30+ Short Bedtime Stories for kids in Hindi | बेडटाइम स्टोरीज

Read 30 most famous short Bedtime Stories in Hindi. बेडटाइम स्टोरीज includes funny, strange, and moral stories that helps to create a magical and strong bond between parents and children. Hindi Kahaniyan (हिंदी कहानियां)helps in for good thoughts and provides entertainment. Reading Hindi Story / Stories प्रेरक कहानियां increases our word power and pronunciation. This article contains more than 30 stories in Hindi with latest Hindi story writing available on the internet. If you liked this Motivational stories then please share with you friends and family.

सोते समय की कहानियां बच्चे की कल्पनाओं को बढ़ाने में मदद करती हैं। मजेदार हिंदी कहानिया यानि बेडटाइम स्टोरीज पढ़के, बच्चों के साथ समय बिताने के लिए एक शानदार अवसर भी होता है।

Table of Contents

सबसे बड़ी दौलत Bedtime Stories in Hindi

Hindi Bedtime Story
Bedtime Moral Stories in Hindi

एक बड़े से शहर में एक अमीर आदमी रहता था। उसके पास बहुत पैसा था और उसने हाल ही में शहर में एक बड़ा घर भी खरीदा था। वह पैसो से तो बहुत धनी था लेकिन शरीर और सेहत से बहुत ही गरीब था।

वह दिन रात पैसे कमाने के लिए बहुत मेहनत करता, लेकिन अपने शरीर के लिए उसके पास बिलकुल भी वक्त नहीं था। बहुत अमीर और पैसे कमाने के बाद भी उसे कई नई-नई बीमारियों ने घेर लिया था।

वह आदमी स्वार्थी नहीं था, पर सिर्फ इतना था कि उस आदमी के पास पैसा खर्च करने का समय नहीं था। उसे पैसे कमाने की आदत ही लग लगी थी। डॉक्टर के पास जाने के लिए ही उसको वक्त नहीं मिलता था। ध्यान न देने के कारन उसका शरीर धीरे-धीरे कमजोर होता जा रहा था।

एक दिन वह बहुत थक कर घर आया। आज उसका बहुत बुरा सिरदर्द हो रहा था, इसलिए वह सीधा जाकर अपने बिस्तर पे लेट गया। जब उसके नौकर ने खाना लाया तब बहुत थकने के कारन उसने खाना खाने से मना कर दिया और भूखा ही सो गया।

Famous Bedtime Stories in Hindi

आधी रात को उसका सरदर्द और भी बढ़ गया। वह कुछ समाज ही नहीं पा रहा था की क्या हो रहा है। तभी अचानक ही उसके सामने एक अजीब सी आकृति आकर कड़ी हो गयी और वह बोली, “मैं तुम्हारी आत्मा हूँ और आज मैं ये तुम्हारा शरीर को हमेशा के लिए छोड़ कर चली जा रही हूँ।

तब वह आदमी घबराया सा बोला, ” तुम मेरे शरीर को क्यों छोड़ रहे हो? मेरे पास बहुत पैसा है और मैंने इसके लिए पूरी जिंदगी मेहनत की है। मैं इतना विशाल घर में रहता हूं, की उस घर को कई लोग सिर्फ अपने सपने में सोच सकते है।”

आत्मा बोली, ” सुन मेरी बात ये बड़ा घर तुम्हारा घर है, मेरा नहीं। मेरा घर तो तुम्हारा शरीर है, जो दिन पे दिन दुबला होता जा रहा है, और कई बीमारियों के चपेट में भी आया है।“

“बस कई वर्षों से टूटी हुई झोपड़ी में रहने की कल्पना करो। उसी प्रकार तुमने अपने शरीर यानि मेरे घर की हालत की है, और मैं इसमें नहीं रह सकता।“ यही बोलके आत्मा उस आदमी का शरीर छोड़के चली गयी।

Moral of the Story

हमारा स्वास्थ्य हमारी सबसे बड़ी दौलत है, इसका अहसास हमे तब होता है जब हम इसको खो देते हैं।

Read more – 121 New Hindi Short Stories with Moral for Kids | नैतिक कहानियां

चंपक की बैलगाड़ी Champak Story in Hindi

Champak Hindi Stories
Short Bedtime Stories

चंपक अपनी बैलगाड़ी में फलों और सब्जियों के बड़े-बड़े बक्से लेकर शहर में बेचने जा रहा था। शहर जाने में उसे करीब एक दिन लगता था। वह सुबह गांव से निकला था और अब दोपहर हो गयी थी, तभी अचानक उसकी बैलगाड़ी एक खड्डे में गिरकर पलट गयी। 

वह अपनी बैलगाड़ी सीधी करने की बहुत कोशिश करने लगा। वहा नजदीक एक ढाबे पे बैठा एक आदमी ये सब देख रहा था। उसने चंपक को दूर से ही बोला, “अरे भाई, परेशान मत हो, आ जाओ मेरे साथ पहले खाना खा लो फिर मैं तुम्हारी बैलगाड़ी सीधी करवा दूंगा।”

उसकी बात सुनकर चंपक बोला, “मैं अभी नहीं आ सकता। मेरा दोस्त नाराज हो जायेगा।” ढाबे पर बैठा आदमी ने कहा, “अरे भाई तुज़से अकेले नहीं उठेगी यह बैलगाड़ी। तू आजा खाना खा ले फिर हम दोनों उठाएंगे।”

“नहीं मेरा दोस्त बहुत गुस्सा हो जाएगा” चंपक बोला।

उस आदमी ने फिर से कहा, “अरे मान भी जाओ। आ जाओ इधर बैठो।”

चंपक ने कहा, “ठीक है आप कहते है तो आ जाता हूँ। “

चंपक ने जमकर खाना खाया और फिर बोला, “अब मैं गाड़ी के पास चलता हूँ और आप भी मेरे साथ चलिए। मेरा दोस्त गुस्सा हो रहा होगा।”

ढाबे पर बैठे आदमी ने मुस्कुराते हुए कहा, “चलो चलते है, पर तुम इतना डर क्यों रहे हो? वैसे कहा है तुम्हारा दोस्त?”

चंपक ने कहा, “बैलगाड़ी के निचे दबा हुआ है।” 

Read more- Best Hindi Suvichar

बुद्धिमान अंशु Hindi Short Stories

अंशु बहुत ही बुद्धिमान बालक था किन्तु साथ ही वह बहुत ही आलसी भी था। उसे सुबह देर तक सोना पसंद था जिस के कारण वह अक्सर स्कूल के लिए लेट हो जाता था। अंशु के पिता जी को सुबह जल्दी उठने की आदत थी।

एक रविवार अंशु के पिताजी ने उसे सुबह जॉगिंग को जाने के लिए उसे उठाया, पर अंशु का बिस्तर से उठने का बिल्कुल भी मन नहीं था। अत उसके पापा अकेले ही घूमने चले गये। थोड़ी देर घूमने के बाद वे घर वापिस चल दिये। घर वापस आते वक्त उन्हें रास्ते में पैसो से भरा बैग मिला।

उन्होंने बैग के मालिक को आस-पास ढूंढने की कोशिश की। लेकिन जब बैग का असली मालिक नहीं मिला तो अंशु के पिताजी ने बैग उठा लिया और अपने घर चले गए। घर आकर अंशु के पिताजी ने उसे उठाया और उसे पैसो से भरे बैग के बारे में बताते हुए कहा, “देखों मुझे जल्दी उठने पर पैसो से भरा बैग मिला। मै सुबह जल्दी उठा था इसलिए मुझे वह बैग मिला। सुबह जल्दी उठने से हमेशा भला होता है।”

लेकिन शैतान अंशु का दिमाग कुछ और कह रहा था वह बोला, “पिताजी जिस व्यक्ति का बैग खोया होगा वह निश्चित ही आपसे पहले जागा होगा। वह तो इस समय बैग खोने की वजह से रो रहा होगा। अगर वह अभी सो रहा होता तो उसका बैग खो नहीं जाता और वह निश्चित ही ज्यादा अमीर होता।” और यह कह, इससे पहले की अंशु के पिताजी कुछ कहते अंशु फिर से बिस्तर में घुस गया।

बुरी संगत का नतीजा Hindi Kahani

Hindi Kahani for Kids
Bedtime Stories in Hindi

रतनलाल सेठ का एक बड़ासा फलों का बगीचा था और उसके दो बेटे थे। एक बेटा अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए विदेश गया था और दूसरा छोटा बेटा आदित्य गांव में ही पढ़ाई करता था।

घर में आदित्य को माँ-बाप से बहुत प्यार मिला था। वह ज्यादातर अपना समय फलों के बाग के में बीतता था। वहाँ उसके दो-चार मित्र बन गए थे। उनकी संगति में आदित्य बिगड़ने लगा था। उसे चोरी करने और जुआ खेलने की आदत पड़ गई थी।

एक दिन सेठ रतनलाल ने आदित्य को जुआ खेलते हुए देख लिया। वहाँ तो उन्होंने आदित्य से कुछ नहीं कहा, पर घर आकर दे चिंता में डूब गए। आदित्य के लौटने पर उन्होंने कहा, “बेटा! जुआ खेलना अच्छी आदत नहीं है। यह तुम्हें बरबाद कर देगा।’” आदित्य पर पिता की बातों का कोई असर नहीं हुआ। अंत में सेठ रतनलाल को एक युक्ति सूझी।

एक दिन वे आदित्य को लेकर आम के बगीचे में पहुँचे। उन्होंने माली से आम तोड़ने के लिए कहा। माली ने आम को तोड़कर एक टोकरी में रख

दिया। सेठ ने आदित्य से कहा, “आदित्य! आम की टोकरी को घर ले जाओ। तीन दिन बात तुम्हारी मौसी आयेगी तब आम का आनंद लेंगे।”

Children ki Kahani

रतनलाल ने एक खराब आम उठा लाए। उसे आदित्य को देते हुए उन्होंने कहा, “इसे भी उन्हीं आम के साथ रख दो।” आदित्य ने वैसे ही किया। उसने आम की टोकरी को घर लाकर रख दिया।

तीन दिन मौसी आ गई। रतनलाल सेठ ने भोजन करने के बाद आदित्य से आम लाने को कहा। आदित्य ने टोकरी उठाई तो देखा कि सब आम सड़ चुके थे। वह बहुत हैरान हुआ। रतनलाल सेठ भी उसके पीछे-पीछे वहाँ आ गए थे। आदित्य ने पूछा कि, “यह कैसे हो गया पिताजी?”

रतनलाल ने कहा, “बेटा! एक खराब आम ने इन बाकि के अच्छे आम को अपने जैसा ही बना दिया है। इसी तरह जो लड़का बुरे लड़कों की संगति करता है। वह भी बुरा बन जाता है।’” पिता की बात आदित्य के दिमाग में बैठ गई।

उसे महसूस हुआ कि उसके पिता उसे क्या सिखाना चाहते थे। उसने बुरे लड़कों की संगति हमेशा के लिए छोड़ दी।

Read more – Top 10 Best Akbar and Birbal Short Stories in Hindi

गधे का हिरा Hindi story for kids

Hindi story for kids

एक व्यापारी का गांव के बाजार में कपड़ो का व्यवसाय था। उस व्यापारी ने अपने पास एक गधा भी रख लिया था, जो उसे घर से बाजार कपडे ले जाने में मदत करता था। एक दिन जब व्यापारी कपड़ों का गद्दर ले कर वापस घर लौट रहा था तो रास्ते में उसे एक बड़ा सा चमकता पत्थर पड़ा हुआ दिखा।

उसने उसे उठा लिया। पत्थर की चमकीला और सुंदर था । व्यापारी ने उसे एक रस्सी से बांधकर गधे के गले में पहना दिया। गधा और ज्यादा सजीला दिखने लगा। तभी एक हीरा जौहरी की नजर गधे के गले में लटकते चमकीले पत्थर पर पड़ गई। उसे समझ में आ गया कि व्यापारी को हीरे की समझ नहीं है। उसने बड़े प्यार से व्यापारी को रोककर कहा, “भैया जी, यह पत्थर तो बड़ा सुंदर है, मुझे दे दोगे तो मैं तुझे सौ रुपये दूंगा।”

व्यापारी ने मना कर दिया। कुछ सोचकर जौहरी ने फिर कहा, “भाई, मुझे यह पत्थर दे दे। मेरे बच्चे खेलेंगे। मैं तुझे दो सौ रुपये दूंगा।” ये सुनकर भी व्यापारी नहीं माना। जौहरी ने कहा, “चलो अच्छा, तीन सौ, रुपए लेकर पर यह पत्थर दे दे। अब तो खुश हो जा।” व्यापारी फिर भी नहीं माना।

Stories for kids in Hindi

तब जौहरी ने कहा, “चल, पाँच सौ दे देता हूं, तू भी क्या याद रखेगा।” इस पर व्यापारी गुस्से में बोला, “अरे कहा ना मैंने नहीं दूंगा। अब आप अपने रस्ते जाइये।” जौहरी रुक गया और व्यापारी आगे चल पड़ा। अब जौहरी सोच में पड़ गया कि हीरा कम से कम पांच लाख का है। अगर उसने व्यापारी को दस हजार रूपये दे दिए, तो वह जरूर हीरा उसे दे देगा, जौहरी बहुत सोचने लगा और वह फिर से व्यापारी के पीछे दौड़ा जो काफी दूर निकल गया था। जैसे तैसे दौड़ते दौड़ते उसने व्यापारी को फिर से पकड़ लिया और बोला, “अच्छा चल मैं तुझे इस पत्थर का दस हजार देता हूं, अब तो मान जा।”

इतना सुनते ही व्यापारी ने हंसते हुए कहा, “अरे भाई, आपने देर कर दी। अभी-अभी एक आदमी मुझे दो लाख रुपए देकर वो पत्थर ले गया।’ यह सुनते ही जौहरी अफसोस से चिल्ला पड़ा, “अरे मूर्ख, वह पांच लाख का हीरा तूने सिर्फ दो लाख में दे दिया? तुझसे बड़ा मूर्ख कोई हो ही नहीं सकता।” इस पर धोबी ने मुस्कुराते हुए कहा, “मेरे लिए तो यह दो लाख भी बहुत है। मैं जौहरी नहीं हूं इसलिए मुझे हीरे की परख नहीं थी। पर आपको तो परख थी। आप सिर्फ मूर्ख ही नहीं बल्कि धोखेबाज और लालची भी हैं इसलिए पांच लाख का हीरा गवां बैठे।”

शातिर चोर Bedtime Stories for Kids in Hindi

Short Bedtime Hindi Stories
Bedtime Stories in Hindi

एक बड़े शहर में एक शातिर चोर रहता था। सब लोग जानते हुए भी पुलिस के पास उस चोर के खिलाफ कोई सबूत नहीं था। उस चोर ने बड़े-बड़े राजनेताओं भी नहीं छोड़ा था।

वह चोर अक्सर एक शहर के बाहर रहने वाले साधु को मिलने आता था। उस चोर को भगवान से साक्षात्कार का उपाय जानना था। साधु उसे आये वक्त टाल देता था। लेकिन चोर पर इसका असर नहीं पड़ता था।

एक दिन उस चोर का आग्रह बहुत बाद गया। उसने साधु से कहा की समाधान के बिना वह नहीं जायेगा। कई अनुरोध के बाद साधु ने चोर को दूसरे दिन बुलाया।

Funny Bedtime Story in Hindi

दूसरे दिन चोर ठीक समय पर आ गया।  साधु ने चोर के सिर पर कुछ पत्थर रखे और कहा की यह पत्थर लेके तुम्हे पूरा पहाड़ चढ़ना होना।

चोर सिर पर पत्थर लिए पहाड़ पर चढ़ने लगा और उसके पीछे साधु भी चलने लगा। थोड़ी देर चलने के बाद चोर को पत्थर भारी लगने लगे। उसने साधु से अनुरोध किया की उसका बोज थोड़ा काम किया जाये। साधु ने उसकी बात मान ली और उसने टोकरी से कुछ पत्थर निकाले।

थोड़ा और चलने के बाद चोर के निवेदन से साधु ने और थोड़े पत्थर निकाले। चोर बार-बार अपनी थकान वक्त कर रहा था। अंत में सब पथरर फेंक दिए गए और चोर असानी से पर्वत पर चढ़ता हुआ ऊँचे शिखर पर जा पहूँचा।  

साधु ने कहा, जब तुम्हारे सिर पर पत्थरों का बोझ रहा, तब तक तुम्हे पर्वत के ऊँचे शिखर पर चढ़ना कठिन रहा। पर जैसे ही तुमने पत्थर फेंके वैसे ही चढ़ाई सरल हो गई। ऐसी तरह पापों का बोझ सिर पर लेकर कोई मनुष्य भगवान को प्राप्त नहीं कर सकता।

चोर समाज गया की वह अपने बुरे कर्मो के लिए भगवान को प्राप्त नहीं कर सकता है। उस दिन से उसने चोरी करना छोड़ दी और वह पूरी तरह से बदल गया। 

Read more- Beautiful Hindi Quotes

दिल की सुने या दिमाग की – बेडटाइम स्टोरीज

बेडटाइम स्टोरीज

एक बार शुभम ने संध्या सात बजे अपने पापा से कहा, “कल सुबह पांच बजे मुझे उठा दीजिएगा, मैं मॉर्निंग वॉक पर जाऊंगा।”

लेकिन इतना कहते ही उसके दूसरे मन ने दस्तक दी, “क्यों कह दिया पांच बजे उठाने को? मालूम नहीं कल कॉलेज में प्रैक्टिकल है?

इतनी जल्दी उठोगे तो प्रैक्टिकल में सो नहीं जाओगे?”

तभी तीसरा मन आ गया, “क्या बात करते हो, उठना ही चाहिए। सुबह सबकुछ एकबार रिवाइझ कर लोगे तो प्रैक्टिकल और अच्छा जाएगा।”

पर जब रात नौ बजे उसने खाना खा लिया तो उसे सुस्ती चढ़ गई। सुस्ती चढ़ते ही चौथे मन ने द्वार खटखटाया, “नहीं उठना अपने को सुबह-सुबह।”

शुभम ने पापा को उठाने से मना कर दिया। रात को टी.वी. वगैरह देखकर जब ग्यारह बजे वह सोने गया तब तक उसके खाने की सुस्ती काफी हृद तक कम हो चुकी थी। बस पांचवें मन ने पुकारा, “सुबह उठना ही है। सुबह-सुबह परीक्षा की तैयारी नहीं करी तो कहीं रिजल्ट न गड़बड़ा जाए।” बस तुरंत उसने पापा से फिर उठाने की अनुरोध कर दिया।

पर सुबह में जैसे ही पापा ने पांच बजे उठाया कि उसका छठा मन गुस्सा कर बैठा, “यह कोई वक्त है उठाने का? क्या अभी उठकर प्रैक्टिकल में दिनभर सोता रहूं?”

पापा भी परेशान हो गए। खुद ही उठाने को कहता है और उठाने पर गुस्सा भी करता है। शुभम फिर सो गया। लेकिन फिर मजा तो यह कि सुबह उठकर तथा नहा-धोकर जब वह नाश्ता करने बैठा तो उसे अपने न उठने पर बड़ा पछतावा हुआ। उसने अपने पापा से कहा, “नींद

में भले ही मैं लाख मना करूं, पर आपको तो मुझे झकझोर कर उठा ही देना चाहिए था। आपको तो पता है मेरा प्रैक्टिकल एक्झाम है।”

अब पापा क्या कहें? उन्होंने अपना माथा ठोक लिया।

Read more – Famous Swami Vivekananda Life Story in Hindi

अशिक्षित राजा Bedtime Hindi Mein Kahaniya

Hindi Mein Kahaniya
Bedtime Stories in Hindi

       धनकपुर में एक राजा था। उसे पढने-लिखने का बहुत शौक था, पर प्रजा की सेवा करते-करते उसे कभी पड़ने का समय नहीं मिला।

एक दिन उसने थान लिया की कुछ भी हो जाए वह इस बार जरूर पढ़ेगा। उसने मंत्री-परिषद् के माध्यम से अपने लिए एक शिक्षक की व्यवस्था की। शिक्षक राजा को पढ़ाने के लिए आने लगा।

राजा को शिक्षा ग्रहण करते हुए कई महीने बीत गए थे, मगर राजा को इसका कोई लाभ नहीं हो रहा था।  राजा का गुरु तो रोज खूब मेहनत करता थे, परन्तु राजा को उस शिक्षा का कोई फ़ायदा नहीं हो रहा था।

राजा बड़ा परेशान होने लगा उसके कुछ समाज में नहीं आ रहा था, गुरु की प्रतिभा और योग्यता पर सवाल उठाना भी गलत था क्योंकि वो एक बहुत ही प्रसिद्द और पढ़ाने-लिखाने में योग्य गुरु थे। राजा को बहुत दिन से परेशान देखकर आखिर में एक दिन रानी ने राजा को सलाह दी कि राजन आप इस सवाल का जवाब गुरु जी से ही पूछ कर देखिये।

Long Bedtime stories

एक दिन राजा ने बड़ी हिम्मत करके गुरूजी से पूछा, “गुरूजी, क्षमा कीजियेगा, पर मैं कई महीनो से आपसे शिक्षा ग्रहण कर रहा हूँ। बहुत से लोग आपके शिक्षण का ज्ञान आसानी से पाते है, पर मुझे इसका कोई लाभ नहीं हो रहा है। ऐसा क्यों है?”

गुरु जी ने बड़े ही शांत स्वर में जवाब दिया, “राजन बात बहुत छोटी है परन्तु आप अपने ‘बड़े’ होने के अहंकार के कारण इसे समझ नहीं पा रहे हैं और परेशान और दुखी हैं।  माना कि आप एक बहुत बड़े राजा हैं।

पर जब आप किसी से शिक्षा लेते है, तब आप उस समय आप एक शिष्य बन जाते हैं और सीखने वाला गुरु।  गुरु का स्थान हमेशा उच्च होना चाहिए, परन्तु आप स्वंय ऊँचे सिंहासन पर बैठते हैं और मुझे अपने से नीचे के आसन पर बैठाते हैं।”

“आप मुझसे महान बन गए है और मैं अपने निचे, जिससे आपको न तो कोई शिक्षा प्राप्त हो रही है और न ही कोई ज्ञान मिल रहा है” राजा की समझ में सारी बात आ गई और उसने तुरंत अपनी गलती को स्वीकारा और गुरुवर से उच्च शिक्षा प्राप्त की।

Moral of Bedtime Stories in Hindi

हमेशा याद रखें कि गुरु का स्थान हमेशा ऊपर होता है।

Read more – Short Hindi Me kahaniya

चंचल मन Hindi Stories

Hindi Stories

पटना में एक सुखी परिवार रहता था। उस घर में नरेश नाम का लड़का अपने परिवार के साथ रहता था। नरेश एक होशियार बच्चा था लेकिन उसका मन बड़ा चंचल था, वह पढ़ने बैठता तो उसका मन पढ़ाई में कम और बाहर सड़क पर हो रही हलचल पर ज्यादा लगता था।

बाहर कोई गाड़ी का आवाज आये या कोई जोर-जोर से बातें कर रहा हो तो, नरेश कारण जानने के लिए सब छोड कर बाहर भागता था। स्कूल में भी उसका मन पढ़ाई में कम और खिड़की से बाहर देखने में ज्यादा लगता था। इसलिए नरेश हमेशा परीक्षा में कम नंबर लाता था।

एक बार गर्मियों की छुट्टियों में नरेश अपने परिवार के साथ गांव चला गया। शहर से गांव की बस से उतर कर नरेश और उसका परिवार खेतों के बीच से पैदल चल कर आगे बढ़ने लगे। तभी नरेश ने देखा एक कुएं के पास एक घोड़े वाला अपने घोड़े को पानी पिलाने ले जा रहा था। नरेश को भी प्यास लगी, उसने पापा से कुएँ के पास चलने को कहा तो दोनों कुएं के पास पहुंचे।

कुएं पर एक किसान बैलों से रहट चला कर खेतों में पानी लगा रहा था। घोड़े वाला भी घोड़े को रहट से पानी पिलाने लगा पर जैसे ही घोड़ा झुक कर पानी पीने की कोशिश करता तो रहट से निकलने वाली की आवाज से डरकर बार बार पीछे हट जाता। जितनी बार वह पानी पीने के लिए झुकता, रहट की आवाज से डर कर रुक जाता था।

Stories in Hindi

घोड़े वाले ने किसान से थोड़ी देर के लिए बैलों को रोक देने को कहा ताकि घोड़ा बिना डरे पानी पी सके लेकिन किसान ने बताया कि अगर उसने बैलों को रोक दिया तो पानी निकलना ही बंद हो जाएगा, इसलिए घोड़े को तो इसी आवाज के साथ ही पानी पीना पड़ेगा।

यह सुनकर नरेश के पापा ने नरेश की ओर देखते हुए. कहा, “नरेश अब तुम समझ गए ना कि परीक्षा में तुम्हारे नंबर कम क्यों आते है? घोड़े की तरह तुम्हारा भी ध्यान भटक जाता है, इस वजह से तुम पढ़ाई में मन नहीं लगा पाते हो।” नरेश पापा की सीख को समझ गया और उसने आगे से मन और अपने ध्यान को कंट्रोल में रखना सीख लिया।

जीवन की सिख दर्जी से Moral Bedtime Story

Bedtime story with Moral

एक दिन स्कूल में छुट्टी की घोषणा होने के कारण, एक दर्जी का बेटा सोहम अपने पापा की दुकान पर चला गया। वहाँ जाकर वह बड़े ध्यान से अपने पापा को काम करते हुए देखने लगा।

उसने देखा कि उसके पापा कैंची से कपड़े को काटते हैं, और कैंची को पैर के पास टांग से दबा कर रख देते हैं। फिर सुई से उसको सीते हैं और सीने के बाद सुई को अपनी टोपी पर लगा लेते हैं।

जब उसने इसी क्रिया को दो-तीन बार देखा तो उससे रहा नहीं गया, तो उसने अपने पापा से पूछा, “पापा मैं बड़ी देर से आपको देख रहा हूं, आप जब भी कपड़ा काटते हैं, उसके बाद कैंची को पैर के नीचे दबा देते हैं, और सुई से कपड़ा सीने के बाद, उसे टोपी पर लगा लेते हैं, ऐसा क्यों?

सोहम के पापा ने हस्ते हुए जवाब दिया, “बेटा, कैंची काटने का काम करती है, और सुई जोड़ने का काम करती है, और काटने वाले की जगह हमेशा नीची होती है परन्तु जोड़ने वाले की जगह हमेशा ऊपर होती है। यही कारण है कि मैं सुई को टोपी पर लगाता हूं और कैंची को पैर के नीचे रखता हूं।”

Read more – Complete all Vegetables name in Hindi and English

कॉलेज की दोस्ती Short Moral Stories in Hindi

Short Moral Stories in Hindi
Bedtime Stories in Hindi

नंदन को कॉलेज से ही एक अच्छी नौकरी मिल गयी थी और वह अपने जिंदगी में बहुत खुश था। नंदन का सबसे करीबी दोस्त परेश जिसको कॉलेज से नौकरी नहीं मिली थी, वह काफी दिनों से बेरोजगार था।

अब नंदन अपने जीवन में बहुत व्यस्त था, वह अपने दोस्त परेश से भी काफी दिनों से नहीं मिला था। कॉलेज में तो उनको एक-दूसरे के बिना चैन नहीं पड़ता था।  

एक दिन नंदन ऑफिस से घर लौटा, तो उसके माँ ने कहा की आज तुम्हारा कॉलेज का दोस्त परेश आया था। उसे बीस हजार रुपये की तुरंत जरूरत थी। मैंने तुम्हारी अलमारी से रूपये निकलकर उसे दे दिया है। तुम्हे कही लिखना हो, तो लिख लेना।

Good Night story in Hindi

माँ की यह बात सुनकर नंदन का चेहरा हतप्रभ हो गया, आंखे गीली हो गयी, वह अनमना सा हो गया। उसकी माँ ने उसे देखा और बोली, “अरे! क्या हो गया। मैंने कुछ गलत कर दिया क्या? मैं जानती थी की तू और परेश कॉलेज में अच्छे दोस्त थे, इसलिए मैंने यह हिम्मत कर ली। परेश के सामने तुम्हे फोन करना उसे अच्छा नहीं लगता था। मुझसे कोई गलती हो गयी तो माफ़ कर देना।”

तब नंदन बोल पड़ा, “मुझे दुःख इस बात का नहीं है की आपने मेरे दोस्त को पैसे दे दिए है। आपने बिलकुल सही काम किया है, मुझे इसकी ख़ुशी भी है। मैं दुखी हूं क्योंकि मेरा दोस्त मुश्किल में है, और मैं इसे समझ नहीं पाया।“

“मैंने कभी नहीं सोचा था कि वह किसी परेशानी में होगी। मैं इतना स्वार्थी हूं कि मैं उनसे मिलने भी नहीं गया।” यह कहकर नंदन रो पड़ा और अगले ही दिन उसने ऑफिस से छुट्टी ली और परेश को जाकर मिला।

परेश को अपने पिता के इलाज के लिए पैसे चाहिए थे। परेश नंदन को देखकर बहुत खुश हुआ। नंदन फिर से रो पड़ा और परेश को सॉरी बोला।

Read more- Complete Letter Writing in Hindi with 50+ Examples

जादुई पत्थर की सिख Jadui kahani for Bedtime

उदयपुर में एक जयवंत नाम का किसान था, उसके पास एक बड़ा सा खेत था। उस खेत के बीचो-बिच पत्थर का एक हिस्सा ज़मीन से ऊपर निकला हुआ था। उस पत्थर से ठोकर खाकर वह कई बार गिरकर चोट भी लगी थी और ना जाने कितनी ही बार उससे टकराकर खेती के औजार भी टूट चुके थे।

हर दिन की तरह आज भी वह सुबह-सुबह खेती करने पहूंचा। कुछ देर खेती करने के बाद जयवंत का हल उस पत्थर से टकराकर टूट गया और उसे सँभालते-सँभालते जयवंत भी गिर गया।

जयवंत को बहुत गुस्सा आया। उसने मन ही मन सोचा की आज जो भी हो जाए वह इस चट्टान को ज़मीन से निकाल कर उसकी खेत से बाहर फेंक देगा।

वह गुस्से में तुरंत अपने गांव गया और ५-६ गांव वालो को चट्टान का पत्थर हटाने के लिए बुलाया और सभी को लेकर वह अपने खेत में आ गया।

जयवंत बोला, “दोस्तों, इस चट्टान ने मुझे वर्षों से भारी नुकसान पहुँचाया है। और आज मैं इसे तुम सब की मदद से हमेशा के लिए इस चट्टान के पत्थर को मेरे खेत से बाहर निकलना चाहता हूँ।”

Night story for kids in Hindi

 ऐसा कहते ही जब गांववालों ने फावड़े से पत्थर के किनार पर वार करने लगे। पर उन लोगों ने फावड़ा एक-दो ही बार मारा था की वह पत्थर पूरा का पूरा ज़मीन से बाहर आ गया। वे सब हस्ते हुए कहने लगे, “तुमने तो कहा था की खेत के बिच एक बड़ा सा पत्थर दबा हुआ है, पर ये तो एक मामूली सा पत्थर निकला।

यहां तक ​​कि जयवंत भी पत्थर को देखकर चौंक गया। इतने सालों तक उसने वह पत्थर बड़ा होगा सोचकर नहीं निकला था।

उसे पछतावा हुआ की यदि उसने उस पत्थर को पहले हटाने की कोशिश की होती तो उसका नुकसान कभी नहीं होता। हम हमेशा सोचते हैं कि हमारी समस्याएं बड़ी हैं, लेकिन याद रखें कोशिश करने से सबका हल निकाल जाता है।

Read more- Moral Story for Class 10

दादी की होशियारी Hindi Stories with Moral

मनु अपने दादा-दादी और अपने परिवार के साथ शहर में रहता था। मनु अपने दादा-दादी से बहुत प्यार करता था। मनु का बर्थडे आनेवाला था और दादी जी उसे साइकिल गिफ्ट देना चाहती थी। दादी ने अपने बटुए में रुपए गिनकर देखे तो तीन हजार रुपये कम पड रहे थे।

उसके पास ए टी एम कार्ड तो था नहीं कि झटपट जाकर पैसे निकाल लेती और अगर वह घर के किसी दूसरे सदस्य को भेजती है तो बर्थडे गिफ्ट का सरप्राइस फिर सरप्राइस नहीं रह जाता, यह सोचकर दादी जी अपना अपने आप खुद धीरे-धीरे बैक पहुंच गई।

बैंक में बहुत भीड़ थी और लंबी लंबी लाइन लगी थी। दादी जी लाइन में जाकर खड़ी हो गई। काफी देर के बाद जब उनका नंबर आया तो काउंटर पर बैठी लडकी को उसने तीन हजार रुपए निकालने के लिए चेक जमा किया।

बैंक में काम कर रही लड़की ने चेक को देखा और झल्लाकर वापस दादी के हाथों में थमाते हुए बोली, “अरे आप लोग छोटी छोटी रकम निकालने के लिए हमें क्यों परेशान करती हैं, देखती नहीं, कितनी लंबी लाइन है। जाइये, एटीएम से पैसे निकाल लीजिए।”

Moral Hindi Story

इसपर दादी ने कहा, “बेटी मेरे पास एटीएम कार्ड नहीं है और मुझे सिर्फ तीन हजार रुपयों की ही जरूरत है।” लेकिन लड़की बूढ़ी दादी की कोई बात सुनने को राजी नहीं हुई और बड़ी कठोरता से जवाब देते हुए बोली, “इतनी छोटी रकम देने के लिए मैं खाली नहीं बैठी हूँ। आप हटिया यहां से, दूसरे को काउंटर पर आने दीजिये।”

बूढ़ी दादी ने तब दो पल सोचा और फिर तुरंत चेक बुक निकालते हुए कहा, “ठीक है बेटी, मुझे मेरे अकाउंट में जमा चालीस हज़ार रुपये पूरे के पूरे अभी निकाल कर दो।” लड़की ने चुपचाप चालीस हजार दादी को पकड़ा दिए।

दादी ने उसमें से तीन हजार रुपए अपने बेग में रखें और बाकी सैंतीस हजार उस लडकी को वापस देते हुए बोली, “जब छोटी रकम मांगा तो तुमने नहीं दिया, जब कि मुझे पता है कि कोई भी बैंक किसी भी सीनियर सिटीजन को इन बातों के लिए मना नहीं कर सकती है। अब कम से कम यह सैंतीस हजार रुपए वापस जमा करने के लिए मना तो नहीं करोगी ना?”

काउंटर पर बैठी लड़की ने शर्म से सर झुकाते हुए “सॉरी मैम” कहा और दादी के बचे हुए सैंतीस हज़ार बैंक में जमा कर दिए।

डर के आगे जित है Funny Bedtime Story

Funny Bedtime Story

एक बड़े से शहर में एक बहुत अमीर व्यापारी रहता था। उसे एक अजीब शौक था, वो अपने घर के अन्दर बने एक बड़े से स्विमिंग पूल में बड़े-बड़े रेप्टाइल्स (Reptiles) पाले हुए था। जिसमे एक से बढ़कर एक सांप, मगरमच्छ, आदि शामिल थे।

अपने जन्मदिन पर, उन्होंने एक बड़ी पार्टी आयोजित करने का फैसला किया। उसने अपने सभी दोस्तों और परिवार को बुलाया। पार्टी  में खाने-पीने के बाद वो सभी मेहमानों को स्विमिंग पूल के पास ले जाता है और कहता है, “दोस्तों, आप इस पूल को देख रहे हैं, इसमें एक से एक खतरनाक जीव हैं, अगर आपमें से कोई इसे तैर कर पार कर ले तो मैं उसे ५० लाख रुपये दूंगा।

सभी लोग पूल की तरफ देखते हैं, पर किसी की भी हिम्मत नहीं होती है कि उसे पार करे। लेकिन तभी छपाक से आवाज होती है, और एक लड़का उसमे कूद जाता है,और मगरमच्छों, साँपों, इत्यादि से बचता हुआ पूल पार कर जाता है।

सभी लोग उसकी इस बहादुरी को देख हैरत में पड़ जाते हैं। अमीर व्यापारी को भी यकीन नहीं होता है कि कोई ऐसा कर सकता है; इतने सालों में किसी ने पूल पार करना तो दूर उसका पानी छूने तक की हिम्मत नहीं की।

वो उस लड़के को बुलाता है, “लड़के, आज तुमने बहुत ही हिम्मत का काम किया है, तुम सच- मुच बहादुर हो बताओ तुम कौन सा इनाम चाहते हो।”

“अरे, इनाम-विनाम तो मैं लेता रहूँगा, पहले ये बताओ कि मुझे धक्का किसने दिया था!!!” लड़का बोला।

रिस्क और आत्मविश्वास हमारे जीवन में सबसे महत्वपूर्ण होती है।

लकड़हारे का सबक Short Moral Story for Children

Short Moral Story for Children
Bedtime Stories in Hindi

किसी गांव में एक बूढ़ा लकड़हारा रहता था। सत्तर वर्ष के करीब की उम्र थी उसकी। परिवार में कोई न था। बिल्कुल अकेला रहता था।

उसे लकड़ियां तोड़ने रोज जंगल में जाना पड़ता था। यही नहीं दिनभर की तोड़ी लकड़ियां उसे शाम को बाजार में बेचने भी खुद ही जाना पड़ता था। और तब कहीं जाकर रात को उसे दो वक्त का खाना नसीब होता था।

पर उसकी असली शामत वर्षाऋतु में आ जाती थी। अक्सर तोड़ी हुई लकड़ियां भीग जाती और बेचने लायक न बचतीं। फलस्वरूप कई बार बारिश के कहर के चलते उसे दो-दो दिन तक भूखा रहना पड़ता था।

यह उम्र और ऐसा कष्ट, वह बुरी तरह थक गया था। वह अक्सर दुखी होकर प्रार्थना भी करता था, “हे मौत के देवता! तू मुझे उठाता क्यों नहीं है? मुझसे नाराज क्यों है मौत के देवता? तुमने मुझसे छोटे-छोटे को उठा लिए, फिर मुझसे क्या दुश्मनी है तेरी?”

लेकिन एक दिन वह ऐसी ही हताश मनोदशा में उस दिन वह पेड़ के नीचे बैठकर फिर मौत के देवता को पुकार-पुकारकर जीवन से मुक्त करने की प्रार्थनाएं कर रहा था। उसका एक ही रोना था कि मुझे कब उठाएगा तू? इधर अभी उसकी प्रार्थना जारी ही थी कि किसी ने उसके कंधे पर हाथ रखा। बूढ़ा चौंक गया।

उसने पलटकर देखा तो एक विशालकाय मनुष्य खड़ा था। बूढ़े ने डरते हुए उसका परिचय पूछा। उसने कहा “मैं मौत का देवता हूँ! यहां से गुजर रहा था कि तुम्हारी दर्द-भरी पुकार सुनी। वैसे तो तुम्हारा समय नहीं हुआ है, परंतु तुम्हारा दर्द देखकर मैं द्रवित हो उठा हूँ। चलो तुम्हें ले चलता हूँ।”

Moral Story in Hindi for Kids

बूढ़ा तो यह सुनते ही होश में आ गया। वह पूरी तरह से भ्रमित था और बहुत डर भी गया था। बस उसने तुरंत रंग बदलते हुए मौत के सौदागर से कहा “वह तो मैं दो-तीन दिनों से भूखा था, सो बस यूं ही ऐसी बातें कह गया था। बाकी तो मैं बहुत खुश हूँ। और यह स्पष्ट समझ लो कि फिलहाल मेरा मरने का कोई इरादा नहीं। मैंने यह केवल इसलिए कहा क्योंकि मैं गुस्से में था। मेरा मरने का कोई इरादा नहीं है। वैसे तो मैं आपको फिर कभी पुकारूगा भी नहीं।

मौत के देवता ने कहा, “जैसी आपकी मर्जी। इतना कहकर वह चला गया। इधर उसके जाते ही बूढ़ा तरंग में आ गया। उसकी चाल ही बदल गई थी। आश्चर्य तो यह कि उसके बाद फिर कभी उसने कष्ट का अनुभव भी नहीं किया। उसके सोच और जीवन दोनों बदल चुके थे। बाहर की दुनिया में सब कुछ वैसा-का-वैसा था, लेकिन फिर भी उसके भीतर सबकुछ पूरा-का-पूरा बदल गया था। और जब जीवन है और एहसास जीवित है, फिर और क्या चाहिए?

मनुष्य के लिए उसके जीवन से बढ़कर और कुछ नहीं है

Read more – Complete Aarti Sangrah in Hindi with PDF Book

जीवन का स्वाद Hindi Story

मोहित नाम का लड़का था, वह बहुत ही चुपचाप सा रहता था। किसी से ज्यादा बात नहीं करता था इसलिए उसका कोई दोस्त भी नहीं था। वह हमेशा कुछ परेशान सा रहता था। पर लोग उस पर ज्यादा ध्यान नहीं देते थे।

एक दिन वह अपने पिता के साथ उसके दोस्त के घर गया। मोहित को गुमसुम बैठे देखकर उसके पिता के दोस्त ने बोला, “बेटा क्या हुआ? तुम अक्सर बड़े गुमसुम और शांत बैठे रहते हो, ना किसी से बात करते हो और ना ही किसी चीज में रूचि दिखाते हो! इसका क्या कारण है?”

मोहित ने अपने पिता की तरफ देखा और कुछ देर शांत रहने के बाद आखिरकार बोल पड़ा, “मेरा पास्ट बहुत ही खराब रहा है, मेरी लाइफ में कुछ बड़ी ही दुखदायी घटनाएं हुई हैं, मैं उन्ही के बारे में सोच कर परेशान रहता हूँ”

थोड़ी देर सोचने के बाद पिताजी के दोस्त ने उसे बोला, “मोहित क्या तुम शिकंजी पीना पसंद करोगे?”  “जी, चलेगा।” मोहित ने कहा। पिताजी के दोस्त ने शिकंजी बनाते वक्त जानबूझ कर नमक अधिक डाल दिया और चीनी की मात्रा कम ही रखी। शिकंजी का एक घूँट पीते ही मोहित ने अजीब सा मुंह बना लिया।

Story in Hindi

मोहित के पिताजी के दोस्त ने पुछा, “क्या हुआ, तुम्हे ये पसंद नहीं आया क्या?” “जी, वो इसमे नमक थोड़ा अधिक पड़ गया है” मोहित अपनी बात कह ही रहा था की पिताजी के दोस्त ने उसे बीच में ही रोकते हुए कहा, “माफ़ करना, कोई बात नहीं मैं इसे फेंक देता हूँ, अब ये किसी काम की नहीं” ऐसा कह कर वह गिलास उठा ही रहे थे कि मोहित ने उन्हें रोकते हुए कहा, “नमक थोड़ा सा अधिक हो गया है तो क्या, हम इसमें थोड़ी और चीनी मिला दें तो ये बिलकुल ठीक हो जाएगा।”

“बिलकुल ठीक मोहित यही तो मैं तुमसे सुनना चाहता था। अब इस स्थिति को तुम अपनी लाइफ से कम्पेयर करो, शिकंजी में नमक का ज्यादा होना लाइफ में हमारे साथ हुए बुरा अनुभव की तरह है, और अब इस बात को समझो, शिकंजी का स्वाद ठीक करने के लिए हम उसमे में से नमक नहीं निकाल सकते, इसी तरह हम अपने साथ हो चुकी दुखद घटनाओं को अपने जीवन से अलग नहीं कर सकते, पर जिस तरह हम चीनी डाल कर शिकंजी का स्वाद ठीक कर सकते हैं उसी तरह पुरानी कड़वाहट मिटाने के लिए लाइफ में भी अच्छे अनुभवों की मिठास घोलनी पड़ती है।”

मोहित को अब अपनी गलती का एहसास हो चुका था, उसने मन ही मन एक बार फिर अपने जीवन को सही दिशा देने का वादा किया।

सफाई की परीक्षा Hindi Stories for kids

अज्जू का परिवार एक भिड़वाली शहर में रहता था। शहर काफी बड़ा था और इसलिए बहुत सरे लोग उसमे रहते थे। एक दिन अज्जू के दादी ने शहर जाकर कुछ दिन रहने का सोचा। वास्तव में अज्जू की दादी शहर के पास वाले गांव में रहती थी। लेकिन वह शहर साल में सिर्फ एक-दो बार अति थी।

“दादी माँ! मैं बहुत बहादुर बच्चा बन गया हूँ मुझे किसी से भी डर नहीं लगता। न छिपकली, न कॉकरोच और ना ही चींटियों से” अज्जू ने गाँव से आई अपनी दादी के सामने कॉलर ऊँचा करते हुए कहा।

“अरे वाह! लगता है अब तो तुम बहुत ही बहादुर बच्चे बन गए हो।” दादी ने भी उसे शाबाशी दी। “इस घर में आकर तुमने बहुत बड़ी गलती कर दी मिस्टर कॉकरोच अब तुम नहीं बचोगे।” अज्जू ने कॉकरोच को देखकर कहा और अभी कॉकरोच कहीं छिप पाता इससे पहले ही पट्ट!! की आवाज के साथ अज्जू ने उस पर चप्पल से वार कर दिया। कॉकरोच का कचूमर निकल गया। अज्जू के चेहरे पर विजयी मुस्कान तैर गई।

पिछले कई दिनों से दादी देख रही थी कि कभी चींटियों पर लक्षम्ण रेखा लगाकर, तो कभी मच्छर- मक्खियों को इलेक्ट्रॉनिक रैकेट से मारकर तो कभी छिपकली-कॉकरोच पर चप्पल-झाड़ू से वार करके अज्जू अपने आप को बहुत बहादुर समझ रहा था। आज भी वही हुआ। रसोई में कॉकरोच देखते ही माँ जोर से चिल्लाई और अज्जू ने चप्पल उसे मारने चला गया।

kids stories in Hindi

“रुको अज्जू! तुम्हारा यह तरीका बहुत ही अमानवीय है। इसे बहादुरी नहीं कहते यह तो क्रूरता है।” दादी ने उसे चप्पल मारने से पहले ही रोक दिया। “कैसे दादी! ये कीड़े-मकौड़े तो हमारे स्वास्थ्य के दुश्मन हैं ना? इन्हें तो मारना ही चाहिए वर्ना यह हमें बीमार कर देंगे।” अज्जू को दादी की बात सुनकर आश्चर्य हुआ।

“इसमें कोई शक नहीं है की यह हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं, किन्तु इन्हें इस प्रकार मारना इसका समाधान नहीं है। हमें तो इनसे बचाव के रास्ते अपनाने चाहिये।” दादी ने उसके हाथ से चप्पल ले ली। अब तक कॉकरोच भी न जाने कहाँ आकर छिप गया था।

“सुनो अज्जू! अपने घर और आसपास साफ सफाई रखने से कीड़े-मकौड़ों का आना बहुत कम हो जाता है। फिर भी यदि कोई भूलाभटका आ ही जाये तो उसे भगा देना चाहिए। छिपकली और मच्छर- मक्खियों को रोकने के लिए खिड़की-दरवाजों की चिटकनी बंद रखो। चींटियों को हल्दी या टेलकम पाउडर से भगाया जा सकता है। कॉकरोच लौंग की गंध से भाग जाते हैं। लेकिन हाँ! स्वच्छता पर ध्यान देने की सबसे अधिक आवश्कयता है समझे तुम?” दादी ने प्यार से उसके गाल खींचे।

“जी दादी! समझ गया।” कहते हुए अज्जू ने चप्पल को चप्पल स्टेण्ड में रख दिया। और साबुन से अपने हाथ धोने लगा। और सब ने मिलकर घर की अच्छी तरीके से सफाई की।

मनहूस पेड़ Hindi Kahaniya

Hindi Kahaniya

बहुत वर्षों की मेहनत के बाद एक किसान ने एक सुन्दर बागीचा बनाया। बागीचे के बीचो-बीच एक बड़ा सा पेड़ था जिसकी छाँव में बैठकर सुकून का अनुभव होता था।

एक दिन किसान का पड़ोसी आया, बागीचा देखते ही उसने कहा, ” अरे क्या तुम नहीं जानते, इस प्रजाति के पेड़ मनहूस माने जाते हैं, ये जहाँ होते हैं, वहां अपने साथ दुर्भाग्य लाते हैं। इस पेड़ को जल्दी से जल्दी यहाँ से हटाओ।” पडोसी बोला।

यह बोलकर पडोसी तो चला गया पर किसान परेशान हो गया। उसे डर लगने लगा कि कहीं इस पेड़ की वजह से उसके साथ कुछ अशुभ न हो जाए। अगले ही दिन उसने वो पेड़ काट डाला। पेड़ बड़ा था, उसकी कटी लकड़ियाँ पूरे बागीचे में जहाँ -तहाँ इकठ्ठा हो गयीं।

अगले दिन फिर वही पड़ोसी आया और बोला, “इतने सुन्दर बागीचे में ये बेकार की लकड़ियाँ क्यों इकठ्ठा कर रखी हैं। ऐसा करो इन्हे मेरे अहाते में रखवा दो।” लकड़ियाँ रखवा दी गयीं। किसान ने पडोसी की बातों में आकर पेड़ तो कटवा दिया, पर अब उसे एहसास होने लगा कि पडोसी ने लकड़ियों की लालच में आकर उससे ऐसा करवा दिया।

दुखी मन से वह एक साधु के पास पहुंचा और पूरी बात बता दी। साधु महाराज मुस्कुराते हुए बोले, “तुम्हारे पड़ोसी ने सच ही तो कहा था, वो पेड़ वास्तव में मनहूस था, तभी तो वो तुम्हारे जैसे मूर्ख के बागीचे में लगा था।” यह सुन किसान का मन और भी भारी हो गया। “अच्छी बात ये है कि तुम अब पहले जैसे मूर्ख नहीं रहे। तुमने पेड़ तो गँवा दिया पर उसके बदले में एक कीमती सबक सीख लिया है। जब तक तुम्हारी अपनी समझ किसी बात को ना स्वीकारे तब तक दुसरे की सलाह पर कोई कदम मत उठाना।”

असली चोर कौन Hindi Kahaniya Bedtime Stories

बहुत समय पहले की बात है। एक दिन गांव में एक आमिर व्यापारी के यहाँ चोरी हो गयी। उन्होंने तुरंत पुलिस से शिकायत की और उन्होंने जांच शुरू कर दी। आमिर व्यापारी के यहाँ बहुत सरे नौकर काम करते थे तो चोर को पकड़ना बहुत ही मुश्किल था।

अगले दिन पुलिस ने व्यापारी के दोस्त और नौकरों को पुलिस स्टेशन बुलाया और सबके हाथ में एक छड़ी दी। पुलिस ने बताया की ये सब छड़ी तुम आज अपने पास रखो और कल इस छड़ी के साथ पुलिस स्टेशन आना।

यह सभी छाड़ियो की खासियत यह है की यह चोर के पास जाकर एक उंगली के बराबर अपने आप बढ़ जाएगी। उन्हें ये भी बताया की यह नई तकनीक है जिसे फिंगरप्रिंट कहा जाता है और इससे पुलिस ने कई चोरों को पकड़ा है।

पुलिस की बात सुनकर सभी लोक छड़ी लेके अपने-अपने घर चले गए। उन्ही में व्यापारी के घर चोरी करने वाला चोर भी था।

जब वह घर पहूँचा तो उसने सोचा, “अगर पुलिस के सामने मेरी छड़ी बड़ी हो गयी तो वे मुझे जेल में भेज देंगे। इसलिए क्यों न इस छड़ी को पहले से ही ऊँगली भर काट लिया जाए।“

चोर यह सोचकर बहुत खुश हुआ और फिर उसने बहुत अच्छी तरीके से छड़ी को काट लिया ताकि किसी को पता न चले।

अगले दिन आमिर व्यापारी के सभी दोस्त और नौकरों ने पुलिस को अपनी छड़ी दिखाई। चोर ने भी अपनी छड़ी पुलिस तो दिखाई पर उसकी छड़ी सबसे छोटी दिख रही थी। पुलिस ने तुरंत चोर को पकड़ा और चोर ने डर के मारे उसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया।  

लालची भिखारी Short stories in Hindi

Short stories in Hindi

एक दिन एक अमीर व्यवसाई को रास्ते में एक भिखारी भीख मांगता हुआ दिखाई दिया। भिखारी की हालत देखकर व्यवसाई को उस पर दया आ गई। उसने भिखारी से पूछा कि उसकी ऐसी दशा क्यों हुई? भिखारी ने बताया कि उसके खेत बारिश से तबाह हो गए और अब उसके पास दोबारा खेती शुरू करने के लिए पैसे नहीं हैं। जिसके कारण भीख मांगना पड़ रहा है।

अमीर व्यवसाई ने कुछ सोचते हुए पूछा, “क्या तुम मेरे लिए कुछ दिन काम करोगे? कुछ महीनों में आपके नुकसान की भरपाई हो जाएगी।” भिखारी खुश होते हुए बोला, “मालिक, आप बताइए क्या काम करना है?” व्यवसायी ने कहा, “मेरे खेतों में गेहूं की फसल होती है, तुम उसे शहर के बाजार में जाकर बेच आना। मै तुम्हें बाजार जाने, वहां दुकान खोलने और रहने खाने का सब खर्चा दूंगा। गेहूं बेचकर तुम जो धन कमाओगे उसे हम दोनों बांट लेंगे।” ये सुनकर भिखारी बहुत खुश हो गया और उसने व्यवसाई से पूछा, मालिक आपका बहुत-बहुत धन्यवाद लेकिन बंटवारे का

हिसाब क्या होगा?” यह सुनकर व्यवसायी ने कहा, “तुम्हारा अस्सी प्रतिशत और मेरा बीस प्रतिशत। मैं तो अमीर हूं ही लेकिन तुम्हारा जीवन सुधर जाए और तुम्हे ईमानदारी और कृतज्ञता का ज्ञान मिले इसलिए तुम्हे अस्सी प्रतिशत दे रहा हूँ।”

भिखारी ने खुशी खुशी अगले दिन से काम शुरू कर दिया। गेहूं की फसल अच्छी थी, तो महीने भर में उसे अच्छी कमाई मिल गई लेकिन अब उसके दिमाग में लालच आ गया था।

Short story in Hindi

उसने सोचा, “मेहनत तो मैंने की है, तो व्यवसायी को बीस प्रतिशत रुपए भी क्यों दूं? काम तो मैंने किया है तो सब माल भी मेरा ही होगा।”

महीने के अंत में व्यवसायी ने आकर मिखारी से अपना हिरसा मांगा तो भिखारी ने नाक चढ़ाते हुए कहा, ” माफ़ करना पर काम सारा मैंने किया है, तो तुम्हे बीस प्रतिशत किस बात की दूं?” ये सुनकर आमिर व्यवसायी ने मुस्कुराकर कहा, “ठीक है, तो मैंने जो मकान तुम्हें रहने के लिए दिया उसका खर्चा मुझे दे दो। बाजार में बैठने के लिए जो दुकान दिया उसका किराया दे दो, गाँव से शहर के बाजार तक जाने के लिए जो ट्रक भेजता रहा और महीनो भर मैंने तुम्हें जो खिलाया, पहनाया उसका हिसाब दे दो और पूरा कमाई तुम रख लो।”

भिखारी ने तुरंत हिसाब किया और ये देखकर दंग रह गया कि उसे जितना लाभ हुआ था उतना ही उसे व्यवसायी को लौटाना पड़ेगा। उसने तुरंत व्यवसायी से माफी मांगी लेकिन व्यवसायी ने उसे निकाल दिया। भिखारी फिर से भिखारी बन गया।

लालच बुरी बला है।

चूहों का शहर – हिंदी स्टोरीज

एक शहर के बहुत बड़े होटल में सैकड़ों चूहे रहते थे। वे चारों ओर उछल-कूद करते हुए अपना पेट आराम से भर लेते थे और फिर जब उन्हें खतरा दिखाई देता तो बिल में जाकर छिप जाते थे।

एक दिन उस होटल में न जाने कहाँ से एक बिल्ली आ गई। बिल्ली की नज़र जैसे ही चूहों पर पड़ी तो उसके मुँह में पानी आ गया। बिल्ली ने उन चूहों को खाने के विचार से उसी होटल में अपना डेरा डाल दिया। बिल्ली को जब कभी भूख लगती तो वह अँधेरे स्थान में छिप जाती और जैसे ही चूहा बिल से बाहर आता तो उसे मारकर खा जाती।

अब तो बिल्ली रोज चूहों का भोजन करने लगी। इस प्रकार वह कुछ ही दिनों में मोटी-ताजी हो गई। बिल्ली के आ जाने से चूहे दुःखी हो गए। धीरे-धीरे चूहों की संख्या कम होती देख वे भयभीत हो गए। चूहों के मन में बिल्ली का डर बैठ गया। बिल्ली से बचने का कोई उपाय खोजने के लिए सभी चूहों ने मिलकर एक सभा का आयोजन किया।

सभा में सभी चूहों ने अपने-अपने विचार प्रस्तुत किए, लेकिन कोई भी प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास नहीं हो सका। सभी चूहों में निराशा फैल गई। तब एक बूढ़ा चूहा अपने स्थान पर खड़ा होकर बोला, “भाइयो सुनो, मेरे पास एक सुझाव है, जिस से हमारी समस्या का हल निकल सकता है।

प्रेरक कहानियां

यदि हमें कहीं से एक घंटी और धागा मिल जाए तो हम घंटी को बिल्ली के गले में बाँध देंगे। जब बिल्ली चलेगी तो उसके गले में बँधी हुई घंटी भी बजने लगेगी। हम घंटी की आवाज़ सुनते ही सावधान हो जाएँगे और अपने-अपने बिल में जाकर छिप जाएंगे।”

बूढ़े चूहे का यह सुझाव सुनकर सभी चूहे ख़ुशी से झूम उठे और अपनी ख़ुशी प्रकट करने के लिए वे नाचने-गाने लगे। चूहों का विचार था कि अब उन्हें बिल्ली से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी और वे फिर से निडर होकर घूम सकेंगे।

तभी एक अनुभवी चूहे ने कहा, “चुप रहो, तुम सब मुर्ख हो। तुम इस तरह तरह खुशियाँ मना रहे हो, जैसे तुमने कोई युद्ध जीत लिया हो। क्या तुमने सोचा है कि बिल्ली के गले में जब तक घंटी नहीं बंधेगी तब तक हमें बिल्ली से मुक्ति नहीं मिल सकती। तो कौन बिल्ली के गले में घंटी बांधेगा?” अनुभवी चूहे की बात सुनकर सारे चूहे मुँह लटकाकर बैठ गए। उनके पास अनुभवी चूहे के प्रश्न का कोई उत्तर नहीं था।

तभी उन्हें बिल्ली के आने की आहट सुनाई दी और सारे चूहे डरकर अपने-अपने बिलों में घुस गए।

जीवन की बचत Hindi stories with moral

सवनपुर गांव में एक किसान था। इस साल कम बारिश होने के कारण उसकी फसल कम होने की वजह से चिंतित था। घर में राशन ग्यारह महीने चल सके उतना ही था। बाकी एक महीने का राशन का कहां से इंतजाम होगा। यह चिंता उसे बार बार सता रही थी।

किसान की बेटी का ध्यान जब इस ओर गया तो उसने पूछा, “पिताजी आजकल आप किसी बात को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं, क्यों क्या हुआ?।” तब किसान ने अपनी चिंता का कारण अपनी बेटी को बताया। किसान की बात सुनकर उसकी बेटी ने उन्हें आश्वासन दिया कि वह किसी बात की चिंता न करें। उस एक महीने के लिए भी अनाज का इंतजाम  हो जाएगा।

जब पूरा वर्ष उनका आराम से निकल गया तब किसान ने पूछा कि आखिर ऐसा कैसे हुआ। बेटी ने कहा, “पिताजी जबसे आपने मुझे राशन के बारे में बताया तभी से मैं जब भी रसोई के लिए अनाज निकालती उसी में से एक दो मुट्ठी हर रोज वापस कोठी में डाल देती। बस उसी वजह से बारहवें महीने का इंतजाम हो गया।”

जीवन में बचत की आदत डालनी चाहिए

नमक का दाम – मजेदार कहानियां

दशरथ दादा अपनी ईमानदारी और नेक स्वाभाव के लिए पूरे गाँव में प्रसिद्द थे। एक बार उन्होंने अपने कुछ मित्रों को खाने पर आमंत्रित किया। वे अक्सर इस तरह इकठ्ठा हुआ करते और साथ मिलकर अपनी पसंद का भोजन बनाते। आज भी सभी मित्र बड़े उत्साह से एक दुसरे से मिले और बातों का दौर चलने लगा।

जब बात खाने को लेकर शुरू हुई तभी दादा को एहसास हुआ कि नमक तो सुबह ही ख़त्म हो गया था। दादा नमक लाने के लिए उठे फिर कुछ सोच कर अपने बेटे को बुलाया और हाथ में कुछ पैसे रखते हुए बोले, “बेटा, जा जरा बाज़ार से एक पुड़िया नमक लेता आ और ये ध्यान रखना कि नमक सही दाम पे खरीदना, ना अधिक पैसे देना और ना कम।”

बेटे को आश्चर्य हुआ, उसने पूछा, “पिताजी, अधिक दाम में ना लाना तो समझ में आता है, लेकिन अगर कुह मोल भाव करके मैं कम पैसे में नामक लाता हूँ और चार पैसे बचाता हूँ तो इसमें हर्ज़ ही क्या है?” “नहीं बेटा ऐसा करना हमारे गाँव को बर्वाद कर सकता है! जा उचित दाम पे नामक लेकर आ।” दादा बोले।

दादा अपने उलझन में पड़े मित्र से बोले, “सोचो कोई नमक कम दाम पे क्यों बेचेगा, तभी न जब उसे पैसों की सख्त ज़रूरत हो। और जो कोई भी उसकी इस स्थिति का फायदा उठाता है वो उस मजदूर का अपमान करता है। जिसने पसीना बहा कर, कड़ी मेहनत से नमक बनाया होगा”

“लेकिन इतनी सी बात से अपना गाँव कैसे बर्वाद हो जाएगा?” मित्रों ने हँसते हुए कहा। “देखो मित्रों, शुरू में समाज के अन्दर कोई बेईमानी नहीं थी, लेकिन धीरे-धीरे हम लोग इसमें एक-एक चुटकी बेईमानी डालते गए और सोचा कि इतने से क्या होगा, पर खुद ही देख लो हम कहाँ पहुँच गए हैं।“

मज़बूरी- Hindi Kahani

स्वेता एक गरीब परिवार से थी। उसके घर में माँ-पिताजी और छोटी बहन थी। पिताजी मेहनत-मजदूरी से जो कमाकर लाते थे, उसी से उनका घर चलता था। एक दिन उसके पिताजी बीमार हो गये। स्वेता विद्यालय नहीं जा पाई। उसके पिताजी को बहुत तेज बुखार था। माँ ने स्वेता से कहा, “बिटिया! इतने पैसे तो हैं नहीं कि डॉक्टर को दिखाया जा सके। ये पैसे लो, और दवाई की दुकानने बुखार की दवाई ले आओ।”

“लेकिन माँ! हमारे अध्यापक कहते हैं कि चिकित्सक को दिखाये बिना दवा नहीं लेनी चाहिए।” स्वेता ने माँ से कहा। माँ बोलीं, “अरे बिटिया! हमारे पास इतने रुपये भी तो होने चाहिए, कि चिकित्सक का शुल्क दे सकें। तुम जाओ और दवाई ले आओ, वे ठीक हो जाएंगे।”

स्वेता ने रुपये लिए और औषधी भंडार से दवाई ले आई। दवाई लेने के बाद भी उसके पिता का स्वास्थ्य ठीक नहीं हुआ। संध्या तक उनकी हालत और खराब हो गई। उसकी माँ बोलीं, “बिटिया! अब तो इनका स्वास्थ्य और बिगड़ता जा रहा है, अब बिना चिकित्सक के कैसे ठीक होंगे? “माँ! अब तो सरकार सभी अस्पताल में निशुल्क दवाई देती है। क्या हम लोग वहाँ पिताजी का उपचार नहीं करा सकते?” स्वेता ने पूछा।

Kahani in Hindi

“अब संध्या हो गई है, वहाँ ले कौन जायेगा? हमारे पास तो कोई वाहन भी नहीं है।” माँ ने कहा।  स्वेता बहुत विचार करती है और और बिना टाइम गवाए वह अस्पताल चली जाती है। कुछ ही देर में वह अस्पताल पास पहुँच जाती है और वहां के डॉक्टर से बोलती है,  “मेरे पिताजी बहुत बीमार हैं, उन्हें बुखार है। मेरे पास रुपये तो नहीं हैं, लेकिन मेरा ये स्वर्ण पदक है। ये मुझे कक्षा पांच में प्रथम आने पर मिला था। आप कहेंगे, तो अपना दूसरा पदक भी दे दूँगी, जो मुझे खेलों में मिला था। बस आप मेरे पिताजी को ठीक कर दीजिए।”

स्वेता की बात सुनकर डॉक्टर्स सन्न रह जाते है। वो कहते है, “बिटिया! यह पदक तुम्हारी पूँजी है। तुम्हारी मजबूरी में इसे हम ले लें, यह बहुत अन्याय होगा। चलो हम तुम्हारे पिताजी को देखते हैं। तुम चिंता मत करो, तुम्हारे पिताजी भी ठीक होंगे और तुम्हारे पदक पर भी तुम्हारा ही अधिकार रहेगा” इतना सुना तो स्वेता प्रसन्न हो जाती है और डॉक्टर को साथ लेकर घर जाती है। डॉक्टर्स के उपचार से बस अगले ही दिन उसके पिताजी ठीक हो जाते है।

Read more – Sarkari Yojna

ज्ञान की नौका – हिंदी कहानियां

नदी पार करने के लिए कई लोग एक नौका में बैठे थे। धीरे-धीरे नौका सवारियों के साथ सामने वाले किनारे की ओर बढ़ रही थी, राहुल जो पढ़ाई में बहुत अच्छा था और वह गाँव का सबसे अधिक शिक्षित व्यक्ति था, वो भी नौका में बैठा था। राहुल ने नाविक से पूछा, “आपने अपने जीवन में कितनी पढ़ाई की है?” भोला- भाला नाविक बोला, “ज्यादा नहीं जानता लेकिन मुझे लगता है कि मैंने 5वीं तक पढ़ाई की है।”

राहुल ने दिखावा करते हुए कहा, “मैंने 15वीं तक पढ़ाई की है। तुम्हारी आधी भर जिंदगी पानी में गई।” फिर राहुल ने दूसरा प्रश्न किया, “क्या आप हमारे देश का इतिहास जानते हैं? क्या आप विज्ञान जानते हैं? गणित?” नाविक ने अपनी अनभिज्ञता जाहिर की तो राहुल ने हस्ते हुए कहा, “ये भी नहीं जानते तुम्हारी तो पौनी जिंदगी पानी में गई।”

ऐसे करते-करते ररहुल ने नाविक से बहुत सरे सवाल पूछे जिसका वह एक भी जवाब नहीं दे पाया। तभी अचानक नदी में प्रवाह तीव्र होने लगा। नाविक ने सभी को तूफान की चेतावनी दी, और राहुल से पूछा “नौका तो तूफान में डूब सकती है, क्या आपको तैरना आता है?” राहुल ने गभराहट में बोला “मुझे तो तैरना-वैरना नहीं आता है”

नाविक ने स्थिति भांपते हुए कहा, “तब तो समझो आपकी पूरी जिंदगी पानी में गयी।” कुछ ही देर में नौका पलट गई। और राहुल बह गए।

Moral of the Story – अपने ज्ञान से कभी दुसरो को नीचा नहीं दिखाना चाहिए।

ईमानदारी का इनाम Kahaniya

रात के समय रामु अपनी दुकान बंद ही कर रहा था कि एक कुत्ता दुकान में आया। उसके मूहं में एक थैली थी। जिसमें सामान की लिस्ट और पैसे थे। रामु ने पैसे लेकर सामान उस थैली में भर दिया। कुत्ते ने थैली मुँह मे उठा ली और चला गया।

रामु आश्चर्यचकित होके कुत्ते के पीछे पीछे गया ये देखने की इतने समझदार कुत्ते का मालिक कौन है।  कुत्ता बस स्टॉप पर खडा रहा। थोडी देर बाद एक बस आई जिसमें चढ गया। कंडक्टर के पास आते ही अपनी गर्दन आगे कर दी। उस के गले के बेल्ट में पैसे और उसका पता भी था। कंडक्टर ने पैसे लेकर टिकट कुत्ते के गले के बेल्ट मे रख दिया। अपना स्टॉप आते ही कुत्ता आगे के दरवाजे पे चला गया और पुंछ हिलाकर कंडक्टर को इशारा कर दिया।

बस के रुकते ही उतरकर चल दिया। रामु भी पीछे पीछे चल रहा था। कुत्ते ने घर का दरवाजा अपने पैरो से २-३ बार खटखटाया। अंदर से उसका मालिक आया और लाठी से कुत्ते की पीटाई शुरू कर दी । रामू ने मालिक से इसका कारण पूछा । मालिक बोला, “साले ने मेरी नींद खराब कर दी। घर की चाबी साथ लेके नहीं जा सकता था साला गधा?”  जीवन की भी यही सच्चाई है। लोगों की अपेक्षाओं का कोई अंत नहीं है।

चाय की दुकान Motivational stories in Hindi

रामपुर गांव में सर्वेश और उसकी पत्नी वसुंदरा रहते थे। सर्वेश बाजार में चाय की एक छोटी सी दूकान लगाता था जिससे उनका जीवन यापन हो रहा था। सर्वेश सवभाव से बहुत मददगार और अच्छे चरित्र वाला व्यक्ति था।

जब भी चाय की दूकान में उसके 2 -3 बेरोज़गार दोस्त और कोई भीख मांगने वाला व्यक्ति आ जाता था तो उनको सर्वेश बिना पैसे लिए ही चाय पिला देता था। जिससे कोई ख़ास बचत नहीं हो पाती थी, यह बात उसने अपनी पत्नी को बताई तो उसकी पत्नी वसुंदरा बोली, “कोई बात नहीं आप लोगों का भला ही तो कर रहे है।”

इसी तरह समय बीतता जा रहा था सर्वेश अपने दूकान में आने वाले व्यक्तियों से बात करता और उनका हाल चाल जानता जिससे उसको उनके बारे में भी पता चल जाता था। एक दिन वहाँ चाय पिने आने वाले व्यक्ति को एक हज़ार रूपए की जरुरत थी, तो उसने सर्वेश से रूपए मांगे की उसको अपनी बीवी को इलाज के लिए डॉक्टर के पास लेकर जाना है। इसलिए उसको पैसों की सख्त जरुरत है वह यह रूपए दो दिन में लौटा देगा।

सर्वेश दूसरों की परेशानियों को समझता था। उसने उस व्यक्ति को एक हज़ार रूपए दो दिन के लिए दे दिए। दो दिन के बाद उस व्यक्ति ने वह रूपए सर्वेश को लौटा दिए। उसके बाद एक दूसरे व्यक्ति जिसको रूपए की जरुरत थी उसको पता चला की सर्वेश चायवाले ने एक व्यक्ति को दो दिन के लिए रूपए देकर उसकी मदद की।

Motivational Story in Hindi

वह व्यक्ति सर्वेश से बोला मुझे रूपए की सख्त जरुरत है इसलिए मुझे दो हज़ार रूपए दे दो, जिसको मैं चार दिन के बाद लौटा देगा। जिस तरह आपने उस व्यक्ति की मदद की थी आप मेरी भी मदद कर दो। पहले तो सर्वेश ने मना किया इतने रूपए देने के लिए, लेकिन उस व्यक्ति के गुज़ारिश करने के बाद सर्वेश ने उस व्यक्ति को भी दो हज़ार रूपए दे दिए। चार दिन के बाद उस व्यक्ति ने सर्वेश को दो हज़ार दो सौ रूपए दिए।

सर्वेश बोला, “माफ़ करना पर आपने मुझे दो सौ रूपए ज्यादा दिए है।” उस व्यक्ति ने सर्वेश से बोला, “आपने मेरी जरुरत के समय मदद की थी जब मुझे कोई रूपए नहीं दे रहा था यह उसके लिए है। आप इसको रख लीजिये।” सर्वेश बहुत खुश हुआ और अपने घर पर अपनी बीवी के लिए मिठाई लेकर गया और उसने अपनी बीवी को सारी बात बताई।

इसके बाद बहुत से लोगों को पता चल गया की सर्वेश जरुरत के समय लोगो की पैसे देकर मदद करता है। सर्वेश अब पैसे से मदद करने के लिए कुछ रूपए चार्ज करने लगा। जिससे उसने कुछ समय में ही बहुत पैसे कमा लिए और वह अपने गांव में प्रसिद्ध हो गया। अब सर्वेश ने एक चाय की अच्छी दूकान खोल ली, लेकिन उसका मुख्य काम चाय बेचने की जगह पैसे उधार में देने का ज़्यादा हो गया। जिसके कारण वह अपने गांव के साथ साथ आस पास के गावों में भी प्रसिद्ध हो गया।

Read more – Best Good Morning Quotes in Hindi | सुप्रभात

स्कूल पिकनिक Hindi kahaniya for kids

Hindi kahaniya for kids

स्कूल पिकनिक के लिए क्लास टीचर ने बच्चों को नदी किनारे बगीचे में ले गए हैं। बच्चे उस जगह पर खूब एन्जॉय कर रहे थे। कोई क्रिकेट खेल रहा था, कोई नाच रहा था, दौड़ रहा था और सभी खुश थे। दोपहर में खाना खाने के बाद सभी एक जगह बैठे थे।

तभी क्लास टीचर ने एक लड़की उदास बैठी हुई देखि। टीचर ने उसे अपने पास बुलाकर उसे पानी के गिलास में मुट्ठी भरकर नमक डालने के लिए कहा। उस लड़की ने ऐसाही किया और फिर टीचर ने उसे वह पानी पिने के लिए कहा।

फिर टीचर ने उस उदास लड़की से पूछा, “इसका स्वाद कैसा है?” लड़की ने कहा, “बहुत बुरा” टीचर ने युवा लड़की को नमक कौ मुट्ठी भरकर नदी में डालने का हुक्म दिया। दोनों नदी के किनारे सैर कर रहे थे और लड़की ने अपने हाथ से नदी में नमक डाला। टीचर ने कहा, “अब नदी का पानी पीयो।”

जैसे ही उस लड़की ने पानी पिया तो टीचर ने पूछा, “इसका स्वाद कैसा है? क्या उसमें नमक का स्वाद आया” लडकी ने कहा, “अच्छा है, ना नमक का स्वाद तो नहीं आया।” 

फिर टीचर ने उसे समझाया, “हमारी जिंदगी के दुख नमक की तरह है। ना ज़्यादा, ना कम। हमारी जिंदगी में दुख हमेशा एक जैसे रहेंगे, कभी नहीं बदलेंगे लेकिन हम उस दुख का स्वाद किस तरह लेंगे यह उस पर निर्भर करता है कि हम अपने दुख को किस तरह देखते है। इसलिए अगर तुम दुख में हो तो एक चीज जो तुम कर सकते हो, वह यह कि अपनी चीजों को देखने की क्षमता को बढ़ा दो। गिलास मत बनो, नदी बनो।”

लालची गधा Lalchi story in Hindi

एक कुत्ता और गधे की बहुत गहरी दोस्ती थी। दोनों को गाँव के एक किसान ने पाल रखा था। वह किसान शाम को खेती का काम होने के बाद कुत्ते और गधे को घूमने के छोड़ देता था। और जैसे ही रात होती थी दोनों फिरसे किसान से घर वापस चले आ जाते थे।

एक शाम को किसान ने खेती का काम होने के बाद कुत्ते और गधे को खुले मैदान में छोड़ दिया और वह अपने घर चला गया। थोड़ी देर मैदान में घूमने के बाद गधे ने कुत्ते से कहा, “चलो थोड़ी गांव की सैर कर आते हैं।” कुत्ते ने गधे की बातो में हां में हां मिलायी।

दोनों थोड़ी देर चलने के बाद एक बड़े से खेत के पास आ गए। खेत में फसल देखकर गधे की मुँह में पानी आ गया। गधे ने कुत्ते से कहा, “मुझे बहुत जोर की भूख लगी है। तुम ठहरो, मैं फसल की दो-चार मुँह मारकर आता हूँ।” कुत्ते ने गधे को ऐसा करने से मना किया, किन्तु गधे ने उसकी एक न सुनी।

गधा खेत में घुसकर उसकी फसल चरने लगा। उसको फसल बड़ी स्वादिष्ट लग रही थी। कुत्ते ने उसे चेताया, “तुमने दो-चार मुँह मारने की बात कही थी। लेकिन तुम तो रुकने का नाम ही नहीं ले रहे हो। लालच करना ठीक नहीं।” “भाई कहते तो तुम सही हो। लेकिन क्या करूँ, फसल है ही इतनी स्वादिष्ट” यह कहकर गधा फिर से फसल चरने लगा।

Lalchi Kahani

गधा स्वाद के लालच में इतनी फसल चर गया कि अब उसका चलना भी मुश्किल हो रहा था। तभी कुत्ते की ध्यान खेत के किसान पर पड़ी। वह एक मोटा डण्डा लिए दौड़ा चला आ रहा था। कुत्ते ने कहा “भागो। किसान आ गया। वह भी मोटा डण्डा लेकर।” लेकिन गधे का पेट इतना भर गया था कि वह तेज भागने के लायक ही न रह गया था।

किसान ने उसकी डण्डे से खूब पिटाई की। गधे को समझ में आ गया था कि यह सब उसके लालच करने का परिणाम है। रात भर डण्डे की चोट से उसका सारा शरीर दुखता रहा। गधे ने शपथ ली कि आगे से वह न तो किसी किसान के खेत में घुसेगा और न ही लालच करेगा।

शक्ति या ज्ञान Moral of the story in Hindi

एक बार एक ज्ञानी आदमी शहर से अपने गांव आ गया। वह कुछ दिनों के लिए गांव में रहने के लिए आया था इसलिए उसके साथ बहुत सारा सामान था। वह सामान लेकर गांव के रेलवे स्टेशन पर उतरा। वह स्टेशन से बाहर आया और अपने लिए टैक्सी तलाशने लगा।

सामने ही एक टैक्सी वाला खड़ा था। उस ज्ञानी ने टैक्सी वाले से कहा, “सिंह नगरी जाना है, कितना पैसा लोगे?” टैक्सी वाला बोला, “दो सौ रूपये लगेंगे साहब।” उस ज्ञानी ने बुद्धिमानी दिखाते हुए कहा, “इतने पास के दो सौ रूपये? यह क्या लूट मचा रखी है। मैं पैदल ही अपना सामान लेकर सिंह नगरी तक पहुंच जाऊंगा।”

ज्ञानी बहुत जिद्दी था और इसी कारण उसने अपना सामान उठाया और पैदल ही चलने लगा। आधा घंटे तक चलने के बाद उसे फिर से वही टैक्सी वाला दिखाई दिया। उसने टैक्सी वाले को रोका और कहा, “अब तो आधी दूरी तय हो गई है अब कितना पैसा लोगे?”

टैक्सी वाला बोला अब तीन सौ रूपये लगेंगे। ज्ञानी हैरान रह गया और उसने पूछा, “पहले दो सौ रूपये लग रहे थे और अब तीन सौ क्यों लगेंगे?” टैक्सी वाले ने जवाब दिया, “महाशय आप सिंह नगरी से ठीक उल्टी दिशा में लगभग तीन-चार किलोमीटर दूर आ गए हैं। सिंह नगरी स्टेशन के दूसरी ओर है।”

उस व्यक्ति ने इसके बाद कुछ नहीं कहा और चुपचाप गाड़ी में बैठ गया।

Moral of the story in Hindi – शक्ति होना पर्याप्त नहीं बल्कि शक्ति का ज्ञान के साथ इस्तेमाल जरूरी है।

Please tell in Comment Section how you liked short Bedtime Stories in Hindi. Please read our other Hindi Stories too.

121 New Hindi Short Stories with Moral for Kids | नैतिक कहानियां

 

   

1 thought on “30+ Short Bedtime Stories for kids in Hindi | बेडटाइम स्टोरीज”

Leave a Comment