों के बारे में पूछने का फैसला किया।

तब दादाजी बोले “बेटा, यह प्लास्टिक की खली बोतलो को लोग बेकार में कूड़े में फेक देते है। मैं ऐसा करता हूँ तो गर्मी में बेहाल हो रहे लोगो को ठंडा पानी और मेरे मन को शांति मिलती है। अगर सब लोग ऐसा करने लगे, तो लोगो को गर्मी में बहुत राहत मिल सकती है। तुम्हे भी कभी ऐसा करके देखना चाहिए, मेरी मानो बहुत अच्छा लगता है।”

चंपक को लगा दादाजी बिल्कुल ठीक कह रहे है। थोड़ी सी खुशिया बाटने में कोई हर्ज नहीं है। चंपक ने फैसला किया कि वह शहर में अपने घर पहुंचने पर वैसे ही सब की मदद करने की कोशिश करेगा।  

Moral of Hindi Story- किसी की मदद करने के लिए केवल पैसो की जरूरत नहीं होती, उस के लिए एक अच्छे मन की जरूरत होती हैं।

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(4) शरारती चंपक Champak Story in Hindi

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चंपक बहुत समझदार और बुद्धिमान लड़का था। लेकिन उसके पास एक बुरी चीज थी, उसे कोई भी काम जल्दबाजी में करने की आदत थी। उसकी माँ हमेशा उसे समझाती थी, “बेटा, हर काम आपको धीरे-धीरे और आराम से करना चाहिए, ताकि वह आसानी हो जाये, और ना ही खुद को नुकसान पहुंचे।” लेकिन चंपक कभी किसी की नहीं सुनता था।

एक दिन सुबह चंपक स्कूल जाने के लिए तैयार हो रहा था। वह बहुत उत्साहित था, क्योंकि उसकी कक्षा में आज ड्राइंग प्रतियोगिता होने वाली थी। उसने जल्दी से अपना नाश्ता किया, बैग पैक किया और हाथ में जूते लिए बहार कुर्सी पर बैठ गया।  तभी उसकी माँ ने कहा, “पहले जूते साफ करो और फिर पहनो।”

लेकिन चंपक कभी किसी के सुझाव को सुनने वाला नहीं था। उसने कहा, “इससे क्या फर्क पड़ेगा माँ। कल ही मैंने इसे पहना था।”  चंपक ने लापरवाही से कहते हुए एक जूता पहन लिया। जैसे ही उसने दूसरा पैर अपने जूते में डाला, उसके पैर में कुछ चुभा। उसने जल्दी से अपना पैर बाहर निकाल दिया।

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उसके जूतों में कई बड़ी चींटियाँ थीं। वह जोर से चिल्लाया, “मम्मी-मम्मी काट लिया।”  जब तक उसकी माँ आयी चंपक का पूरा पैर  बड़ी चीटियों से भरा हुआ था। माँ ने उसके शरीर से सभी चींटियों को निकाल दिया।

अब चंपक का एक पैर बुरी तरह से सूज गया था। वह तो बस रो रहा था। उसकी माँ ने चंपक को अस्पताल लेने का फैसला किया।

अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टर ने कुछ क्रीम लगा दी और उसे दो दिन आराम करने की सलाह दी। यह सुनकर चंपक बहुत नाराज हुआ और अपने कमरे में चला गया। वह सारा दिन घर पर रहकर ड्राइंग प्रतियोगिता के बारे में सोचकर रोने लगा।

दो दिनों के बाद अब उनका पैर ठीक हो गया था। वह स्कूल जाने के लिए तैयारी कर रहा था तभी वह सोचने लगा की अगर माँ की बात मान ली होती तो दर्द न सहना पड़ता। उसे उसकी जल्दबाजी की सजा मिली थी। आज उसने आराम से जूते साफ़ किये और फिर पहने। वह मन ही मन मुस्कुरा रहा था।

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(5) चंपक की परीक्षा Champak Stories with Moral Values

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चंपक की परीक्षा पास आ रही थी और वह बहुत ही व्यस्त हो गया था। चम्पक पढ़ाई में बहुत अच्छा था। लेकिंग वो कहते है न की बुरी संगति व्यक्ति को बुरा बना देती है, वैसे ही चंपक अपने दोस्त से परीक्षा में चीटिंग करने को सीखा था।

अब पर्चियां बनाना चंपक को बहुत अच्छा लगता था। वह किताबों से महत्वपूर्ण बातों को छोटी-छोटी पर्चियों में छोटे-छोटे अक्षरों में लिख लिया करता था। फिर यही पर्चियों को कंपास में, जूतों में और अपने कपड़ो में छिपाकर परीक्षा देने चला जाता था।

चंपक बहुत बुद्धिमान और पढ़ाई में बहुत अच्छा था। सिर्फ इसलिए कि उसका दोस्त परीक्षा में पर्चियां लाता था और आसानी से पास हो जाता, यह देखकर उसने भी ऐसा करना शुरू कर दिया।

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पहली परीक्षा इतिहास की थी। चंपक पर्चियां लेकर अच्छी तरह तैयार था। क्लास टीचर चंपक पर बहुत भरोसा करते थे, यही वजह थी कि चम्पत के लिए परीक्षा में पर्चियां लाना आसान हो गया था।

हिस्ट्री पेपर लिखने के बाद दूसरे दिन गणित का पेपर था। चंपक सब फ़ॉर्मूलास पर्चियों पर लिखने में व्यस्त था। तभी चंपक की माँ उसे खाने के लिए ले आयी। माँ ने जब देखा की वह पर्ची बना रहा है, तो उन्हें बहुत हैरानी हुई। उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था की चंपक ऐसा कुछ करेगा। पर उन्होंने अपने गुस्से पर काबू कर लिया और कमरे से बाहर चली गयी।

माँ ने पर्चियों के बारे में कुछ नहीं कहा, पर जैसे ही रात को चंपक सो गया, वह चुपके से चंपक के कमरे में आयी और उसने सारी पर्चियां गायब कर दी।

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सुबह उठकर चंपक ख़ुशी-ख़ुशी स्कूल पहुंचा। उसने इस बार अपनी सारी पर्चियां कंपास बॉक्स में रखी हुई थी। जब शिक्षक ने प्रश्नपत्र वितरित किया, वह बहुत खुश हुआ। वे वही प्रश्न थे, जिनकी वह पर्चियां बना चूका था।

बड़ी ख़ुशी से उसने अपना कंपास बॉक्स खोला तो देखा की सभी पर्चियां गायब थी। चंपक को लगा कि वह पर्चियां कंपास बॉक्स में डालना भूल गया है। वह बहुत डर गया और धीरे-धीरे से रोने लगा। टीचर ने चंपक को देखा और उसके पास उसके पास आकर बोली, “क्या बात है चंपक? पेपर तो बहुत आसान है। हमने बहुत सारे प्रश्न कक्षा में किये है।”

तब जा कर चंपक को आत्मविश्वास आया और बोला, “जी हां मैडम, क्षमा करें, मैं थोड़ा भ्रमित हो गया।” चंपक कोशिश करने लगा, तो कुछ प्रश्नो के हल उसने आराम से कर लिए। अब उसने प्रश्न अपनी मेहनत से हल किये थे, जिससे उसे बहुत ख़ुशी हुई।

घर पहुँचते ही उसके माँ ने उसे पूछा “कैसा हुआ पेपर?” चंपक ने कहा “पेपर अच्छा था। मैं उत्तीर्ण हो जाऊँगा।” और तुरंत अपने कमरे में भाग गया। उसने पर्चियां खोजना शुरू कर दिया। तभी उसकी माँ पीछे आयी और बोली “यह वही है जो आप खोज रहे थे?” चंपक डर गया था कि उसकी माँ अब उसे डांटेगी।

लेकिन उसके माँ ने उसे बहुत समझाया। चंपक को अपनी गलती का एहसास हो गया था। उसे लगा कि वह गलत रास्ते पर चल रहा था। उस दिन से उसने कभी भी पर्चियां नहीं बनाई।

Champak Stories Moral- परीक्षा में चीटिंग करना आसान होता है, पर जब अपने आप लिखते है, तो आपको सबसे अच्छी संतुष्टि मिलती है।

(6) चंपक का मोटापन Magazine Stories In Hindi

Magazine Stories In Hindi

एक चंपक नाम का लड़का था। वह बहुत ही मोटा था। लोग उसके मोटापे के कारण उसको मोटू नाम से ही पुकारते थे। चंपक को बहुत बुरा लगता था, पर वह किसी से कुछ नहीं कह पाता था। चंपक का मोटेपन का कारन वह आलसी था, और दिनभर कुछ न कुछ खाता ही रहता था।

एक बार उसके गांव के बच्चे फुटबाल खेल रहे थे। चंपक भी उनके साथ खेलने गया। वह तेजी से दौड़ नहीं चला पा रहा था और हाँफ भी रहा था। यह देखकर उसके सारे मित्र उस पर हँसने लगे। चंपक को उस दिन बहुत बुरा लगा, पर कुछ नहीं कर सकता था।

अगले दिन चंपक चिप्स खाते हुए टीवी देख रहा था। शाम हो गई। माँ ने पूछा, “आज तुम खेलने नहीं जाओगे क्या?” तो चंपक ने उल्टे उन्हीं से कह दिया, “माँ, आज मेरे बदले तुम्हीं खेलने चली जाओ न!” यह सुनकर माँ ने अपना सिर पीट लिया। चंपक को अब आदत सी पड़ गयी थी, वह अब खेलने भी नहीं जा रहा था।

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एक शाम वह डब्बे से बिस्किट्स निकाल रहा था, इस चक्कर में कुछ बिस्किट्स गिर गए। जब माँ ने पूछा कि किसने गिराए, तो चंपक ने पता नहीं बोल के वहा से भाग कर कहीं जाकर छिप गया।

माँ अब चंपक से आलस और मोटेपन से परेशान हो चुकी थी। एक दिन उसने सब खाने की चीजें छिपाकर रखने का फैसला किया। लेकिन चंपक कहाँ मानने वाला था। एक बार दुपहर में माँ आराम कर रही थी, तभी चंपक किचन में घुस गया और खोजबीन करने लगा। वह सभी डिब्बों को खोल-खोलकर देख रहा था। तभी अलमारी हिली और ऊपर रखी थैली उसके ऊपर गिर गयी। उस थैली में आटा रखा हुआ था।

सारा आटा चंपक पर गिर गया था। चंपक सिर से पाँव तक आटे में नहाया हुआ सफेद भूत बना खड़ा था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करें। इस बीच आवाज सुनकर माँ की नींद खुल गई। उनको लगा कि रसोई में बिल्ली आई है।

जब वो वहाँ पहुँची तो चंपक की हालत देखकर वह बहुत हसने लगी। चंपक को अपनी हरकत पर बहुत शर्म आ रही थी। वह सिर झुकाए खड़ा था। उसने कान पकड़कर शपथ ली कि वह अब से अधिक नहीं खाएगा और आलस भी नहीं करेगा।

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(7) Champak Story Book In Hindi

चम्पक रोज पढ़ाई करता था, पर उसे परीक्षा में या कक्षा में कोई भी पाठ याद नहीं रहता था। चम्पक याद करने का प्रयास तो करता था, लेकिन उसे कुछ भी याद नहीं होता था। इसलिए उसे आये दिन कक्षा में शिक्षक की डांट खानी पड़ती थी। उसकी समझ में नहीं आ रहा था। वह रोज पड़ने वाली शिक्षक की डांट से कैसे बचे। – Champak Stories

एक दिन स्कूल छूटने के बाद वह घर आया। घर आकर खाना खाया और फिर अपना बेग लेकर कमरे में पढ़ने चला गया। चम्पक ने अपना किताब खोला ही था तभी उसे खिड़की के बहार एक चिड़िया की आवाज़ आ गयी। उसने देखा चिड़िया चोंच में एक तिनका दबाकर लाई थी। वह उस तिनके के साथ अपना घोंसला बना रही थी, लेकिन तिनका बार – बार नीचे गिर जाता था।

चिड़िया उड़कर नीचे अति और तिनका चौंच से उठाकर अपने घोसले में रख देती थी। लेकिन तिनका फिर नीचे गिर जाता था। बार-बार प्रयास करने के बाद, चिड़िया तिनके को अपने घोंसले में रखने में सफल हो गई थी। फिर वह दूसरा तिनका लेने चली गई।

चम्पक ने देखा की चिड़िया जब तक तिनका अपने घोंसले में रख नहीं देती थी, तब तक हार नहीं मानती थी। चिड़िया को देखकर चम्पक के मन में विचार आया। इच्छा शक्ति रखकर परिश्रम करने से ही सफलता मिलती है। चिड़िया से सीख का असर चम्पक पर पड़ा। अब उसे शिक्षक की डांट नहीं खानी पड़ती थी और उसे सब याद भी रहता था।

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(8) Champak In Hindi

चंपक किसी न किसी समस्‍या से परेशान रहता था और उसी के बारे में बहुत सोचता रहता था। एक बार शहर से कुछ दूरी पर एक महात्मा का दल रुका हुआ था। है

शहर में चारों और उन्हीं की चर्चा थी। बहुत से लोग अपनी समस्याएँ लेकर उनके पास पहुँचने लगे। जब चंपक को भी इस बारे में पता चला और उसने भी महात्मा के दर्शन करने का फैसला किया।

“बाबा में अपने जीवन में बहुत दुखी हूँ, हर समय समस्याएं मुझे घेरी रहती है, तो कभी कार्यालय में विवाद, तो कभी घर पर परेशानी। बाबा

कोई ऐसा उपाय बता दीजिये कि मेरे जीवन में सभी समस्याएँ का नाश हो जायेगा।” चंपक ने दुखी स्वर से बाबा से कहा।

बाबा मुस्कुराए और बोले, “बालक, आज बहुत देर हो गयी है। मैं तुम्हारे प्रश्न का उत्तर कल सुबह दूंगा। लेकिन तुम मेरा एक काम कर सकते हो?”

“हां बाबा जरूर करूँगा” चंपक उत्साह के साथ बोला।

चंपक की कहानियाँ

“देखो बेटा, हमारे दल मे सौ ऊँट हैं, और इनकी देखभाल करने वाला आज बीमार पड़ गया है। मैं चाहता हूँ कि आज रात तुम इनका ख्याल रखो। और जब सौ के सौ ऊंट बैठ जाएं तभी तुम सो जाना।’” ऐसा कहते हुए महात्मा अपने तम्बू में चले गए।

अगली सुबह महात्मा उस आदमी से मिले और पूछा, ”कहो बेटा नींद अच्छी आई?” “कहाँ बाबा, मैं तो एक पल भी नहीं सो पाया। मैंने बहुत प्रयास किया, पर मैं भी ऊंट को नहीं बैठा पाया कोई न कोई ऊंट खड़ा हो ही जाता” चंपक दुखी होते हुए बोला।

“मैं जानता था यही होगा। आज तक कभी ऐसा नहीं हुआ है कि ये सारे ऊंट एक साथ बैठ जाएं।” बाबा बोले।

चंपक उदास हो कर बोला, “तो फिर आपने मुझे ऐसा करने को क्यों कहा।”

बाबा बोले, “बेटा, कल रात तुमने क्या अनुभव किया। चाहे कितने भी प्रयास कर लो सारे ऊंट एक साथ नहीं बैठ सकते। तुम एक को बैठाओगे तो कहीं और दूसरा खड़ा हो जाएगा। इसी तरह तुम एक समस्या का समाधान करोगे तो किसी कारण दूसरी खड़ी हो जाएगी। जब तक जीवन है ये समस्‍या तो बनी रहती हैं। कभी कम तो कभी ज्यादा। इन समस्याओं के बावजूद जीवन का आनंद लेना सीखो।” चंपक को अपने जींवन का सबसे कठिन सवाल का जवाब मिल चूका था।

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