121 New Hindi Short Stories with Moral for Kids | नैतिक कहानियां Hindi Story

Best Moral Stories in Hindi for all class (नैतिक कहानियां) that teach us Moral lesson on how to be a better person. 121 Hindi Story for Kids will help especially young children and Students to raise their self-esteem and take greater responsibility in Life. नैतिक कहानियाँ इन हिंदी आपको यह सिखाता है कि जिंदगी में एक बेहतर व्यक्ति कैसे होना चाहिए। कहानी पढ़ना छात्रों एवं वयस्कों के लिए अन्य संस्कृतियों के लिए समझना, सम्मान और प्रशंसा विकसित करने का एक अनोखा तरीका है। बेस्ट मोरल स्टोरी इन हिंदी अथवा शार्ट मोटिवेशनल स्टोरी इन हिंदी विथ मोरल इस लेख में सबसे अच्छी नैतिक कहानियों का संग्रह है, जो आपको इंटरनेट पर मिलेगा।

Table of Contents

स्कूल की दोस्ती – Hindi Moral Story

Hindi Moral Story

नरेंद्र बिहार के एक छोटे से गांव के सर्वोदय विद्यालय में पढता था। दरअसल नरेंद्र का परिवार दिल्ली शहर का था, क्यों की नरेंद्र के पिता भारतीय सेना में थे इसलिए दो साल पहले ही उसके पिताजी का उस गांव में बदली हुई थी। नरेंद्र पढ़ाई और खेल में बहुत अच्छा था, इसलिए वह उस गांव के विद्यालय में बहुत लोकप्रिय था।

एक दिन अचानक उसके पिताजी की बदली पटना शहर में हुई। दो महीने के अंदर नरेंद्र के परिवार को वह गांव छोड़कर पटना जाना पढ़ रहा था। दूसरे विद्यालय में वह कैसे जाएगा, उसका मन लगेगा या नहीं यह सोचकर नरेंद्र परेशान था।

उसकी परेशानी को देखकर उसकी की माँ ने उसे समझाया, “बेटा, हमें यह गांव छोड़कर तो जाना ही पड़ेगा। परंतु तुम्हें ज़्यादा निराश होने की जरूरत नहीं, थोड़े ही दिनों में वहां भी तुम्हारे मित्र बन जाएंगे और तुम्हारा मन स्कूल व मित्रों में लगने लगेगा।”

Hindi Moral Story

ट्रांसफर का ऑर्डर लेकर जब नरेंद्र के पिता अपने परिवार के साथ पटना पहुँचे तो यह नया शहर नरेंद्र के मन को एकदम भा गया। वहां शीघ्र ही एक अच्छे विद्यालय में नरेंद्र को दाखिला मिल गया। परंतु जब नए विद्यालय में नरेंद्र को उसकी कक्षा के विद्यार्थियों ने चिढ़ाना शुरू किया तो उसे बहुत बुरा लगा। नरेंद्र बहुत दुखी लगने लगा।

एक दिन जब उसकी माँ ने उससे खुलकर इसका कारण पूछा तो फिर नरेंद्र ने माँ से सभी बातें स्पष्ट बता दीं। वह माँ से यह बताते हुए कि कक्षा के विद्यार्थी उसे चिढ़ाते है और उसे अपने साथ नहीं खेलने नहीं देते है।

उसकी माँ ने उसे समझाया, “बेटा विद्यालय तो जाना ही होगा। जब तुम्हें बच्चे चिढ़ाएं तो तुम कुछ मत कहना और न ही मुँह बनाना। बल्कि उनके साथ हँसने लगना। और तुम बच्चों से खुद ही बात करने की कोशिश करना। उन्हें यदि पढ़ाई में कोई दिक्कत होती हो तो उनकी मदद करना। धीरे-धीरे सब ठीक हो जाएगा।”

नरेंद्र माँ की बताई तरकीब के अनुसार चलता गया। अब पुराने विद्यालय की ही तरह नरेंद्र इस विद्यालय में भी प्रसिद्ध होने लगा था। अपनी पढ़ाई और मेहनत के दम पर उसने अध्यापकों के बीच भी अपनी अच्छी पहचान बना ली थी। अब सब बच्चे भी उससे मित्रता करने को आतुर थे।

Moral of the Story – जीवन में कोई सही निर्णय नहीं है, क्योंकि हम जो भी निर्णय लेते हैं वह नया और अप्रत्याशित होता है।

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अलसी होने का नतीजा – Naitik Kahani in Hindi

Naitik Kahani

उत्कर्ष बडा ही आलसी लड़का था। वह पढ़ाई में बहुत कमजोर था और अक्सर परीक्षा में फेल हो जाया करता था। अपनी मां से झूठ बोल कर वह पैसे ले लिया करता और मित्रों के साथ घूमता।

एक दिन स्कूल छूटने के बाद उत्कर्ष शाम के समय घूमने निकला। उसने सोचा कि पहले में चलकर नाश्ता कर लिया जाए। वह एक होटल में घुसा। होटल से निकल कर उसकी इच्छा सिनेमा देखने की हुई। तभी उसने देखा कि उसके जूते गंदा हो गए है और उसने सोचा क्यों न उन पर थोड़ी पोलिश लगवा दी जाए। यह सोचकर वह सामने की ओर बढ़ गया। वहीं एक पेड़ फे नीचे एक बूढा आदमी मोची का काम कर रहा था। उस समय उसके पास कोई ग्राहक भी नहीं था।

उत्कर्ष ने अपना दाहिना पांव उसके सामने कर दिया, और उस बूढ़े आदमी ने अपनी पोलिश की डिबिया खोली और मन लगा कर पालिश करने में जुट गया।

Naitik Kahani in Hindi

तभी उस बूढ़े आदमी का बेटा मामूली वेशभूषा में वहां आया। उसके हाथ में कुछ पुस्तकें थी। वह स्कूल से सीधा ही चला आ रहा था। आते ही उसने पुस्तकें एक किनारे रख दीं और बड़े प्रसन्‍न मन से अपने पिता से बोला, “बापू, अब तुम उठो। दिन भर काम करते-करते तुम थक गए होंगे। जरा आराम कर लो। सर के जूते मैं चमका देता हूँ।”

अपने बेटे की बात सुनकर बूढ़ा आदमी धीरे से उठा और घर की ओर चल दियां। यह सब देख कर तो उत्कर्ष अचरज में पड गया। उसने पूछा, “क्यों भाई, क्या तुम कहीं नौकरी करते हो?“ “जी नहीं, मै पढ़ता हूँ।” बूढ़े आदमी के बेटे ने कहा।

“लेकिन उसके बाद भी तुम यह नींच काम करते हो, क्या तुम्हें शर्म नहीं आती?” उत्कर्ष ने पूछा। “काम करने में शर्म कैसी। मेरे बापू यही काम करके मुझे पढ़ा लिखा रहे हैं।

शाम को मैं उनकी मदद किया करता हूँ। बूढे हो गए हैं न, थक जते हैं। उनकी हर तरह से मदद करना मैं अपना कर्तव्य समझता हूँ। दुनिया में कोई काम छोटा नहीं होता, दरअसल जो काम करता है उसे ही बड़ा आदमी कहलाता है” उस लड़के ने जवाब दिया।

Moral of the Story – उस लड़के की यह बात सुनकर उत्कर्ष जैसे आसमान से धरती पर आ गिरा। आज उसे अपने जीवन का सही सबक मिल गया था। उसने सोचा की उसे काम तो नहीं करना पढ़ता है। पर वह अपना कर्तव्य, जो की पढ़ाई करना जरूर पूरा करेगा।

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पोपटलाल का कुत्ता – Hindi Story for Kids

Hindi Story for Kids

एक दिन पोपटलाल गाँव की गलियों में घूम रहा था, उसने देखा की एक घर के बाहर एक कुत्ते का बच्चा कटोरे में खाना खा रहा है। वो कटोरा बहुत ही अनोखा था। उसने सोचा, “इस कटोरे की कीमत बाज़ार में बहुत ज्यादा होगी। लगता है इस घर के मालिक को इस कटोरे की कद्र नहीं जानते, इसलिए उसमे कुत्ते के पिल्लै को खाना खिला रहा है।”

उसने पास ही बैठे उस घर के मालिक से कहा, “भाई साहब! मुझे आपके कुत्ते के पिल्लै अच्छे लगे, मैं दोनों के लिए १००० रुपयों दूंगा। वैसे भी इस साधारण कुत्ते की क्या कीमत।”

वह आदमी बोला, “साहब! १००० बहुत कम हैं, हाँ मुझे आप ८००० अभी दे तो कुत्ते के दोनों पिल्लै आपके।”

पोपटलाल ने कुछ मोलभाव करना चाह पर वो घर का मालिक नहीं माना। अनोखे कटोरे की लालच में पोपटलाल ने उसे ८००० रूपये दे  भी डाले। पोपटलाल सोच रहा था की कटोरे की कीमत तो कम से कम उससे पांच गुने ज्यादा होगी।

कुत्ते के पिल्लो को ले जाते हुवे पोपटलाल ने अपना दाव खेला, “भाई साहब! अब जब पिल्लै मैंने खरीद ही लिया हैं, तो आप इस कटोरे का क्या करेंगे? ये भी मैं ५० में खरीद लेता हूँ।

घर का मालिक बोला, “नहीं साहब वो तो मैं नहीं बेचूंगा।”

पोपटलाल तो चकरा गया और पूछने लगा, “ऐसा क्यू?? क्या खास है इस कटोरे में?”

घर का मालिक बोला, “वो तो मुझे नहीं मालूम, पर ये मेरे लिए बहुत लकी हैं। पिछले पिछले महीने से मैंने जब से इस कटोरे में कुत्तों को खाना देना शुरू किया हैं, मैंने पन्द्रह कुत्तों बेच दी हैं।

दो भाई के दो अलग रास्ते – Short Moral Stories in Hindi for Class 1

केरला के एक छोटे से गांव में दो भाई रहते थे। एक का नाम मोहित था, वह शहर का सबसे बड़ा बिजनेसमैन था। तो दूसरे का नाम मंगल था, वह शराबी था। मंगल गांव में अपने भाई के पैसो से रह रहा था, और पूरा दिन सिर्फ शराब ही पिता रहता था। वह किसी की एक बात नहीं सुनता था। छोटे भाई मोहित ने भी उसे समजना बंद किया था क्यों की मंगल उसका बड़ा भाई था और वह बहुत गुस्सा होता था। लेकिन हर महीने मोहित उसे पैसो की मदद करता था।

एक दिन गांव के कुछ लोगो ने इस समस्या के बारे में दोनों भाइयों से बात करने की सोची। वे पहले बड़े भाई यानी मंगल के घर चले गए। मंगल हमेशा की तरह शराब पि कर जमीन पर लेता था। लोगों ने उसे कुर्सी पर बैठाया और ज्यादा शराब पिने की वजा पूछ ने लगे।

मंगल बोला, “मेरे पिता शराबी थे, वे अक्सर मेरी माँ और हम दोनों भाइयों को पीटा करते थे। भला तुम लोग मुझसे और क्या उम्मीद कर सकते हो। मैं भी वैसा ही हूँ।”

फिर वे छोटे भाई के पास चले गए। वो अपने काम में व्यस्त था और थोड़ी देर बाद उनसे मिलने आया।

गांव के लोगों ने इस भाई से भी वही प्रश्न किया, “आप इतने सम्मानित बिजनेसमैन हैं, सभी आपकी प्रशंसा करते हैं, आखिर आपकी प्रेरणा क्या है?”

“मेरे पिता“ मोहित ने बोला

लोगों ने आश्वर्य से पूछा , “भला वो कैसे?”

“मेरे पिता शराबी थे, नशे में वो हमें मारा- पीटा करते थे। मैं ये सब चुप -चाप देखा करता था, और तभी मैंने निश्चय कर लिया था की मैं ऐसा बिलकुल नहीं बनना चाहता। मुझे तो एक सभ्य, सम्मानित और बड़ा आदमी बनना है और मैं वही बना।” मोहित ने अपनी बात पूरी की।

Moral of Hindi Story – हमारी सोच ही है जो हमे एक अच्छा व्यक्ति बनाती है।

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फलों का भगवान – Moral Stories in Hindi for Class 10

Moral Stories in Hindi for Class 10

केशवलाल का अपने घर के आसपास बहुत बड़ा बगीचा था। वह बहुत मेहनत से अपने बगीचे की देखभाल पुरे साल भर करता था। ज्यादा तर बगीचे के फल वह अपने परिवार में ही देता था और कुछ बचे हुए वह बाजार में बेचता था। वह बहुत ही साधारण जीवन जीता था पर अपनी बगीचे की देखभाल बहुत अच्छे से करता था।

एक दिन अपने बेटी के साथ जब केशवलाल फल उठा रहा था तो उसने एक अजनबी को पेड की शाखा पर बैठे हुए देखा और वह अजनबी फल तोड़ रहा था। केशवलाल यह देखकर गुस्सा हो गया और वह चिल्लाया, “कौन हो तुम? तुम मेरे पेड़ पर क्या कर रहे हो? क्या तुम्हें शर्म नहीं आती दिन के समय तुम फल चुरा रहे हो?”

पेड को शाखा पर बैठे अजनबी ने केशवलाल को देखा लेकिन उसने उसकी बात का जवाब नहीं दिया और फल उठाता रहा। केशवलाल बहुत गुस्सा हो गया और फिर चिल्लाया, “पूरे साल इन पेड़ों को रखवाली मैने की है, तुम्हें मेरी इजाजत के बिना इनके फल लेने का कोई अधिकार नहीं है। नीचे आ जाओ।”

पेड पर बैठे अजनबी ने जवाब दिया, “मै नीचे क्यों आऊ? यह भगवान का बगीचा है और मैं भगवान का सेवक हूं इसलिए मुझे यह फल तोड़ने का हक है और तुम्हें भगवान के काम और उसके सेवक के बीच में नहीं आना चाहिए।” केशवलाल उसका यह जवाब सुनकर बहुत हैरान हो गया।

Moral Stories in Hindi for Class 10

केशवलाल ने एक डंडी ली और उसने अजनबी को मारना शुरू कर दिया। अजनबी चिल्लाने लगा, “तुम मुझे क्यों मार रहे हो? तुम्हें यह करने का कोई हक नहीं है।” केशवलाल ने ध्यान नहीं दिया और वह उसे लगातार मारता रहा।

अजनबी चिल्लाया, “तुम्हें भगवान से डर नहीं लगता। तुम एक मासूम इंसान को मार रहे हो?”  केशवलाल ने जवाब दिया, “मुझे डर क्‍यों लगेगा? मेरे हाथ में जो छड़ी है वह भगवान की है और मैं भी भगवान का सेवक हूं इसलिए मुझे किसी चीज से डरने की जरूरत नहीं और तुम्हें भगवान के काम और उसके सेवक के बीच में नहीं बोलना चाहिए।”

अजनबी यह सुनकर चुप हो गया और फिर बोला, “रुको, मुझे मत मारो, मुझे माफ करो कि मैने तुम्हारे फल चुराए। यह तुम्हारा बगीचा है और मुझे फल तोड़ने के लिए तुम्हारी इजाजत लेनी चाहिए थी। इसलिए मुझे माफ करो और छोड दो।”

केशवलाल यह सुनकर मुस्कुराया और कहा, “क्योंकि अब तुम्हें तुम्हारी गलती का अहसास हो गया है मै तुम्हें माफ कर दूंगा।”  इसके बाद केशवलाल ने उसे छोड़ दिया और वह अजनबी वहां से चला गया।

मेहनत पर भरोसा – Moral Stories for Childrens in Hindi

Moral Stories for Childrens in Hindi
Hindi Short Stories with Moral

अनूप और कल्पेश दो अच्छे दोस्त थे। वे दोनों एक ही कक्षा में साथ में ही पढ़ते थे। पढ़ाई में दोनों ही बड़े होशियार थे। पढ़ाई करना उनका पहला काम था। अन्य चीजों पर वे बाद में ध्यान देते थे।

पढ़ाई में उन दोनों मुकाबला रहता था। कभी अनूप प्रथम आता, तो कभी कल्पेश। दोनों में यह बताना मुश्किल था कि पढ़ाई में कौन आगे है। दोनों को उनके क्लास टीचर भी बहुत चाहते थे। क्लास के सभी बच्चे उन दोनों का बहुत आदर करते थे, क्योंकि वे दोनों पढ़ाई में होक्षियार होने के साथ ही स्राथ दयातु और नम्न स्वभाव के थे।

कक्षा आठ की परीक्षा हुई। दोनों ने जमकर परीक्षा दी। परीक्षा का रिजल्ट भी घोषित हुआ। इस बार का परीक्षा में अनूप और कल्पेश तो क्या, क्लास के सभी बच्चे और खुद अध्यापक भी हैरान रह गए थे। हर परीक्षाओं में तो अनूप और कल्पेश लगभग साथ-साथ ही रहते थे, मतलब कभी अनूप कल्पेश से दस-पन्द्रह मार्क्स से आगे रहता तो कभी कल्पेश अनूप से | मगर इस बार न जाने क्या हुआ कि कल्पेश ने अनूप से लगभग पचास मार्क्स से बाजी मार ली थी।

परीक्षा के रिजल्ट के बाद दोनों स्कूल से घर लौट रहे थे। अनूप ने कल्पेश से कहा, “क्यो कल्पेश! इस बार तो तुम मुझे बहुत पीछे छोड़ गए। मेरा ऐसा भाग्य कहां, जो तुम्हारे मार्क्स पा सकू।” “नहीं अनूप! ऐसा तो नहीं।” मुस्कराता हुआ कल्पेश बोला। वह अपनी प्रशंसा सुनकर फूला नहीं समा रहा था।

Moral Stories for Childrens in Hindi

मन ही मन उसे अपने क्लास में सबसे अधिक मार्क्स से पास होने एवं अनूप के द्वार प्रशंसित होने से कल्पेश के मन में अभिमान जाग उठा। घमंड में कल्पेश के मन-मस्तिष्क पर ऐसा बुरा असर छोड़ा कि वह पढ़ाई रे धीरे-धीरे विचलित होने लगा। क्लास में जब शिक्षक पढ़ाने लगते तो वह दूसरे बच्चों से बातें करने लगता।

एक दिन शिक्षक इतिहास पढ़ा रहे थे। तीसरी पंक्ति में बैठे कल्पेश को बगल के एक लड़के से बातें करते देख शिक्षक ने कल्पेश को बहुत डांटा और छड़ी से उसे पीटा, और फिर उन्होंने पढ़ाना जारी रखा। इस सजा से कल्पेश का क्लास में बातें करना तो बन्द हो गया, परन्तु पढ़ाई पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा। वह घमंड में आकर अनूप से भी कम बोलने लगा।

धीरे-धीरे परीक्षा आने लगी। क्लास के बच्चे जी जान से पढाई मे लग गए थे। कल्पेश बहुत ही आराम में था क्यों की उसे पता था की क्लास में पहला नंबर उससे कोई नहीं चीन सकता है।

परीक्षा हुई। कुछ दिनों बाद परीक्षा का रिजल्ट आ गया। इस बार अनूप क्लास में सबसे पहला आया था, जबकि कल्पेश इस बार अपना परीक्षा का रिजल्ट देखकर चौंक पड़ा। वह परीक्षा में फेल था। कल्पेश की अपनी करनी का फल मिल चुका था।

Moral of the Story – दोस्तों जिंदगी में हमेशा अपनी मेहनत पर भरोसा करो।

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एक महत्वपूर्ण सबक – Hindi Story for all Class Students

Hindi Story for all Class Students

भोरिया नगर में एक व्यापारी का परिवार रहता था। उस परिवार में दो भाई रहते थे। सौरभ बड़ा भाई और शुभम छोटा भाई था, जिसमें सौरभ की शादी हो चुकी थी। सौरभ की पत्नी अपूर्वा में एक बुरी आदत यह थी कि वह घर की हर बात अपने पड़ोसियों को बता दिया करती थी। इस बात को लेकर सौरभ बहुत परेशान रहा करता था।

एक दिन उसने सोचा क्यों न अपूर्वा को सबक सीखा दिया जाये और उसने एक योजना बनाई। सौरभ ने अपूर्वा को बिना बताये अपने छोटे भाई शुभम को दुकान का सामान लेने शहर भेज दिया। योजना के अनुसार उसी रात उसने अपने घर के आंगन में गड्डा खोदकर उसमें एक मरा हुआ कुत्ता डाल दिया। जब सौरभ गड्डे को भर रहा था तभी अपूर्वा की नींद खुल गई।

उसने देखा कि उसका पति घर के आंगन में एक गड्डे को भर रहा हैं। उसने पास आकर धीरे से पूछा, “अजी ये क्या कर रहे हैं?”

सौरभ ने इशारा करते हुए कहा, “चुप रहो। मैंने छोटे भाई को जान से मार डाला है और उसकी लाश यहीं गाड दी है। अब यह पूरी दुकान और व्यापर हमारा है। यदि छोटा भाई होता तो हमें उसका हिस्सा देना पड़ता था। इसलिये उसे रास्ते से ही हटा दिया। यह बात तुम किसी से मत कहना।”

इतना कहकर सौरभ गड्डे की मिट्टी को बराबर करके घर में सोने के लिए चला गया।

Hindi Story for all Class Students

दूसरे दिन सुबह सौरभ दुकान में काम करने चला गया। अपूर्वा भी अपना घर का काम निपटाकर पड़ोस में बैठने चली गई। बात ही बात में उसने अपनी पडोसिन से कहा, “अरे सुन किसी से कहना मत, कल रात हमारे पति ने अपने छोटे भाई को जान से मार डाला।” यह बात शाम होते-होते पूरे गांव में फैल गई। पुलिस में भी किसी ने इस बात की सूचना दे दी।

शाम को जब सौरभ दुकान से लौटा तो देखा उसके घर पर चार पुलिस वाले खड़े हैं। उन्हें  देखकर वह बिलकुल घबराया नहीं। पुलिस ने कडकदार आवाज में कहा, “हमें खबर मिली है कि तुमने छोटे भाई को जान से मार दिया है और उसकी लाश कहीं छिपा दी है।’”

यह सुनकर सौरभ बोला, “साहब भला मैं अपने भाई को जान से क्यों मारूंगा? कल ही मैंने उसे दुकान का सामान लेने शहर भेजा है। शायद वह अब आता ही होगा हा रात में मैंने आगर में एक गड्डा खोदा और उसमें एक मरा हुआ कुत्ता गाड़ दिया है। यह मैंने इसलिए किया क्योंकि मेरी पत्नी की एक बुरी आदत थी कि वह घर की जरा-सी बात को बाहर के लोगों को बता देती थी। उसकी आदत को सुधारने के लिये मैंने यह सब

कुछ किया। ताकि इससे उसे सबक मिल जाय।” इतना कहकर सौरभ ते पोलिस को गड्डे के पास ले गया और खोद कर मरा हुआ कुत्ता दिखा दिया।

अपूर्वा ने सब के सामने अपने पति से क्षमा मांगते हुए कहा, “अब मैं भविष्य में कभी भी घर की बात बाहर नहीं कहूँगी।”

Moral of theHindi Story for Kids घर की बाते हमेशा घर में ही रही तो अच्छी बात है।

अपराध किसका? New Moral Stories in Hindi

 New Moral Stories in Hindi
Hindi Short Stories with Moral

एक बार रामपुर के राजा के मन में एक बात आई। वह जानना चाहते थे कि जो लोग किसी न किसी अपराध के कारण दंडित किए जाते हैं, उनमें सचमुच कोई पश्चाताप की भावना आती है या नहीं।

दूसरे दिन वह राजा अचानक अपने राज्य के बंदी गृह में पहुंच गया और सभी कैदियों से उनके द्वारा किए गए अपराध के बारे में पूछने लगा।

एक कैदी ने कहा, ”राजन! मैंने कोई अपराध नहीं किया है। मैं निर्दोष हूं।”

दूसरा बंदी बोला, ”महाराज! मुझे मेरे पड़ोसिओं ने फंसाया गया है। मैं भी निर्दोष हूं।”

इसी तरह सभी बंदी अपने आप को निर्दोष साबित करने लगे। फिर राजा ने अचानक देखा कि एक व्यक्ति सिर नीचे किए हुए आंसू बहा रहा था। राजा ने उसके पास जाकर पूछा कि तुम क्‍यों रो रहे हो?

उस कैदी ने बड़ी विनग्रता से कहा, “हे राजन! मैंने गरीबी से तंग आकर चोरी की थी। मुझे आपके न्याय पर कोई शक नहीं है। मैंने अपराध किया था, जिसका मुझे दंड मिला।”

राजा ने सोचा कि दंड का विधान सभी के अंदर प्रायश्चित का भाव पैदा नहीं करता है। लेकिन उन सभी कैदियों में से एक यही ऐसा व्यक्ति है जो अपनी गलती का प्रायश्चित कर रहा है। यदि इस व्यक्ति को दंड से मुक्त किया जाए तो यह अपने अंदर सुधार कर सकता है।

राजा ने उसे तुरंत जेल से रिहा करने का आदेश दिया और उसे दरबार में नौकरी पर रख दिया।

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घर के संस्कार – Small Moral Story for Kids in Hindi

Small Moral Story for Kids in Hindi

चंद्रकांत और सोमनाथ एक ही क्लास में पढ़ते थे और वे एक दूसरे के पड़ोसी भी थे। सोमनाथ पढ़ाई के साथ-साथ खेलने में भी अच्छा था और चंद्रकांत स्कूल छूटने के बाद सिर्फ खेलता और गांव भर घूमता रहता था।

एक दिन स्कूल में खेल दिवस आयोजित किया था और सोमनाथ ने कई खेल में हिस्सा लिया था। चंद्रकांत ने खेल दिवस पर कोई भी खेल में हिस्सा नहीं लिया था, वह सिर्फ अपने दोस्तों के साथ ग्राउंड पर दूसरे छात्रों का मजाक उड़ा रहा था।

अगले दिन स्कूल में प्राइज वितरण समारोह हुआ, सोमनाथ ने कई ईनाम जित लिए थे। चंद्रकांत को कई घंटे बेंच पर खड़ा किया गया। चंद्रकांत ने यह बात अपनी माँ को बताई। उसकी माँ ने उसे अपनी बेइज़्ज़त समझा। वह सोमनाथ के घर जा कर उसकी माँ से उलाहना देने ली, “अरे इनाम क्या मिल गया है कि सारे स्कूल में नचा-नचा कर दिखा रहा था। और हमारे चंद्रकांत को बेंच पर खड़ा करवा दिया।”

“किसने खड़ा करवा दिया बेंच पर? सोमनाथ ने?”” सोमनाथ की माँ ने पूछा। उन्हें पूरी स्थिति का पता नहीं था।

“हाँ, और क्या?” चंद्रकांत की माँ ने गुस्से से कहा।

“सोमनाथ को क्या पड़ी है जो बेंच पर खड़ा करवाएगा। पढ़ाई नहीं की होगी इसलिए रखा होगा।” सोमनाथ की माँ ने कहा।

“अरे तुम लोग दुश्मनी निकलवाते हैं। जलते हैं कि हम अच्छा खाते हैं अच्छा पहनते है।” चंद्रकांत की माँ ने कहा।

Hindi Story for Kids

मगर सोनू की माँ ने धीरज से काम लिया। बोली, “कल स्कूल चल कर पता करेंगे की हुआ क्या था।’”

“मैं देख लूंगी एक-एक को। स्कूल के मैनेजर से कह कर उस मास्टरनी को न निकलवा दिया तों कहना। जब देखो तब हमारे चंद्रकांत को सजा देती रहती है। अरे, और भी तो बच्चे हैं स्कूल में।’” चंद्रकांत की माँ का गुस्सा बढ़ता ही जा रहा था।

तभी सोमनाथ घर में आया। आते ही उसने उत्साह में कहा, “माँ, आज बड़ा ही मजा आया!!”

“हाँ, मजा क्‍यों नहीं आया होगा? चंद्रकांत को बैंच पर खड़ा करवा कर तुम्हे मजा जो आ रहा है।” चंद्रकांत की माँ बोल पड़ी।

सोमनाथ सहम गया। उसे यह पता था कि चंद्रकांत को बैच पर खड़ा किया गया था। वह धीरे से बोला, “चाची, चंद्रकांत दो दिन से होम वर्क नहीं करके ले जा रहा है। इसीलिए उसे सजा मिली। मैंने कहा मेरी कॉपी से उतार ले। वह भी वह नहीं करता।”

“हाँ, तू तो बहुत तेज है। देख लूंगी सबको” कहती हुई वह चली गई।

सोमनाथ की माँ चंद्रकांत की माँ को देखती रह गई। फिर उन्होंने सोमनाथ के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा, “चल, बैग रख कर हाथ मुँह घो ले। स्कूल से इतनी देर में क्यों आया?”

“माँ देखो मुझे कितने सारे इनाम मिले है।” सोमनाथ अपने इनाम अपनी माँ को दिखते हुए बोला।

Moral of Hindi Story for Kids वो कहते है न संस्कार घर से ही आते है। दूसरों को दोष देने से पहले खुद को देखें।

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सबसे होशियार इंसान – Hindi Story for Class with Moral

Hindi Story for Class with Moral

एक बार एक छोटे प्राइवेट हवाई जहाज में शाम के समय एक डॉक्टर, एक वकील, एक छोटा बच्चा और एक पंडित जी जा रहे थे। अचानक हवाई जहाज के इंजिन में कुछ तकनीकी खराबी हो गई। पायलट की तमाम

कोशिशों के बावजूद हवाई जहाज नीचे जाने लगा। पायलट ने पैराशूट लेकर मुसाफिरों से कहा कि वह कूद जाए और खुद को बचा लें। दुर्भाग्य से सिर्फ तीन पैराशूट बचे थे और हवाई जहाज में चार लोग बाकि थे।

एक पैराशूट डॉक्टर ने ले लिया और कहा “मैं डॉक्टर हूं, मैं जिंदगियां बचाता हूं इसलिए मुझे जीना चाहिए।” यह कहकर वह कूद गया।

फिर वकील ने कहा, “मैं वकील हूं और वकील दुनिया के सबसे होशियार इंसान होते है।” उसने पैराशूट लिया और वह भी कूद गया।

पंडित जी ने छोटे लड़के की ओर देखा और कहा, “बेटा, मैने अपनी जिंदगी जी ली है। तुम अभी छोटे हो और तुम्हारी पूरी जिंदगी पड़ी हे। यह आखिरी पैराशूट लो और आराम से जीना।”

छोटे लड॒के ने पैराशूट पंडित जी को वापिस किया और कहा, “आप परेशान ना हो। जो आदमी खुद को सबसे होशियार बता रहा था वह मेरा बैग लेकर नीचे कूद गया है। हमारे पास दोनों पैराशूट सुरक्षित है। हम आराम से नीचे कूद सकते है।”

Moral of the Story – आपके काम से आपकी पहचान नहीं होती बल्कि एक अच्छा इंसान बनने से आपकी पहचान होती है।

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नौकरी की चिंता – नैतिक कहानियां

शामलाल ने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद भी उसे नौकरी नहीं मिली इसलिए वह डिप्रेशन में चला गया। वह अकेले कमरे में रहने लगा। उसके माता-पिता ने भी बहुत कोशिश की उसे नौकरी दिलाने लेकिन वो भी असफल रहे।

एक दिन शामलाल के पिता ने उसे अपने कमरे में रोते हुए देखा। उसने अनदेखा किया और रसोईघर में जाकर शामलाल को आवाज दी। शामलाल थोड़ी देर में रसोईघर में आया। शामलाल के पिता ने तीन बर्तनों में पानी भरा और तीनों को आग पर रख दिया।

जब बर्तन में रखा पानी उबलने लगा तो उन्होंने एक बर्तन में कुछ आलू डाले, दूसरे में अंडे डाले और तीसरे में कॉफी के बीज डाले। फिर उन्होंने पानी को उबलने दिया। वह अपनी बेटे से बिना कोई शब्द कहे चुपचाप बैठ गए। शामलाल को प्रतीक्षा करने में मुश्किल हो रही थी और वह सोच रहा था कि उसके पिता क्‍या कर रहे है।

पंद्रह मिनट बाद उसके पिता ने गैस बंद की। उन्होंने बर्तन में से आलू निकाले और एक कटोरी में डाल दिए। फिर उन्होंने अंडे निकाले और उसे दूसरी कटोरी में डाल दिए। फिर उन्होंने कॉफी निकाली और कप में डालीं।

अपने बेटे की तरफ देखते हुए उन्‍होंने उससे पूछा, “तुम क्या देख रहे हो?” शामलाल ने जवाब दिया, “आलू, अंडे और कॉफी” फिर पिता ने कहा, “थोड़ा करीब से देखों और आलू को छूकर देखो।” शामलाल पास गया और उसने देखा कि आलू नरम थे।

नैतिक शिक्षाप्रद कहानियाँ

फिर पिता ने उसे अंडा लेकर तोड़ने के लिए कहा। अंडे का छिलका उतारने पर शामलाल ने देखा कि अंडा अंदर से पका हुआ था। फिर आखिर में पिता ने उसे कॉफो पीने के लिए कहा। कॉफी की खुशबू से उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई। उसने अपने पिता से पूछा, “इसका कया मतलब है?” फिर उसके पिता ने बताया कि, “आलू, अंडे और कॉफी को मैंने एक हो मात्रा में पानी में उबाला। लेकिन तीनों पर उसका प्रभाव अलग अलग हुआ।

आलू मजबूत था लेकिन गर्म पानो में डालकर बह नरम और कमजोर हो गया। अंडा पहले नाजुक था और उसकी बाहरी परत उसका ध्यान रखती है लेकिन पानी में डालकर बह मजबूत हो गा। लेकिन काफी के. चीज अनमोल थे। जब उन्हें उबलते हुए पानी में डाला गया तो कुछ नया निकलकर सामने आया।”

फिर पिता ने अपने बेटे शामलाल से पूछा, “तुम इनमें से कौन हो? जब तुम्हारे सामने कोई मुसीबत आती है तो तुम किस, तरह सामना करते हो? क्‍या तुम आलू हो, अंडा हो, या कॉफी के बीज हो?”

Moral of the story – जिंदगी मे सीखना और मुश्किलों को दूर करना चलता रहता है। हमें हर दिन कुछ नया अनुभव करने को मिलता है जिससे हम अपनी जिंदगी को बेहतर बनाते हैं।

लालची व्यापारी – Lalchi Vyapari ki Kahani

Lalchi Vyapari ki Kahani

एक भिखारी को बाज़ार में चमड़े का एक बटुआ पड़ा मिला। उसने बटुए को खोलकर देखा। बटुए में सोने की सौ सिक्के थे। तभी भिखारी ने एक व्यापारी को चिल्लाते हुए सुना, “मेरा चमड़े का बटुआ खो गया है! जो कोई उसे खोजकर मुझे सौंप देगा, मैं उसे एक अच्छा सा ईनाम दूंगा!”

भिखारी बहुत ईमानदार आदमी था। उसने बटुआ व्यापारी को सौंपकर कहा, “ये रहा आपका बटुआ। क्या आप मुझे ईनाम देंगे?”

“ईनाम?” व्यापारी ने अपने सिक्के गिनते हुए हिकारत से कहा, “इस बटुए में तो दो सौ सिक्के थे! तुमने आधी रकम चुरा ली और अब ईनाम मांगते हो? दफा हो जाओ वर्ना मैं सिपाहियों को बुला लूँगा।”

इतनी ईमानदारी दिखाने के बाद भी व्यर्थ का दोषारोपण भिखारी से सहन नहीं हुआ।  वह बोला, “मैंने कुछ नहीं चुराया है! मैं दरबार जाने के लिए तैयार हूँ।”

दरबार के अदालत में दोनों की बात सुनी और कहा, “मुझे तुम दोनों पर यकीन है. मैं इंसाफ करूँगा।  व्यापारी, तुम कहते हो कि तुम्हारे बटुए में दो सौ सिक्के थे।  लेकिन भिखारी को मिले बटुए में सिर्फ सौ सिक्के।  इसका मतलब यह है कि यह बटुआ तुम्हारा नहीं है। चूंकि भिखारी को मिले बटुए का कोई दावेदार नहीं है इसलिए मैं ईनाम में भिखारी को पुरे सौ सिक्के देता हूँ।”

लालची व्यापारी हाथ मलता रह गया। अब वह चाहकर भी अपने बटुए को अपना नहीं कह सकता था क्योंकि ऐसा करने पर उसे कड़ी सजा हो जाती। भिखारी को ईमानदारी का एक अच्छासा ईनाम मिल गया था।

शहद का स्वाद – Moral Story in Hindi for Education

कावेरी गांव में दो अच्छे मित्र रमाकांत और सुयोग रहते थे। वे दोनों सातवीं कक्षा में पढ़ते थे और अधिकतर साथ ही रहते-खेलते थे।

एक दिन स्कूल छूटने के बाद उन्होंने शहद खाने का विचार किया। बाजार से खरीदे हुए शहद मे वह स्वाद नहीं होता था इसलिए दोनों ने मधुमखियों की खोज शुरू कर दी। मधुमखियों को ढूढ़ ने के लिए उन्हें गांव के बाहरी जंगल में जाना पड़ता था। रमाकांत ने सुयोग को बताया कि गांव के थोड़े बाहर चलने के बाद नदी किनारे जंगल में एक पेड़ पर मधुमखियों का घोसला है।

योजना के अनुसार दूसरे दिन दोनों जंगल की ओर चल पड़े। रमाकांत ने अपने साथ एक लम्बी सी लकड़ी भी ले ली थी। सुयोग अपने घर से एक बड़ी सी टोकरी लेके आया था।

जब वे जंगले के नदी किनारे पहुंच गए तो मधुमखियों का घोसला देखकर बहुत खुश हुए। अब वे जल्दी से जल्दी शहद खाना चहते थे।

वे यह भी जानते ये कि मधुमखियां अपनी और अपने शहद की रक्षा के लिए सदैव तैयार रहती है। संकट आते ही वे संघर्ष करने पर उतारू हो जाती हैं।

सुयोग ने अपनी बड़ी सी टोकरी पेड़ के निचे रख दी और लकड़ी पकड़ने रमाकांत की मदद करने के लिए चला गया। लकड़ी को पकड़कर दोनों बार -बार मधुमखियों के घोसले को चुबने लगे।

Moral Story in Hindi

थोड़ी ही देर बाद थोड़ा शहद सुयोग के टोकरी में गिरा और दोनों देखकर बहुत खुश हो गए। अब तक तो वहा कोई भी मधुमखियां वहा पर नहीं आयी थी पर जैसे ही सुयोग अपनी टोकरी लगे गया उस पर मधुमक्खियों के समूह ने हमला कर दिया। कई बार मना करने के बाद भी सुयोग रमाकांत की ओर भागने लगा जो की झाड़ियो के पीछे छुपा था। 

कुछ देर बाद चार-पांच मधुमक्खियों ने रमाकांत पर ही अपना हमला चढ़ा दिया। अब रमाकांत और सुयोग एक साथ दर्द से पीड़ित होकर भग्ग रहे थे। न तो सुयोग कुछ कह पा रहा था और न ही रमाकांत। दोनों ही दर्द के मारे भाग रहे थे।

कुछ देर बाद सुयोग का चेहरा सूज कर भारी हो गया। आंखों का पूरी तरह खुल पाना भी मुश्किल था। कपिल की जीभ भी सूज कर फूल गई।  दोनों मित्र ने अपने जीवन का सबक सिख लिया था और स्वादिष्ट शहद का स्वाद ही नहीं ले पाए क्यों की सुयोग अपनी टोकरऋ वही छोड़कर होगा था।

अच्छी आदते – Moral Stories in Hindi for Kids

Moral Stories in Hindi for Kids
Moral Stories in Hindi for Kids

एक बूढ़ा रास्ते से कठिनता से चला जा रहा था। उस समय हवा बड़े जोरों से चल रही थी। अचानक उस बूढ़े का हैट हवा से उड़ गया। उसके पास ही तीन लड़के स्कूल जा रहे थे। उनसे बूढ़े ने कहा, “मेरा हैट उड़ गया है, उसे पकड़ो। नहीं तो मै बिना हैट का हो जाऊंगा।”

वे लड़के उसकी बात पर ध्यान न देकर टोपी के उड़ने का मजा लेते हुए हंसने लगे। इतने में नीतू नाम की एक लड़की, जो स्कूल में पढ़ती थी, उसी रास्ते पर आ पहुंची।

उसने तुरंत ही दौड़कर वह हैट पकड़ लिया और अपने कपड़े से धूल झाड़कर तथा पोंछकर उस बूढ़े को दे दिया। उसके बाद वे सब लड़के स्कूल चले गए।

गुरूजी ने हैट वाली यह घटना स्कूल की खिड़की से देखी थी। इसलिए स्कूल की सुबह की असेम्ली में उन्होंने सब विद्यार्थियों के सामने वह हैट वाली बात कही और नीतू के अच्छे काम के लिए को भेंट दी।

जो तीन लड़के गरीब की हैट उड़ते देखकर हंसे थे, वे इस घटना का देखकर बहुत लज्जित और दुखी हुए।

मेहनत के सपने – Hindi Kahaniyan

एक गांव में एक भिकारी रहता था जो बेहद आलसी और गरीब था। वह मेहनत वाला कोई काम नहीं करना चाहता था लेकिन वह अमीर बनने के सपने देखता था। उसे उसका रोज का खाना भी भिक में ही मिलता था।

एक दिन गांव में बड़ी सी शादी थी। शादी के दिन दूल्हे ने उसे दूध का मटका दिया। भिकारी दूध को उबाला, उसमें से कूछ दूध पीया और बाकी दूध मटके में डाल दिया। उसने दूध में थोड़ा सा दही मिलाकर दूध को दही जमाने के लिए रख दिया। फिर वह आराम करने के लिए लेट गया।

वह दूध के मटके को देखकर बेहद खुश होता रहा और सोते हुए भी उस दही के मटके के बारे में सपने देखने लगा। उसने सोचा कि अगर वह अमीर बन गया तो उसके सारे दुख दूर हो जाएंगे। फिर उसका ध्यान उस दूध के मटके की तरफ चला गया जिसमें उसने दही जमाने के लिए रखा था।

वह सपने देखता रहा, “सुबह तक दूध का मटका दही में बदल जाएगा। मै दही में मदानी मार के उसमें से मक्खन निकालूंगा और फिर मै मक्खन को गर्म करके उसका घी बनाऊंगा। फिर मै बाजार जाकर उस घी को बेचूंगा और उसमें से पैसे कमाऊंगा।

Bacchon ki Kahani

उस पैसे से मैं एक मुर्गी खरीदूंगा। वह मुर्गी अंडे देगी और थोड़े समय बाद उन अंडों में से और मुर्गियां और मुर्गें निकलेंगे। यह मुर्गे और मुर्गियां बहुत सारे अंडे पैदा करेंगे। फिर कुछ समय में मेरा खुद का मुर्गी फार्म होगा।” वह सोचता रहा।

“फिर मै अपने फार्म की सारी मुर्गियां बेच दूंगा और फिर उससे गांव खरीदूंगा और दूध का व्यापार शुरू करूंगा। मुझसे फिर सारे गांव के लोग दूध खरीदेंगे। मैं बहुत आमिर बन जाऊंगा। सब लोग मेरा आदर करेंगे और अगर वह कोई भी गलत काम करेगा तो मै उसे गुस्सा करूंगा। उसे सही काम आदत डालने के लिए मैं उसे डंडे से भी मारूंगा।” अपने सपने में उस भिकारी ने अपने पलंग के पास रखे डंडे को उठा लिया और उस डंडे को मटके पर मार दिया। दूध का मटका टूट गया और वह अपने सपने से जाग गया। फिर उसे अहसास हुआ कि वह दिन में सपने देख रहा था।

Moral of the Story – आपके सपने मेहनत के बिना कभी पूरे नहीं होंगे।

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आदत का जिम्मेदार – चिल्ड्रन स्टोरी इन हिंदी

एक आदमी को रोज़ दारू पिने की बुरी आदत पड़ गयी थी। उसकी इस आदत से घरवाले बड़े परेशान रहते थे। गांव के लोगों ने उसे समझाने कि भी बहुत कोशिश कि, लेकिन वो हर किसी को एक ही जवाब देता, “मैंने ये आदत नहीं पकड़ी, इस आदत ने मुझे पकड़ रखा है।”

वास्तव में सचमुच वो इस आदत को छोड़ना चाहता था, पर कई कोशिशों के बावजूद वो ऐसा नहीं कर पा रहा था। उसके परिवार वालों ने सोचा कि शायद शादी करवा देने से वो ये आदत छोड़ दे सकता है, इसलिए उसकी शादी करा दी गयी।

पर कुछ दिनों तक सब ठीक चला और फिर से वह शराब पिने लगा। उसकी पत्नी भी अब काफी चिंतित रहने लगी, और उसने निश्चय किया कि वह किसी न किसी तरह अपने पति की इस आदत को छुड़वा ही लेगी।

एक दिन गांव में प्रसिद्ध साधु महाराज आ गए। वो अपने पति को लेकर उनके आश्रम पहुंची। साधु ने कहा, “बताओ पुत्री तुम्हारी क्या समस्या है?”

पत्नी ने दुखी स्वर में सारी बातें साधु महाराज को बता दी। साधु महाराज उनकी बातें सुनकर समस्या कि जड़ समझ चुके थे, और समाधान देने के लिए उन्होंने पति-पत्नी को अगले दिन आने के लिए कहा।

अगले दिन वे आश्रम पहुंचे तो उन्होंने देखा कि साधु महाराज एक पेड़ को पकड़ के खड़े है। उन्होंने साधु से पूछा कि आप ये क्या कर रहे हैं, और पेड़ को इस तरह क्यों पकडे हुए हैं?

Hindi Mein Kahaniyan

साधु ने कहा, “आप लोग जाइये और कल आइयेगा”  फिर चौथे दिन भी पति-पत्नी पहुंचे तो देखा कि फिर से साधु पेड़ को पकड़ के खड़े हैं।

उन्होंने पूछा, “महाराज माफ़ करिये पर आप ये क्या कर रहे हैं? आप इस पेड़ को छोड़ क्यों नहीं देते?”

साधु बोले, “मैं क्या करूँ बालक ये पेड़ मुझे छोड़ ही नहीं रहा है?”

पति हँसते हुए बोला, “महाराज आप पेड़ को पकडे हुए हैं, पेड़ आप को नहीं! आप जब चाहें उसे छोड़ सकते हैं”

साधू-महाराज गंभीर होते हुए बोले, “इतने दिनों से मै तुम्हे क्या समझाने कि कोशिश कर रहा हूँ। यही न कि तुम दारू पिने की आदत को पकडे हुए हो, ये आदत तुम्हे नहीं पकडे हुए है!”

पति को अपनी गलती का अहसास हो चुका था। वह समझ गया कि किसी भी आदत के लिए वह खुद जिम्मेदार है, और वह अपनी इच्छा शक्ति के बल पर जब चाहे उसे छोड़ सकता है।

किसकी भैस – New Kahaniya with Moral

New Kahaniya with Moral
Hindi Short Stories with Moral

पेवरा गांव के एक किसान ने अपने लिए एक भैस खरीद ने की सोची। वह एक दिन सुबह शहर चला गया। शहर का रास्ता बहुत ही लामा था, और घने जंगल से जाना पड़ता था। शहर में भैस खरीद ने के बाद वह घर की ओर रवाना हुआ।

सुनसान रास्ते में वह पैदल ही चला जा रहा था। बीच रास्ते में उसे एक चोर मिला। उसके हाथ में मोटा डण्डा था और शरीर से भी वो अच्छा तगड़ा था। उसने किसान को देखते ही कहा, “क्या भाई आज कल खेत में बहुत कमाई हो रही है? पर कोई बात नहीं यह भैंस तो मेरे साथ जाएगी।“

किसान ने झट कहा, “क्यों भाई? यह तो मैंने खरीदी है।” चोर बोला, “तो? जो कह दिया सो करो। भैंस छोड़ कर चुपचाप यहाँ से चलते बनो, वरना लाठी देखी है, तुम्हारी खोपड़ी के टुकड़े- टुकड़े कर दूँगा।

अब तो किसान का गला सूख गया। हालाँकि शारीरिक बल में वह चोर से कम नहीं था। पर खाली हाथ वह करे भी तो क्या करे? विपरीत समय में बुद्धिबल काम आया।

Moral Stories in Hindi

किसान बोला, “ठीक है भाई, भैंस भले ही ले लो, पर किसान की चीज यों छीन लेने से तुम्हें पाप लगेगा। बदले में कुछ देकर भैंस लेते तो पाप से बच जाते।”

चोर बोला, “यहाँ मेरे पास देने को क्या है?”  किसान ने झट कहा, “और कुछ न सही, लाठी देकर भैंस का बदला कर लो।”

चोर ने खुश हो कर लाठी किसान को पकडा दी और भैंस पर दोंनो हाथ रख कर खड़ा हो गया। तभी किसान कड़क कर बोला, “चल हट भैंस के पास से, नहीं तो अभी तुम्हारी खोपड़ी के दो टुकड़े करूँगा।”

चोर ने पूछा, “क्यों?” किसान बोला, “क्यों क्या? जिस की लाठी उस की भैंस।” चोर को अपनी बेवकूफी समझ आ गयी और उसने वहाँ से भागने में ही भलाई समझी।

Moral of Hindi Story for Kids जिसमें अक्ल है, उसमें ताकत है।

New Paheliyan With Answers in Hindi | मजेदार हिंदी पहेलियाँ

सबसे शक्तिशाली आशीर्वाद – Hindi Moral Stories for Children

पटना शहर में एक गरीब दर्जी अपने इकलौते बेटे के साथ एक छोटे से घर में रहता था। उसका सपना था की उसका बेटा बहुत अच्छी पढ़ाई करके एक अच्छी से नौकरी करे। इसलिए उन्होंने तय किया कि उसके बेटे को सबसे अच्छी शिक्षा मिलेगी, चाहे उनकी वर्तमान स्थिति कैसी भी हो।

पिता दिन रात मेहनत करता और अपने बेटे के पढाई का खर्चा उठता। बेटा ही खूब मन लगाकर पढता।

एक दिन पिता का सपना सच हो गया। बेटा पढ़ लिख कर बहुत बड़ा आदमी बन गया और वह अब शहर की सबसे अच्छी कंपनी का मुखिया था।

एक दिन बेटा अपने बड़े और आलिशान ऑफिस में बैठा हुआ था, तभी उसके पिता उसका ऑफिस देखने आये। बेटा अपने ऑफिस की शानदार कुर्सी पर बैठा हुआ था। पिता का देख बेटा खुश हो गया और अपनी कुर्सी से खड़ा हो गया।

पिता ने बेटे को कुर्सी पर बैठाया और बेटे के पीछे खड़े हो गए और उसके कंधो पर अपना हाथ रखते हुए कहा “बेटा, तुम्हे पता है कि आज इस दुनिया में सबसे शक्तिशाली इंसान का एहसास किसे होता होगा?”

पिता आगे कुछ और बोल पाते तभी बेटे ने कहा “पिता जी मैं हूँ सबसे शक्तिशाली इंसान।” पिता ने सोचा था कि बेटा उन्हें ही सबसे शक्तिशाली कहेगा लेकिन बेटे के इस जवाब से उन्हें बहुत निराशा हुई।

Hindi Moral Stories

“ठीक कहा बेटा” इतना कहते ही पिता बेटे के ऑफिस से जाने ही लगे थे कि एक बार और पीछे मुड़ कर वही सवाल बेटे से किया “बेटा, तुम्हे अभी भी लगता है कि तुम सबसे शक्तिशाली हो?”

बेटे ने कहा “नहीं पिता जी, इस दुनिया में अगर कोई सबसे शक्तिशाली है तो वो आप हैं”

“लेकिन अभी तो तुमने कहा था कि तुम ही सबसे शक्तिशाली हो” पिता ने फिर पुछा

“हाँ, वो मैंने इसलिए कहा था क्यूंकि उस वक़्त दुनिया के सबसे शक्तिशाली इंसान के हाथ मेरे कंधे पर थे, इसलिए उस वक़्त मैं खुद को सबसे शक्तिशाली मेहसूस कर रहा था” बेटे ने जवाब दिया ये सुन पिता की आँखों में आंसू आ गए और उन्होंने अपने बेटे को गले से लगा लिया।

Moral of Hindi Stories – माता पिता का आशीर्वाद ही है जो हमें इस दुनिया के सबसे शक्तिशाली बना सकता है।

रेगिस्तान की यात्रा – Acchi Kahaniyan with Moral

Acchi Kahaniyan with Moral
Hindi Moral Stories

एक आदमी रेगिस्तान में यात्रा कर रहा था। साथ में था उसका ऊंट और ऊंट पर लदा था ढेर सारा सामान। ऊंट और वह दोनों ही पसीने से तर बतर थे। गरमी से थक कर उस आदमी ने फैसला किया कि अब वह कहीं आराम करेगा। इसलिए यात्रा बीच में ही रूक गई। ऊंट की पीठ से अपना तंबू उतारकर आदमी ने एक जगह गाढ़ दिया और उसके अंदर जाकर सुस्ताने लगा।

ऊंट भी छाया चाहता था मगर आदमी ने डपटकर उसे धूप में ही खड़े रहने का हुक्म सुना दिया। उस ने तंबू में करीब दो घंटे तक आराम किया। जब सूरज थोड़ा सा ढल गया, तब उस ने भोजन किया और ऊंट पर सवार होकर यात्रा के लिए चल पड़ा। ऊंट बेचारा मन मसोसकर रह गया। उसे गुस्स तो बहुत आ रहा था अपने निर्दयी मालिक पर, पर अब वो कुछ नहीं कर सकता था।

रात हो गई। मौसम ठण्डा होने लगा था। रेगिस्तान में दिन जितने गरम होते हैं, रातें उतनी ही ठण्डी होती हैं। आधी रात होते-होते उस आदमी के दांत ठंड से किटकिटाने लगे तो उसने फिर ऊंट को रोका और उसकी पीठ से तंबू उतराकर रेत में ही लगाया तथा उसके अंदर घुसकर आराम करने का विचार किया।

इस बार ऊंट पहले से ही तैयार था। उसने कहा, ”मालिक, मुझे भी ठंड लग रही है।“

”तो?“ आदमी ने घूरकर उसकी ओर देखा और टैंट में घुस गया। ऊंट बार बार तंबू में सिर घुसेड़कर पूछता, ”मालिक मैं भी अंदर आ जाऊं?“

Moral Stories in Hindi for Class 9

उस आदमी ने सोचा कि ऐसे तो यह बेहूदा ऊंट मुझे सोने ही नहीं देगा। इसलिए उसने कहा, ”ठीक है, तुम भी अपना सिर तंबू के अंदर कर लो।“ ऊंट खुश हो गया। वह मन ही मन मुस्करा रहा था।

कुछ ही समय गुजरा था कि ऊंट ने फिर कहा, ”वाह मालिक, मजा आ गया। अब मेरे सिर को ठंड नहीं लग रही है। आप बुरा न मानें तो अपनी अगली टांगें भी तंबू के अंदर कर लूं।“ आदमी ने सोचा इसमें बुराई क्या है? उसने अपने पैर सिकोड़ लिए और ऊंट ने गरदन और अगली टांगें भी टैंट में कर लीं।

आदमी की आंखें झपकी ही थी कि ऊंट जोर जोर से कराहने लगा। आदमी ने पूछा, ”अब क्या हुआ?“ ऊंट बोला, ”ऐसे तो मैं बीमार हो जाऊंगा मालिक! आधा शरीर गरम और आधा ठंडा हो रहा है। देख लीजिए, अगर मैं बीमार हो गया तो आपको भी यात्रा बीच में ही छोड़नी पड़ेगी।“

वह आदमी बेचारा सोच में पड़ गया। फिर बोला, ”तो क्या करूं?“ ”करें क्या मालिक? मैं अपना बाकी शरीर भी अंदर कर लेता हूं।“ ऊंट बोला।

”नहीं, नहीं! इस तंबू में दो की जगह नहीं है।“ ”हां, यह बात तो है मालिक।“ ऊंट बोला, ”ऐसा कीजिए, आप थोड़ा बाहर निकल जाइए। मैं अंदर लेट जाता हूं।“ यह कहकर ऊंट तंबू में घुस गया और आदमी को सारी रात रेगिस्तान की ठंड में गुजरानी पड़ी।

इस तरह समझदार ऊंट ने अपना बदला चुकाकर सारा हिसाब किताब बराबर कर लिया। अगली यात्रा पर ऊंट के मालिक ने बड़ा तंबू खरीद ने का सोचा, उसे उसका सबक मिल चूका था।

कल किसने देखा है – मोरल स्टोरीज इन हिंदी

शांतिनगर में एक अमीर व्यापारी रहता था। थोड़ा बहुत बूढ़ा होने के बाद भी वह बहुत मेहनत करता था। एक दिन उन्हें न जाने क्या सूझा कि अपने एक नौकर को बुलाकर कहा, ‘पता करो हमारे पास कितना धन है और कब तक के लिए पर्याप्त है?”

कुछ दिन बाद नौकर हिसाब लेकर आया और सेठ जी से बोला, “जिस हिसाब से आज खर्चा हो रहा है, उस तरह अगर आज से कोई कमाई न भी हो तो आपकी अगली दो पीढ़िया खा सकती हैं।”

व्यापारी चौंक पड़े। उन्होंने पूछा, “तब तीसरी और चौथी पीढ़ी का क्या होगा?” व्यापारी सोचने लगे और तनाव में आ गए। फिर बीमार रहने लगे। बहुत इलाज कराया मगर कुछ फर्क नहीं पड़ा।

एक दिन व्यापारी का एक दोस्त हालचाल पूछने आया। व्यापारी बोले, “इतना कमाया फिर भी तीसरी और चौथी पीढ़ी तक के लिए कुछ नहीं है। उसका दोस्त बोला, “एक साधु थोड़ी दूर पर रहते है अगर उन्हें सुबह को खाना खिलाएं तो आपका रोग ठीक हो जाएगा।”

अगले ही दिन व्यापारी भोजन लेकर साधु जी के पास पहुंचे। साधु जी ने उसे आदर के साथ बैठाया। फिर अपनी पत्नी को आवाज दी, “व्यापारी जी खाना लेकर आए हैं।”

Short Moral Stories in Hindi

इस पर साधु जी की पत्नी बोली, “आज खाना तो कोई दे गया है।” साधु जी ने कहा, “माफ़ करना व्यापारी जी, आज का खाना तो कोई दे गया है। इसलिए आपका भोजन स्वीकार नहीं कर सकते। हमारा नियम है कि सुबह जो एक समय का खाना पहले दे जाए, हम उसे ही स्वीकार करते हैं। मुझे क्षमा करना।”

व्यापारी बोले, “क्या कल के लिए ले आऊं?” इस पर साधू जी बोले, “हम कल के लिए आज नहीं सोचते। कल आएगा, तो ईश्वर अपने आप भेज देगा।”

व्यापारी जी घर की ओर चल पड़े। रास्‍ते भर वह सोचते रहे कि कैसा आदमी है यह। इसे कल की बिल्कुल भी चिंता नहीं है और मैं अपनी तीसरी और चौथी पीढ़ी तक को लेकर रो रहा हूं। उनकी आंखें खुल गईं। व्यापारी ने सारी चिंता छोड़कर सुख से रहने लगे।

सबसे कीमती चीज – बच्चों की कहानियाँ

सीलमपुर गांव में एक भिखारी रहता था। वह बड़ी मुश्किल से अपना गुजारा करता था। उसे ठीक से खाने या पिने नहीं मिलता था, जिस वजह से उसका बूढ़ा शरीर सूखकर कांटा हो गया था। वह अपने आप को बहुत ही कमज़ोर महसूस करने लगा था।

एक दिन वह रास्ते के एक ओर बैठकर गिड़गिड़ाते हुए भीख मांगा करता था। एक बालक उस रास्ते से रोज अपने स्कूल के लिए निकलता था। भिखारी को देखकर उसे बड़ा बुरा लगता। उसका मन बहुत ही दुखी होता।

वह छोटा बालक सोचता,  “आखिर यह आदमी क्यों भीख मांगता है? भगवान उसे उठा क्यों नहीं लेते?”

एक दिन उससे न रहा गया। वह भिखारी के पास गया और अपनी टिफिन में से कुछ रोटियां देते हुए बोला, “बाबा, तुम्हारी ऐसी हालत हो गई है फिर भी तुम जीना चाहते हो तुम भीख मांगते हो, पर ईश्वर से यह प्रार्थना क्यों नहीं करते कि वह तुम्हें अपने पास बुला ले?

भिखारी ने हस्ते हुए बोला, “बेटा तुम जो कह रहे हो, वही बात मेरे मन में भी उठती है। मैं भगवान से रोज प्रार्थना करता हूं, पर वह मेरी सुनता ही नहीं। शायद वह चाहता है कि मैं इस धरती पर रहूं, जिससे दुनिया के लोग मुझे देखें और समझें कि एक दिन मैं भी उनकी ही तरह था, लेकिन वह दिन भी आ सकता है, जबकि वे मेरी तरह हो सकते हैं। इसलिए बेटा किसी को घमंड नहीं करना चाहिए।

लड़का भिखारी की ओर देखता रह गया। उसने जो कहा था, उसमें कितनी बड़ी सच्चाई समाई हुई थी। हमारी जिंदगी सबसे कीमती चीज है।

Best Happy Life Quotes in Hindi with Status

सच्ची सफलता और विफलता – वेरी शॉर्ट स्टोरी इन हिंदी

रमेश और सुरेश जुड़वाँ भाई थे। वे बचपन से एक ही स्कूल में और एक ही कक्षा में पढ़ते थे। अब वे दोनों १० वि कक्षा के छात्र थे।

उनकी ही कक्षा में अनिकेत नाम का एक छात्र था जो बहुत ही अमीर परिवार से से था। एक दिन अनिकेत अपने जन्मदिन पर बहुत महंगा मोबाइल लेकर कर स्कूल आया। सभी उसे देख कर बहुत चकित थे। हर कोई उस मोबाइल के बारे में बातें कर रहा था, कि तभी कक्षा के एक छात्र ने अनिकेत से पुछा, “यार, ये इतना महंगा मोबाइल आपको किसने दिया?”

“मेरे भाई ने मुझे यह मोबाइल गिफ्ट किया है, कल ही वह विदेश से आया है।” अनिकेत अपना मोबाइल दिखते हुए बोला।

यह सुनकर कक्षा में सभी उसके भाई की तारीफ़ करने लगे, हर कोइ यही सोच रहा था कि काश उनका भी ऐसा कोई भाई होता। रमेश भी कुछ ऐसा ही सोच रहा था, उसने सुरेश से कहा, “काश हमारा भी कोई ऐसा भाई होता!”

पर सुरेश की सोच अलग थी, उसने कहा, “काश मैं भी ऐसा बड़ा भाई बन पाता!”

 Moral of Hindi Stories – हमारी सफलता और विफलता हमारे दृष्टिकोण पर काफी हद तक निर्भर करती है। हमारी सोच ही है जो हमे एक अच्छा व्यक्ति बनाती है।

जंगल का तोता – Panchatantra Short Stories in Hindi with Moral

एक शहर में मसाले बेच ने वाले का एक बहुत बड़ा व्यापारी था। आसपास के गांवों के लोग उसकी दुकानों पर मसाले खरीदने आते थे। शहर में सेठ के कई दुकाने थी। आसपास के गांवों में भी मसलो की कोई दुकाने नहीं थी इसलिए सेठ खुद ही कभी-कभी मसाले बेचने के लिए जाता था।

एक बार सेठ गांव में कुछ मसाले बेच ने के लिए गया था। वहां से लौटते समय एक पेड़ के नीचे वह आराम करने बैठ गया और थोड़ी ही देर में उसे नींद आ गई। जब वह नींद से जागा तो उसने अपने आसपास तोतों का समूह देखा। हरे रंग, लाल चोंच और गले पर काली पटृी वाले तोतों को देखकर सेठ ने सोचा, कितने सुंदर हैं ये तोते। एक दो तोतों को साथ ले जाऊं तो परिवार के लोग बहुत खुश होंगे।

यह सोचकर सेठ ने अपना गमछा तोतों के झुण्ड पर फेंका और एक तोता पकड़ लिया। इस तोते को सेठ अपने घर ले गया।

सेठ ने घर पहुंचकर तोते के लिए सोने का पिंजरा बनवाया। उसमें तोते के लिए बैठक और एक झूला रखवाया। पानी पीने के लिए कटोरी और खाने के लिए एक छोटी सी तश्तरी भी रखवाई। तोता सोने के पिंजरे में रहने लगा। उसे अमरूद, मिर्च आदि मनपसंद वस्तुएं खाने को दी जाने लगीं।

घर के बच्चे तथा सेठ तोते से बातें भी करते। तोता थोड़ा थोड़ा बोलना भी सीख गया। तोते के साथ बातें करने में सबको बहुत आनंद आने लगा।

Parrot Hindi Moral Story

कुछ दिनों बाद सेठ को गांव में से कुछ मसलो की आर्डर आयी और उसने खुद ही जाने का फैसला किया। जाते वक्त उसने अपने तोते से कहा, ”तोते राम, मैं गांव में जा रहा हूं। लौटते समय मैं तेरे माता पिता व सगे संबंधियों से मिलूंगा। तुझे उनके लिए कोई संदेश भेजना हो तो बता?“

तोते ने कहा,”सेठ जी, उन सबसे कहना, तोता भूखा नहीं है, तोता प्यासा भी नहीं है। तोता सोने के पिंजरे के अंदर आनंद से रह रहा है।“

सेठ अपने मसाले बेचकर लौटते समय उसी पेड़ के नीचे आराम करने के लिए रूका। तभी तोतों का एक समूह उस पर टूट पड़ा। वे उसे चोंच से मारने लगे। उनमें से एक तोते ने सेठ से पूछा, ”सेठ जी, हमारा तोता क्या कर रहा है?“

सेठ ने उन्हें शांत करते हुए कहा, ”तोता भूखा नहीं है, तोता प्यासा नहीं है। तोता सोने के पिंजरे के अंदर आनंद कर रहा है।“

यह सुनकर सभी तोते बिना कुछ बोले जमीन पर मुर्दों की तरह लुढ़क गए। सेठ उनके पास गया उसने तोतों को हिला डुलाकर देखा, पर ऐसा लगा जैसे सारे तोते आघात से मर गए हों।

सेठ जी घर पर आए। सेठ को देखते ही तोते ने अपने माता पिता एवं सगे संबंधियों के समाचार पूछे।

सेठ ने कहा, ”तेरे माता पिता और सगे संबंधियों को जब मैंने तेरा संदेश सुनाया तो सभी लुढ़क गए। क्या उन्हें आघाल लगा होगा?“

Golden Cage Moral Stories in Hindi

पिंजरे के तोते ने कोई जवाब नहीं दिया। सेठ की बात सुनकर वह स्वयं भी पिंजरे में झूले से नीचे गिर पड़ा। सेठ ने यह देखा तो उसे बहुत आश्चर्य हुआ। उसने पिंजरे का दरवाजा खोला और तोते को हिला डुलाकर देखा। सेठ जी को लगा वह तोता भी आघात से मर गया है। सेठ जी ने तोते को पिंजरे से बाहर निकालकर थोड़ी दूर पर रख दिया। मौका देखकर तोता पंख फड़फड़ाता हुआ उड़ गया।

जाते जाते उसने कहा, ”सेठ जी, मैं आपका आभारी हूं। मुझे अपने माता पिता का संदेश मिल गया है। मैं उनसे मिलने जा रहा हूं। आपका पिंजरा सोने का था, लेकिन वह पिंजरा था। मेरे लिए वह जेल थी।“ तोता उड़ता हुआ जंगल में अपने माता पिता और सगे संबंधियों के पास पहुंच गया। उसे लौटकर आया हुआ देख सब खुश हो गए।

अब मुक्त वातावरण में तोता सबके साथ आनंद से रहने लगा।

गधे से प्रेरणा – School Moral Stories in Hindi

पवन अपने गधे को लेकर दूसरे गांव से लौट रहा था। गलती से वह गधा पैर खिसकने के कारण सीधे एक बड़े गहरे गड्डे में गिर गया।

उसे निकलने के लिए पवन ने पूरी कोशिश की लेकिन वह उस गधे को निकाल नहीं पाया।

बहुत कोशिशों के बाद, जब शाम हो गयी और अँधेरा होने लगा तो पवन को लगा की उसके गधे को उस गड्डे से निकालना अब असंभव हैं। तो उसने उसे जिन्दा ही मिट्टी से ढक देने का सोचा और वह ऊपर से मिट्टी डालने लगा।

बहुत देर तक मिट्टी डालने के बाद पवन अपने घर चला गया।

पर ढेर सारी मिट्टी डालने के कारण वह गधा अपने ऊपर गिरे हुए मिट्टी की मदद से धीरे-धीरे उस पर अपना पैर रख-रख कर उस गड्डे के ऊपर चढ़ गया।

अगले दिन जब पवन सुबह उठा तो उसने देखा उसका गधा उसके घर के बहार ही खड़ा था। गधे को अपने घर देखकर उसे यकीन ही नहीं हो रहा था।

कभी हार मत मानो। जिंदगी में चमत्कार होते ही रहेंगे।

जिंदगी का बोझ – Short Moral Story in Hindi

एक घने जंगल में एक साधु महाराज रहा करता था। कई गांव के लोग अपनी समस्याएं लेकर आते थे और साधु महाराज उनका समाधान करते थे।

एक बार जब साधु महाराज बाजार गए थे तब उन्हें एक आदमी मिला। उसने साधु महाराज से पूछा, “गुरुदेव, खुश रहने का राज क्या है?”

साधु महाराज बोले, “तुम मेरे साथ जंगल में चलो, वहीं पर मैं तुम्हें खुश रहने का राज बताता हूं।”

वह आदमी बड़ी उत्सुकता से साधु महाराज से साथ जंगल जाने लगा।

रास्ते में साधु महाराज ने एक बड़ा सा पत्थर उठाया और उस आदमी को दे दिया और कहा, “इसे पकड़ो और चलो मेरे साथ।”

उस आदमी को समझ में नहीं आ रहा था, कि उनसे पत्थर उठाने के लिए क्‍यों कह रहे हैं। इसमें खुश रहने का क्या राज है? लेकिन उसने कोई सवाल जवाब नहीं करते हुए साधु महाराज की बात को मानना ही उचित समझा और पत्थर को उठाया और चलने लगा।

Life Hindi Moral Stories

कुछ समय बाद उस व्यक्ति के हाथ में दर्द होने लगा, लेकिन वह चुप रहा और चलता रहा।

लेकिन जब चलते हुए बहुत समय बीत गया और उससे दर्द सहा नहीं गया, तो उसने कहा कि गुरुदेव अब मैं इस पत्थर का वजन नहीं उठा सकता हूं। मेरे हाथों में बहुत तेज दर्द हो रहा है।

साधू महाराज ने कहा कि पत्थर को नीचे रख दो। पत्थर को नीचे रखने से उस आदमी को बड़ी राहत महसूस हुई।

तब साधु महाराज ने कहा, “यही है खुश रहने का राज, जिस तरह इस पत्थर को | मिनट तक हाथ में रखने पर थोड़ा सा दर्द होता है और घंटे तक

हाथ में रखने पर ज्यादा दर्द होता है। ठीक उसी तरह दुखों के बोझ को जितने ज्यादा समय तक हम अपने जीवन में रखेंगे उतने ही ज्यादा हम दुखी और निराश रहेंगे। अगर तुम खुश रहना चाहते हो तो दुःख रूपी पत्थर को जल्दी से जल्दी अपनी जिंदगी से बहार निकल दो”

नागराज की चोरी – Top 10 Moral stories in Hindi

Nagraj ki Kahani
Hindi Short Stories with Moral

यह बहुत पुरानी कहानी है। माजुली गांव के बहार एक बडासा जंगल था। उस जंगल में एक नागराज रहता था। उसने जंगल में एक पहाड़ी के नीचे अपना बिल बना रखा था। नागराज मतलब नागों का राजा इसलिए उसके सर पर एक कीमती मणि जड़ी हुई थी। जब वह सोता था तो उस मणि को सर से उतार कर बिल में छुपा देता था और रात को जब वो शिकार पर निकलता तो मणि को अपने सर पर धारण कर लेता था।

एक दिन जब वह नींद से जागा तो यह देखकर हैरान रह गया कि उसकी कीमती मणि अपनी जगह से गायब है। उसने बहुत ढूंढा लेकिन मणि उसे कहीं नहीं मिली। वो जोर-जोर से रोने और चिल्लाने लगा। जागराज की चीख पुकार सुनकर जंगल के बहुत सारे प्राणी इकट्ठे हो गए। सब ने उससे रोने का कारण पूछा तो नागराज ने बताया कि उसकी कीमती  मणि चोरी हो गई है।

खबर जंगल के राजा शेर तक पहुँची तो शेर ने सभा बुलाकर नागराज की मणि को ढूंढने को जिम्मेदारी चतुर लोमडी को सौपायी। लोमड़ी हमेशा चलाख और बुद्धिमान होती है। लोमड़ी ने खोजबीन शुरू कर दी। उसने देखा कि नागराज के बिल के आसपास बहुत सारे चूहों के बिल भी थे।

लोमडी को लगा कि हो न हो, यह चोरी किसी चूहे ने ही की होगी। लेकिन इतने सारे चूहों में से चोर को पकड़ना आसान काम नहीं था।

Nagraj Moral Stories in Hindi

उसने अगले दिन सारे चूहों को एक जगह इकट्ठा होने को कहा। सारे चूहे उपस्थित हुए और लोमडी ने उनसे पूछताछ शुरू कर दी। फिर 24 घंटे के अंदर ही मणि चुराने वाले चूहे को पकड़कर महाराज शेर के पास ले गया। शेर ने दोबारा सभा बुलाई औए मणि बरामद करके नागराज को उसकी कीमती मणि लौटा दी, फिर उसने लोमडी से पूछा कि आखिर उसने इतने सारे चूहों में से चोर चूहे को इतनी जल्दी कैसे पकड़ लिया।

होशियार लोमड़ी ने बताया, “महाराज, मैने सब चूहों को इकट्ठा करके उनसे एक दूसरे के बारे में जानकारी देने को कहा तो मुझे पता चला कि एक चूहा अचानक बहुत घमंडी और स्वार्थी हो गया है। उसने सबके साथ बात करना और मिलना जुलना बंद कर दिया है।

वो जब भी अपने बिल से बाहर आता तो अपनी नाक चढ़ाकर, दोस्तों को अनदेखा करके चलता था। पहले वो ऐसा नहीं था। चूहों की यह बातें सुनकर मुझे शक हो गया कि उसी चूहे ने मणि चुराई होगी, क्योंकि जब किसी मूर्ख अनाड़ी को दौलत मिल जाती है तो वो घमंडी, स्वार्थी हो जाता है।

शेर राजा ने लोमडी की चतुराई पर उसे शब्बाशी दी और चोर चूहे को जंगल से निकाल दिया।

मधुमक्खी की प्राथना – बेस्ट मोरल स्टोरी इन हिंदी

madhumakhi ki kahani
Hindi Moral Stories

एक बार एक मधुमक्खी ने एक बरतन में शहद इकटृा किया और ईश्वर को प्रसन्न करने के लिए उनके समक्ष प्रस्तुत किया। ईश्वर उस भेंट से बहुत प्रसन्न हुए और मधुमक्खी से बोले कि वह जो चाहे इच्छा करे, उसे पूरा किया जाएगा।

मधुमक्खी यह सुनकर बहुत प्रसन्न हुई और बोली, “हे सर्वशक्तिमान ईश्वर, यदि आप सचमुच मुझसे प्रसन्न हैं तो मुझे यह वरदान दें कि मैं जिसे भी डंक मारूं, वह दर्द से तड़प उठे।”

ईश्वर यह सुनकर बहुत क्रोधित हुए, ”क्या इसके अतिरिक्त तुम्हारी अन्य कोई इच्छा नहीं है। ठीक है, मैंने वादा किया है कि तुम्हारी इच्छा पूरी करूंगा, परंतु एक शर्त है। वह यह कि तुम जिसे डंक मारोगी उसे तो बहुत दर्द होगा, परंतु तुम भी तुरंत मर जाओगी।“

दूसरे ही क्षण ईश्वर वहां से चले गए।

Moral of Hindi Stories – जो दूसरों का बुरा चाहते हैं, उनका भी बुरा ही होता है।

Inspirational and Motivational Quotes for Students in Hindi

सपनों की दुनिया – Educational Moral Stories in Hindi

पप्पू अपने गांव में मूर्खता के लिए जाना जाता था। एक दिन सुबह-सुबह पप्पू अंडे खरीदने बाज़ार पहुँच गया। बाज़ार से उसने अंडे खरीदे और उन अंडों को एक टोकरी नें भरकर अपने सिर पर रख लिया, फिर वह घर की ओर जाने लगा।

घर जाते-जाते उसे अलग-अलग खयाल आने लगे जैसे कि, अगर इन अंडों से बच्चे निकलें तो मेरे पास ढेर सारी मुर्गियाँ होंगी। वह सब मुर्गियाँ ढेर सारे अंडे देंगी।

उन अंडों को बाज़ार में बैच कर मै धनवान बन जाऊंगा। अमीर बन जाने के बाद मै एक नौकर रखूँगा जो मेरे लिए शॉपिंग कर लाएगा। उसके बाद में अपनें लिए एक महल जैसा आलीशान घर बनवाऊंगा। उस बड़े से घर में हर प्रकार की भव्य सुख-सुविधा होंगी।

भोजन करने के लिए, आराम करने के लिए और बैठने के लिए उसमें अलग-अलग कमरे होंगे। घर सजा लेने के बाद मैं एक गुणवान, रूपवान और धनवान लड़की से शादी करूंगा।

अपनी पत्नी के लिए भी एक नौकर रखूँगा और उसके लिए अच्छे-अच्छे कपड़े, गहने वगैरह ख़रीदूँगा। शादी के बाद मेरे २-३ बच्चे होंगे, बच्चों को में खूब लाड़ प्यार से बड़ा करूंगा। और फिर उनके बड़े हो जाने के बाद उनकी शादी करवा दूंगा। फिर उनके बच्चे होंगे। फिर में अपने पोतों के साथ खुशी-खुशी खेलूँगा।

पप्पू अपने ख़यालों में चले जा रहा था, तभी उसके पैर को एक बड़ा सा पत्थर लगा और सिर पर रखी हुई अंडों की टोकरी धड़ाम से ज़मीन पर आ गिरी। अंडों की टोकरी ज़मीन पर गिरते ही सारे अंडे फूट कर बरबाद हो गए। अंडों के फूटने के साथ-साथ पप्पू के सपनें भी टूट कर चूर-चूर हो गए।

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