12 Short Bedtime Stories for kids in Hindi | बेडटाइम स्टोरीज

Read 12 most famous short Bedtime Stories in Hindi. बेडटाइम स्टोरीज includes funny, strange, and moral stories that helps to create a magical and strong bond between parents and children.

सोते समय की कहानियां बच्चे की कल्पनाओं को बढ़ाने में मदद करती हैं। बेडटाइम स्टोरीज बच्चों के साथ समय बिताने के लिए एक शानदार अवसर भी होता है।

सबसे बड़ी दौलत Bedtime Stories in Hindi

Hindi Bedtime Story
Bedtime Moral Stories in Hindi

एक बड़े से शहर में एक अमीर आदमी रहता था। उसके पास बहुत पैसा था और उसने हाल ही में शहर में एक बड़ा घर भी खरीदा था। वह पैसो से तो बहुत धनी था लेकिन शरीर और सेहत से बहुत ही गरीब था।

वह दिन रात पैसे कमाने के लिए बहुत मेहनत करता, लेकिन अपने शरीर के लिए उसके पास बिलकुल भी वक्त नहीं था। बहुत अमीर और पैसे कमाने के बाद भी उसे कई नई-नई बीमारियों ने घेर लिया था।

वह आदमी स्वार्थी नहीं था, पर सिर्फ इतना था कि उस आदमी के पास पैसा खर्च करने का समय नहीं था। उसे पैसे कमाने की आदत ही लग लगी थी। डॉक्टर के पास जाने के लिए ही उसको वक्त नहीं मिलता था। ध्यान न देने के कारन उसका शरीर धीरे-धीरे कमजोर होता जा रहा था।

एक दिन वह बहुत थक कर घर आया। आज उसका बहुत बुरा सिरदर्द हो रहा था, इसलिए वह सीधा जाकर अपने बिस्तर पे लेट गया। जब उसके नौकर ने खाना लाया तब बहुत थकने के कारन उसने खाना खाने से मना कर दिया और भूखा ही सो गया।

Famous Bedtime Stories in Hindi

आधी रात को उसका सरदर्द और भी बढ़ गया। वह कुछ समाज ही नहीं पा रहा था की क्या हो रहा है। तभी अचानक ही उसके सामने एक अजीब सी आकृति आकर कड़ी हो गयी और वह बोली, “मैं तुम्हारी आत्मा हूँ और आज मैं ये तुम्हारा शरीर को हमेशा के लिए छोड़ कर चली जा रही हूँ।

तब वह आदमी घबराया सा बोला, ” तुम मेरे शरीर को क्यों छोड़ रहे हो? मेरे पास बहुत पैसा है और मैंने इसके लिए पूरी जिंदगी मेहनत की है। मैं इतना विशाल घर में रहता हूं, की उस घर को कई लोग सिर्फ अपने सपने में सोच सकते है।”

आत्मा बोली, ” सुन मेरी बात ये बड़ा घर तुम्हारा घर है, मेरा नहीं। मेरा घर तो तुम्हारा शरीर है, जो दिन पे दिन दुबला होता जा रहा है, और कई बीमारियों के चपेट में भी आया है।“

“बस कई वर्षों से टूटी हुई झोपड़ी में रहने की कल्पना करो। उसी प्रकार तुमने अपने शरीर यानि मेरे घर की हालत की है, और मैं इसमें नहीं रह सकता।“ यही बोलके आत्मा उस आदमी का शरीर छोड़के चली गयी।

Moral of the Story

हमारा स्वास्थ्य हमारी सबसे बड़ी दौलत है, इसका अहसास हमे तब होता है जब हम इसको खो देते हैं।

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चंपक की बैलगाड़ी Champak Story in Hindi

Champak Hindi Stories
Short Bedtime Stories

चंपक अपनी बैलगाड़ी में फलों और सब्जियों के बड़े-बड़े बक्से लेकर शहर में बेचने जा रहा था। शहर जाने में उसे करीब एक दिन लगता था। वह सुबह गांव से निकला था और अब दोपहर हो गयी थी, तभी अचानक उसकी बैलगाड़ी एक खड्डे में गिरकर पलट गयी। 

वह अपनी बैलगाड़ी सीधी करने की बहुत कोशिश करने लगा। वहा नजदीक एक ढाबे पे बैठा एक आदमी ये सब देख रहा था। उसने चंपक को दूर से ही बोला, “अरे भाई, परेशान मत हो, आ जाओ मेरे साथ पहले खाना खा लो फिर मैं तुम्हारी बैलगाड़ी सीधी करवा दूंगा।”

उसकी बात सुनकर चंपक बोला, “मैं अभी नहीं आ सकता। मेरा दोस्त नाराज हो जायेगा।” ढाबे पर बैठा आदमी ने कहा, “अरे भाई तुज़से अकेले नहीं उठेगी यह बैलगाड़ी। तू आजा खाना खा ले फिर हम दोनों उठाएंगे।”

“नहीं मेरा दोस्त बहुत गुस्सा हो जाएगा” चंपक बोला।

उस आदमी ने फिर से कहा, “अरे मान भी जाओ। आ जाओ इधर बैठो।”

चंपक ने कहा, “ठीक है आप कहते है तो आ जाता हूँ। “

चंपक ने जमकर खाना खाया और फिर बोला, “अब मैं गाड़ी के पास चलता हूँ और आप भी मेरे साथ चलिए। मेरा दोस्त गुस्सा हो रहा होगा।”

ढाबे पर बैठे आदमी ने मुस्कुराते हुए कहा, “चलो चलते है, पर तुम इतना डर क्यों रहे हो? वैसे कहा है तुम्हारा दोस्त?”

चंपक ने कहा, “बैलगाड़ी के निचे दबा हुआ है।” 

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बुरी संगत का नतीजा Hindi Kahani

Hindi Kahani for Kids
Bedtime Stories in Hindi

रतनलाल सेठ का एक बड़ासा फलों का बगीचा था और उसके दो बेटे थे। एक बेटा अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए विदेश गया था और दूसरा छोटा बेटा आदित्य गांव में ही पढ़ाई करता था।

घर में आदित्य को माँ-बाप से बहुत प्यार मिला था। वह ज्यादातर अपना समय फलों के बाग के में बीतता था। वहाँ उसके दो-चार मित्र बन गए थे। उनकी संगति में आदित्य बिगड़ने लगा था। उसे चोरी करने और जुआ खेलने की आदत पड़ गई थी।

एक दिन सेठ रतनलाल ने आदित्य को जुआ खेलते हुए देख लिया। वहाँ तो उन्होंने आदित्य से कुछ नहीं कहा, पर घर आकर दे चिंता में डूब गए। आदित्य के लौटने पर उन्होंने कहा, “बेटा! जुआ खेलना अच्छी आदत नहीं है। यह तुम्हें बरबाद कर देगा।’” आदित्य पर पिता की बातों का कोई असर नहीं हुआ। अंत में सेठ रतनलाल को एक युक्ति सूझी।

एक दिन वे आदित्य को लेकर आम के बगीचे में पहुँचे। उन्होंने माली से आम तोड़ने के लिए कहा। माली ने आम को तोड़कर एक टोकरी में रख

दिया। सेठ ने आदित्य से कहा, “आदित्य! आम की टोकरी को घर ले जाओ। तीन दिन बात तुम्हारी मौसी आयेगी तब आम का आनंद लेंगे।”

Children ki Kahani

रतनलाल ने एक खराब आम उठा लाए। उसे आदित्य को देते हुए उन्होंने कहा, “इसे भी उन्हीं आम के साथ रख दो।” आदित्य ने वैसे ही किया। उसने आम की टोकरी को घर लाकर रख दिया।

तीन दिन मौसी आ गई। रतनलाल सेठ ने भोजन करने के बाद आदित्य से आम लाने को कहा। आदित्य ने टोकरी उठाई तो देखा कि सब आम सड़ चुके थे। वह बहुत हैरान हुआ। रतनलाल सेठ भी उसके पीछे-पीछे वहाँ आ गए थे। आदित्य ने पूछा कि, “यह कैसे हो गया पिताजी?”

रतनलाल ने कहा, “बेटा! एक खराब आम ने इन बाकि के अच्छे आम को अपने जैसा ही बना दिया है। इसी तरह जो लड़का बुरे लड़कों की संगति करता है। वह भी बुरा बन जाता है।’” पिता की बात आदित्य के दिमाग में बैठ गई।

उसे महसूस हुआ कि उसके पिता उसे क्या सिखाना चाहते थे। उसने बुरे लड़कों की संगति हमेशा के लिए छोड़ दी।

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शातिर चोर Bedtime Stories for Kids in Hindi

Short Bedtime Hindi Stories
Bedtime Stories in Hindi

एक बड़े शहर में एक शातिर चोर रहता था। सब लोग जानते हुए भी पुलिस के पास उस चोर के खिलाफ कोई सबूत नहीं था। उस चोर ने बड़े-बड़े राजनेताओं भी नहीं छोड़ा था।

वह चोर अक्सर एक शहर के बाहर रहने वाले साधु को मिलने आता था। उस चोर को भगवान से साक्षात्कार का उपाय जानना था। साधु उसे आये वक्त टाल देता था। लेकिन चोर पर इसका असर नहीं पड़ता था।

एक दिन उस चोर का आग्रह बहुत बाद गया। उसने साधु से कहा की समाधान के बिना वह नहीं जायेगा। कई अनुरोध के बाद साधु ने चोर को दूसरे दिन बुलाया।

Funny Bedtime Story in Hindi

दूसरे दिन चोर ठीक समय पर आ गया।  साधु ने चोर के सिर पर कुछ पत्थर रखे और कहा की यह पत्थर लेके तुम्हे पूरा पहाड़ चढ़ना होना।

चोर सिर पर पत्थर लिए पहाड़ पर चढ़ने लगा और उसके पीछे साधु भी चलने लगा। थोड़ी देर चलने के बाद चोर को पत्थर भारी लगने लगे। उसने साधु से अनुरोध किया की उसका बोज थोड़ा काम किया जाये। साधु ने उसकी बात मान ली और उसने टोकरी से कुछ पत्थर निकाले।

थोड़ा और चलने के बाद चोर के निवेदन से साधु ने और थोड़े पत्थर निकाले। चोर बार-बार अपनी थकान वक्त कर रहा था। अंत में सब पथरर फेंक दिए गए और चोर असानी से पर्वत पर चढ़ता हुआ ऊँचे शिखर पर जा पहूँचा।  

साधु ने कहा, जब तुम्हारे सिर पर पत्थरों का बोझ रहा, तब तक तुम्हे पर्वत के ऊँचे शिखर पर चढ़ना कठिन रहा। पर जैसे ही तुमने पत्थर फेंके वैसे ही चढ़ाई सरल हो गई। ऐसी तरह पापों का बोझ सिर पर लेकर कोई मनुष्य भगवान को प्राप्त नहीं कर सकता।

चोर समाज गया की वह अपने बुरे कर्मो के लिए भगवान को प्राप्त नहीं कर सकता है। उस दिन से उसने चोरी करना छोड़ दी और वह पूरी तरह से बदल गया। 

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दिल की सुने या दिमाग की – बेडटाइम स्टोरीज

बेडटाइम स्टोरीज

एक बार शुभम ने संध्या सात बजे अपने पापा से कहा, “कल सुबह पांच बजे मुझे उठा दीजिएगा, मैं मॉर्निंग वॉक पर जाऊंगा।”

लेकिन इतना कहते ही उसके दूसरे मन ने दस्तक दी, “क्यों कह दिया पांच बजे उठाने को? मालूम नहीं कल कॉलेज में प्रैक्टिकल है?

इतनी जल्दी उठोगे तो प्रैक्टिकल में सो नहीं जाओगे?”

तभी तीसरा मन आ गया, “क्या बात करते हो, उठना ही चाहिए। सुबह सबकुछ एकबार रिवाइझ कर लोगे तो प्रैक्टिकल और अच्छा जाएगा।”

पर जब रात नौ बजे उसने खाना खा लिया तो उसे सुस्ती चढ़ गई। सुस्ती चढ़ते ही चौथे मन ने द्वार खटखटाया, “नहीं उठना अपने को सुबह-सुबह।”

शुभम ने पापा को उठाने से मना कर दिया। रात को टी.वी. वगैरह देखकर जब ग्यारह बजे वह सोने गया तब तक उसके खाने की सुस्ती काफी हृद तक कम हो चुकी थी। बस पांचवें मन ने पुकारा, “सुबह उठना ही है। सुबह-सुबह परीक्षा की तैयारी नहीं करी तो कहीं रिजल्ट न गड़बड़ा जाए।” बस तुरंत उसने पापा से फिर उठाने की अनुरोध कर दिया।

पर सुबह में जैसे ही पापा ने पांच बजे उठाया कि उसका छठा मन गुस्सा कर बैठा, “यह कोई वक्त है उठाने का? क्या अभी उठकर प्रैक्टिकल में दिनभर सोता रहूं?”

पापा भी परेशान हो गए। खुद ही उठाने को कहता है और उठाने पर गुस्सा भी करता है। शुभम फिर सो गया। लेकिन फिर मजा तो यह कि सुबह उठकर तथा नहा-धोकर जब वह नाश्ता करने बैठा तो उसे अपने न उठने पर बड़ा पछतावा हुआ। उसने अपने पापा से कहा, “नींद

में भले ही मैं लाख मना करूं, पर आपको तो मुझे झकझोर कर उठा ही देना चाहिए था। आपको तो पता है मेरा प्रैक्टिकल एक्झाम है।”

अब पापा क्या कहें? उन्होंने अपना माथा ठोक लिया।

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अशिक्षित राजा Bedtime Hindi Mein Kahaniya

Hindi Mein Kahaniya
Bedtime Stories in Hindi

       धनकपुर में एक राजा था। उसे पढने-लिखने का बहुत शौक था, पर प्रजा की सेवा करते-करते उसे कभी पड़ने का समय नहीं मिला।

एक दिन उसने थान लिया की कुछ भी हो जाए वह इस बार जरूर पढ़ेगा। उसने मंत्री-परिषद् के माध्यम से अपने लिए एक शिक्षक की व्यवस्था की। शिक्षक राजा को पढ़ाने के लिए आने लगा।

राजा को शिक्षा ग्रहण करते हुए कई महीने बीत गए थे, मगर राजा को इसका कोई लाभ नहीं हो रहा था।  राजा का गुरु तो रोज खूब मेहनत करता थे, परन्तु राजा को उस शिक्षा का कोई फ़ायदा नहीं हो रहा था।

राजा बड़ा परेशान होने लगा उसके कुछ समाज में नहीं आ रहा था, गुरु की प्रतिभा और योग्यता पर सवाल उठाना भी गलत था क्योंकि वो एक बहुत ही प्रसिद्द और पढ़ाने-लिखाने में योग्य गुरु थे। राजा को बहुत दिन से परेशान देखकर आखिर में एक दिन रानी ने राजा को सलाह दी कि राजन आप इस सवाल का जवाब गुरु जी से ही पूछ कर देखिये।

Long Bedtime stories

एक दिन राजा ने बड़ी हिम्मत करके गुरूजी से पूछा, “गुरूजी, क्षमा कीजियेगा, पर मैं कई महीनो से आपसे शिक्षा ग्रहण कर रहा हूँ। बहुत से लोग आपके शिक्षण का ज्ञान आसानी से पाते है, पर मुझे इसका कोई लाभ नहीं हो रहा है। ऐसा क्यों है?”

गुरु जी ने बड़े ही शांत स्वर में जवाब दिया, “राजन बात बहुत छोटी है परन्तु आप अपने ‘बड़े’ होने के अहंकार के कारण इसे समझ नहीं पा रहे हैं और परेशान और दुखी हैं।  माना कि आप एक बहुत बड़े राजा हैं।

पर जब आप किसी से शिक्षा लेते है, तब आप उस समय आप एक शिष्य बन जाते हैं और सीखने वाला गुरु।  गुरु का स्थान हमेशा उच्च होना चाहिए, परन्तु आप स्वंय ऊँचे सिंहासन पर बैठते हैं और मुझे अपने से नीचे के आसन पर बैठाते हैं।”

“आप मुझसे महान बन गए है और मैं अपने निचे, जिससे आपको न तो कोई शिक्षा प्राप्त हो रही है और न ही कोई ज्ञान मिल रहा है” राजा की समझ में सारी बात आ गई और उसने तुरंत अपनी गलती को स्वीकारा और गुरुवर से उच्च शिक्षा प्राप्त की।

Moral of Bedtime Stories in Hindi

हमेशा याद रखें कि गुरु का स्थान हमेशा ऊपर होता है।

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जीवन की सिख दर्जी से Moral Bedtime Story

Bedtime story with Moral

एक दिन स्कूल में छुट्टी की घोषणा होने के कारण, एक दर्जी का बेटा सोहम अपने पापा की दुकान पर चला गया। वहाँ जाकर वह बड़े ध्यान से अपने पापा को काम करते हुए देखने लगा।

उसने देखा कि उसके पापा कैंची से कपड़े को काटते हैं, और कैंची को पैर के पास टांग से दबा कर रख देते हैं। फिर सुई से उसको सीते हैं और सीने के बाद सुई को अपनी टोपी पर लगा लेते हैं।

जब उसने इसी क्रिया को दो-तीन बार देखा तो उससे रहा नहीं गया, तो उसने अपने पापा से पूछा, “पापा मैं बड़ी देर से आपको देख रहा हूं, आप जब भी कपड़ा काटते हैं, उसके बाद कैंची को पैर के नीचे दबा देते हैं, और सुई से कपड़ा सीने के बाद, उसे टोपी पर लगा लेते हैं, ऐसा क्यों?

सोहम के पापा ने हस्ते हुए जवाब दिया, “बेटा, कैंची काटने का काम करती है, और सुई जोड़ने का काम करती है, और काटने वाले की जगह हमेशा नीची होती है परन्तु जोड़ने वाले की जगह हमेशा ऊपर होती है। यही कारण है कि मैं सुई को टोपी पर लगाता हूं और कैंची को पैर के नीचे रखता हूं।”

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कॉलेज की दोस्ती Short Moral Stories in Hindi

Short Moral Stories in Hindi
Bedtime Stories in Hindi

नंदन को कॉलेज से ही एक अच्छी नौकरी मिल गयी थी और वह अपने जिंदगी में बहुत खुश था। नंदन का सबसे करीबी दोस्त परेश जिसको कॉलेज से नौकरी नहीं मिली थी, वह काफी दिनों से बेरोजगार था।

अब नंदन अपने जीवन में बहुत व्यस्त था, वह अपने दोस्त परेश से भी काफी दिनों से नहीं मिला था। कॉलेज में तो उनको एक-दूसरे के बिना चैन नहीं पड़ता था।  

एक दिन नंदन ऑफिस से घर लौटा, तो उसके माँ ने कहा की आज तुम्हारा कॉलेज का दोस्त परेश आया था। उसे बीस हजार रुपये की तुरंत जरूरत थी। मैंने तुम्हारी अलमारी से रूपये निकलकर उसे दे दिया है। तुम्हे कही लिखना हो, तो लिख लेना।

Good Night story in Hindi

माँ की यह बात सुनकर नंदन का चेहरा हतप्रभ हो गया, आंखे गीली हो गयी, वह अनमना सा हो गया। उसकी माँ ने उसे देखा और बोली, “अरे! क्या हो गया। मैंने कुछ गलत कर दिया क्या? मैं जानती थी की तू और परेश कॉलेज में अच्छे दोस्त थे, इसलिए मैंने यह हिम्मत कर ली। परेश के सामने तुम्हे फोन करना उसे अच्छा नहीं लगता था। मुझसे कोई गलती हो गयी तो माफ़ कर देना।”

तब नंदन बोल पड़ा, “मुझे दुःख इस बात का नहीं है की आपने मेरे दोस्त को पैसे दे दिए है। आपने बिलकुल सही काम किया है, मुझे इसकी ख़ुशी भी है। मैं दुखी हूं क्योंकि मेरा दोस्त मुश्किल में है, और मैं इसे समझ नहीं पाया।“

“मैंने कभी नहीं सोचा था कि वह किसी परेशानी में होगी। मैं इतना स्वार्थी हूं कि मैं उनसे मिलने भी नहीं गया।” यह कहकर नंदन रो पड़ा और अगले ही दिन उसने ऑफिस से छुट्टी ली और परेश को जाकर मिला।

परेश को अपने पिता के इलाज के लिए पैसे चाहिए थे। परेश नंदन को देखकर बहुत खुश हुआ। नंदन फिर से रो पड़ा और परेश को सॉरी बोला।

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जादुई पत्थर की सिख Jadui kahani for Bedtime

उदयपुर में एक जयवंत नाम का किसान था, उसके पास एक बड़ा सा खेत था। उस खेत के बीचो-बिच पत्थर का एक हिस्सा ज़मीन से ऊपर निकला हुआ था। उस पत्थर से ठोकर खाकर वह कई बार गिरकर चोट भी लगी थी और ना जाने कितनी ही बार उससे टकराकर खेती के औजार भी टूट चुके थे।

हर दिन की तरह आज भी वह सुबह-सुबह खेती करने पहूंचा। कुछ देर खेती करने के बाद जयवंत का हल उस पत्थर से टकराकर टूट गया और उसे सँभालते-सँभालते जयवंत भी गिर गया।

जयवंत को बहुत गुस्सा आया। उसने मन ही मन सोचा की आज जो भी हो जाए वह इस चट्टान को ज़मीन से निकाल कर उसकी खेत से बाहर फेंक देगा।

वह गुस्से में तुरंत अपने गांव गया और ५-६ गांव वालो को चट्टान का पत्थर हटाने के लिए बुलाया और सभी को लेकर वह अपने खेत में आ गया।

जयवंत बोला, “दोस्तों, इस चट्टान ने मुझे वर्षों से भारी नुकसान पहुँचाया है। और आज मैं इसे तुम सब की मदद से हमेशा के लिए इस चट्टान के पत्थर को मेरे खेत से बाहर निकलना चाहता हूँ।”

Night story for kids in Hindi

 ऐसा कहते ही जब गांववालों ने फावड़े से पत्थर के किनार पर वार करने लगे। पर उन लोगों ने फावड़ा एक-दो ही बार मारा था की वह पत्थर पूरा का पूरा ज़मीन से बाहर आ गया। वे सब हस्ते हुए कहने लगे, “तुमने तो कहा था की खेत के बिच एक बड़ा सा पत्थर दबा हुआ है, पर ये तो एक मामूली सा पत्थर निकला।

यहां तक ​​कि जयवंत भी पत्थर को देखकर चौंक गया। इतने सालों तक उसने वह पत्थर बड़ा होगा सोचकर नहीं निकला था।

उसे पछतावा हुआ की यदि उसने उस पत्थर को पहले हटाने की कोशिश की होती तो उसका नुकसान कभी नहीं होता। हम हमेशा सोचते हैं कि हमारी समस्याएं बड़ी हैं, लेकिन याद रखें कोशिश करने से सबका हल निकाल जाता है।

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डर के आगे जित है Funny Bedtime Story

Funny Bedtime Story

एक बड़े से शहर में एक बहुत अमीर व्यापारी रहता था। उसे एक अजीब शौक था, वो अपने घर के अन्दर बने एक बड़े से स्विमिंग पूल में बड़े-बड़े रेप्टाइल्स (Reptiles) पाले हुए था। जिसमे एक से बढ़कर एक सांप, मगरमच्छ, आदि शामिल थे।

अपने जन्मदिन पर, उन्होंने एक बड़ी पार्टी आयोजित करने का फैसला किया। उसने अपने सभी दोस्तों और परिवार को बुलाया। पार्टी  में खाने-पीने के बाद वो सभी मेहमानों को स्विमिंग पूल के पास ले जाता है और कहता है, “दोस्तों, आप इस पूल को देख रहे हैं, इसमें एक से एक खतरनाक जीव हैं, अगर आपमें से कोई इसे तैर कर पार कर ले तो मैं उसे ५० लाख रुपये दूंगा।

सभी लोग पूल की तरफ देखते हैं, पर किसी की भी हिम्मत नहीं होती है कि उसे पार करे। लेकिन तभी छपाक से आवाज होती है, और एक लड़का उसमे कूद जाता है,और मगरमच्छों, साँपों, इत्यादि से बचता हुआ पूल पार कर जाता है।

सभी लोग उसकी इस बहादुरी को देख हैरत में पड़ जाते हैं। अमीर व्यापारी को भी यकीन नहीं होता है कि कोई ऐसा कर सकता है; इतने सालों में किसी ने पूल पार करना तो दूर उसका पानी छूने तक की हिम्मत नहीं की।

वो उस लड़के को बुलाता है, “लड़के, आज तुमने बहुत ही हिम्मत का काम किया है, तुम सच- मुच बहादुर हो बताओ तुम कौन सा इनाम चाहते हो।”

“अरे, इनाम-विनाम तो मैं लेता रहूँगा, पहले ये बताओ कि मुझे धक्का किसने दिया था!!!” लड़का बोला।

रिस्क और आत्मविश्वास हमारे जीवन में सबसे महत्वपूर्ण होती है।

लकड़हारे का सबक Short Moral Story for Children

Short Moral Story for Children
Bedtime Stories in Hindi

किसी गांव में एक बूढ़ा लकड़हारा रहता था। सत्तर वर्ष के करीब की उम्र थी उसकी। परिवार में कोई न था। बिल्कुल अकेला रहता था।

उसे लकड़ियां तोड़ने रोज जंगल में जाना पड़ता था। यही नहीं दिनभर की तोड़ी लकड़ियां उसे शाम को बाजार में बेचने भी खुद ही जाना पड़ता था। और तब कहीं जाकर रात को उसे दो वक्त का खाना नसीब होता था।

पर उसकी असली शामत वर्षाऋतु में आ जाती थी। अक्सर तोड़ी हुई लकड़ियां भीग जाती और बेचने लायक न बचतीं। फलस्वरूप कई बार बारिश के कहर के चलते उसे दो-दो दिन तक भूखा रहना पड़ता था।

यह उम्र और ऐसा कष्ट, वह बुरी तरह थक गया था। वह अक्सर दुखी होकर प्रार्थना भी करता था, “हे मौत के देवता! तू मुझे उठाता क्यों नहीं है? मुझसे नाराज क्यों है मौत के देवता? तुमने मुझसे छोटे-छोटे को उठा लिए, फिर मुझसे क्या दुश्मनी है तेरी?”

लेकिन एक दिन वह ऐसी ही हताश मनोदशा में उस दिन वह पेड़ के नीचे बैठकर फिर मौत के देवता को पुकार-पुकारकर जीवन से मुक्त करने की प्रार्थनाएं कर रहा था। उसका एक ही रोना था कि मुझे कब उठाएगा तू? इधर अभी उसकी प्रार्थना जारी ही थी कि किसी ने उसके कंधे पर हाथ रखा। बूढ़ा चौंक गया।

उसने पलटकर देखा तो एक विशालकाय मनुष्य खड़ा था। बूढ़े ने डरते हुए उसका परिचय पूछा। उसने कहा “मैं मौत का देवता हूँ! यहां से गुजर रहा था कि तुम्हारी दर्द-भरी पुकार सुनी। वैसे तो तुम्हारा समय नहीं हुआ है, परंतु तुम्हारा दर्द देखकर मैं द्रवित हो उठा हूँ। चलो तुम्हें ले चलता हूँ।”

Moral Story in Hindi for Kids

बूढ़ा तो यह सुनते ही होश में आ गया। वह पूरी तरह से भ्रमित था और बहुत डर भी गया था। बस उसने तुरंत रंग बदलते हुए मौत के सौदागर से कहा “वह तो मैं दो-तीन दिनों से भूखा था, सो बस यूं ही ऐसी बातें कह गया था। बाकी तो मैं बहुत खुश हूँ। और यह स्पष्ट समझ लो कि फिलहाल मेरा मरने का कोई इरादा नहीं। मैंने यह केवल इसलिए कहा क्योंकि मैं गुस्से में था। मेरा मरने का कोई इरादा नहीं है। वैसे तो मैं आपको फिर कभी पुकारूगा भी नहीं।

मौत के देवता ने कहा, “जैसी आपकी मर्जी। इतना कहकर वह चला गया। इधर उसके जाते ही बूढ़ा तरंग में आ गया। उसकी चाल ही बदल गई थी। आश्चर्य तो यह कि उसके बाद फिर कभी उसने कष्ट का अनुभव भी नहीं किया। उसके सोच और जीवन दोनों बदल चुके थे। बाहर की दुनिया में सब कुछ वैसा-का-वैसा था, लेकिन फिर भी उसके भीतर सबकुछ पूरा-का-पूरा बदल गया था। और जब जीवन है और एहसास जीवित है, फिर और क्या चाहिए?

मनुष्य के लिए उसके जीवन से बढ़कर और कुछ नहीं है

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असली चोर कौन Hindi Kahaniya Bedtime Stories

बहुत समय पहले की बात है। एक दिन गांव में एक आमिर व्यापारी के यहाँ चोरी हो गयी। उन्होंने तुरंत पुलिस से शिकायत की और उन्होंने जांच शुरू कर दी। आमिर व्यापारी के यहाँ बहुत सरे नौकर काम करते थे तो चोर को पकड़ना बहुत ही मुश्किल था।

अगले दिन पुलिस ने व्यापारी के दोस्त और नौकरों को पुलिस स्टेशन बुलाया और सबके हाथ में एक छड़ी दी। पुलिस ने बताया की ये सब छड़ी तुम आज अपने पास रखो और कल इस छड़ी के साथ पुलिस स्टेशन आना।

यह सभी छाड़ियो की खासियत यह है की यह चोर के पास जाकर एक उंगली के बराबर अपने आप बढ़ जाएगी। उन्हें ये भी बताया की यह नई तकनीक है जिसे फिंगरप्रिंट कहा जाता है और इससे पुलिस ने कई चोरों को पकड़ा है।

पुलिस की बात सुनकर सभी लोक छड़ी लेके अपने-अपने घर चले गए। उन्ही में व्यापारी के घर चोरी करने वाला चोर भी था।

जब वह घर पहूँचा तो उसने सोचा, “अगर पुलिस के सामने मेरी छड़ी बड़ी हो गयी तो वे मुझे जेल में भेज देंगे। इसलिए क्यों न इस छड़ी को पहले से ही ऊँगली भर काट लिया जाए।“

चोर यह सोचकर बहुत खुश हुआ और फिर उसने बहुत अच्छी तरीके से छड़ी को काट लिया ताकि किसी को पता न चले।

अगले दिन आमिर व्यापारी के सभी दोस्त और नौकरों ने पुलिस को अपनी छड़ी दिखाई। चोर ने भी अपनी छड़ी पुलिस तो दिखाई पर उसकी छड़ी सबसे छोटी दिख रही थी। पुलिस ने तुरंत चोर को पकड़ा और चोर ने डर के मारे उसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया।   

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