Popular Hindi Story for Class 4 | Bacchon ki Kahaniyan

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Read Short Hindi Story for Class 4 with Moral. Bacchon ki Kahaniyan with Pictures allows children to forget the stresses and strains of the day and indulge in fantasy for a while. Hindi Stories with Moral are packed with knowledge, insights into a happy life, life lessons, love, fear, prayer and helpful advice.

(1) Hindi Story For Class 4 किसान बना गधा

Short Hindi Stories for Class 4

भरतपुर नाम के गांव में एक गरीब किसान रहता था। वह घर में अपनी पत्नी और एक बच्चे के साथ रहा करता था।

एक दिन उसने अपने बेटे के जन्मदिन के लिए बकरी खरीदने के लिए पड़ोसी गाँव जाने का फैसला किया। उसका दोस्त उस गाँव में बकरियाँ बेचा करता था। और उनकी गहरी दोस्ती के कारण उसके दोस्त ने उसे एक अच्छी मोटी बकरी दे दी । किसान इतना अच्छा और मोटा बकरा पाकर बहुत खुश हुआ।

घर जाते रस्ते में, उसे तीन भूखे चोरों ने देखा। एक चोर ने कहा ” उस बकरी को तो देखो! चलो इस किसान को बेवकूफ बना कर हम उस बकरी को लेंगे। इसे पकाएंगे और अच्छा भोजन करेंगे।” अन्य चोर उससे सहमत थे। तीनों चोरों ने एक योजना बनाई।

पहला चोर किसान की तरफ बढ़ा और उसे देखते हुए कहने लगा ” श्रीमान, आप अपने कंधो पर एक कुत्ते को क्यों लिए जा रहे हो?” किसान नाराज हो गया और बोला ” भाई, क्या तुम अंधे हो? यह एक बकरा है|” चोर माफ़ी मांगकर वहा से चला गया।

कुछ समय बाद किसान को रस्ते में दूसरा चोर मिल गया और वह हसता हुआ बोला ” अरे, क्या मूर्खे हो! आप एक मरे हुए बछड़े को लेकर कहा जा रहे हो?” किसान क्रोधित हुआ और बोला “क्या तुम मुर्ख हो? क्या तुम्हे दिकथा नहीं की यह एक जीवित बकरा है।” वह चोर भी माफ़ी माँगकर वहा से चला गया।

Story For Class 4

अब किसान को चिंता हो रही थी। वह चलते-चलते सोचने लगा ” क्या वे लोग पागल है या मुझे ही कुछ हुआ है? मैंने एक जीता जगता बकरा ही उठाया है ना?”

कुछ समय चलने के बाद तीसरा चोर किसान के सामने आया। उसने किसान को देखकर कहा “भाई, गधे को क्यों उठा लिए जा रहे हो? अपने चोरी तो नहीं की है ना?” अब किसान इतना परेशान था की उसने चोरों पर विश्वास कर दिया और बकरे को निचे छोड़कर वहा से भाग गया।

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चोर बहुत खुश हुए, जब किसान यह सोचते हुए भाग गया की वह पागल हो गया है| किसान की मूर्खता पर हॅसते हुए उन्होंने बकरे हो जप्त कर लिया।

Moral of Short Hindi Story- कभी भी अपने आप पर विश्वास नहीं खोना चाहिए।

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(2) Moral Stories In English For Class 4 भगवान का फल

Short Hindi Stories for Class 4

सखाराम गांव के विद्यालय में अध्यापक का काम करते थे। सखाराम की एक लड़की थी, उसका नाम संध्या । सखाराम रोज सुबह उठकर घंटो तक प्रार्थना करता था।

एक दिन प्रार्थना करते हुए उसे प्रभु राम को कुछ फल चढ़ाने की इच्छा हुई। उसने अपनी लड़की को बुला कर कहा “सुन बेटी, में प्रभु को फल चढ़ाना चाहता हूँ, कृपया बाजार जाकर दस सेब लेकर आओ।”

संध्या बहुत अच्छी बच्ची थी| वह तुरंत पास वाली फल की दुकान पर गयी । “भैया मुझे दस सेब देना” संध्या ने दुकानदार से कहा। दुकानदार ने दस सेब पैक कर के संध्या को दे दिए।

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Short Moral Stories for Kids

घर वापस जाते समय उसने देखा कि एक गरीब आदमी भोजन के लिए भीख माँग रहा है। उस गरीब आदमी ने कहा “बेटी मैं भूखा हूँ, कृपया मुझे कुछ खाने को दो” संध्या ने उसे कुछ सेब दे दिए।

संध्या थोड़ी और आगे गयी । उसने वहा एक महिला अपने दो बच्चों के साथ भीख मांग रही थी। वे दो बच्चे संध्या के पास आये और उसे बताया कि वे बहुत भूखे है। संध्या ने बचे हुऐ सारे सेब उन बच्चों को दे दिए।

संध्या बिना सेब, खली हाथ ही घर वापस आ गई। वह डर रही थी की उसके पिता उसे क्या कहेंगे।

जब वह घर पहुंची तो उसके पिता इंतजार कर रहे थे। संध्या को बिना हाथ में सेब देखकर उसके पिता ने पूछा ” क्या हुआ बेटा, में ने तुम्हे सेब खरीदने के लिए भेजा था। तुम तो खली हाथ आ गयी।”

संध्या ने अपने पिताजी को घर आते वक्त घाटी हुई घटना बता दी। संध्या के पिताजी बड़े खुश हुऐ, उन्होंने कहा “बीटा मैं आज वास्तव में आप पर गर्व करता हूं। मैं सेब को भगवान को समर्पित करना चाहता था। लेकिन गरीबों को देकर आपने वह काम पहले ही कर दिया।”

Moral of Hindi Story for Class 4– गरीबों की सेवा ईश्वर की सेवा हैं।

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(3) Hindi Story For Class 4 With Moral सोने का हिरण

Golden Deer Hindi Moral Story for Class 4

चरणपुर नाम का गांव था। गाँव के पास एक बड़ा जंगल था जिसमें कई जानवर रहते थे। गांव के लोग कभी-कभी उस जंगल में शिकार के लिए जाते थे।

उस जंगल में एक हिरण रहता था। वह दूसरे हिरणों से अलग था, जैसे वह बहुत सुंदर और चमकदार था। यह एक सुनहरे हिरण की तरह दिखता था। धीरे-धीरे पास-पड़ोसी गावों और नगरों में उस हिरन की चर्चा होने लगी।

उसे पकड़ने के लिए अनेक शिकारी जंगल का चक्कर लगाने लगे। लेकिन कोई भी शिकारी उस हिरण को नहीं पकड़ सका, क्यों की वह हिरण सबसे तेज दौड़ता था।

एक बार दूसरे गाँव का एक शिकारी हिरण को पकड़ने के लिए आया था। वह पेड़ के उप्पर बैठकर शिकार का इंतज़ार कर रहा था। तभी उसे दूर से अनोखा हिरन आता दिखाई पड़ा। वह अकेला था। बड़ी मस्ती से वह इधर-उधर ताकते हुए शिकारी के पेड़ की ओर चला आ रहा था।

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हिरण को अपनी ओर आते देखकर शिकारी हैरान रह गया। वह शिकार करने के लिए तैयार हो गया, किंतु हिरन शिकारी के पेड़ के निचे नहीं आया। वह बीच रस्ते से दूसरी ओर चला गया। अब हिरण को पकड़ने के लिए शिकारी को अगले दिन का इंतजार करना पड़ा।

अगले दिन शिकारी सूर्योदय से पहले जंगल में आया। तभी उसे हिरन दूर से दिखाई पड़ा। फिर वह पेड़ के बहुत समीप पहूंच गया, फिर एकाएक रुक गया। उसे हवा में कुछ ऐसी गंध मिली, जैसी कभी नहीं मिलती थी। इधर शिकारी ने सोचा की यहाँ से बाण चलने पर हिरन भाग जायेगा। क्यों न इसे पेड़ के फलो से फुसलाया जाए? उसने पेड़ के ऊपर से बैठे-बैठे कुछ फल निचे फेंक दिया।

हिरन और भी सतर्क हो गया । उसे संदेह हुआ की कोई तो उसे फुसला रहा है। हिरन बड़े कदम उठाकर जंगल की और भागने लगा। इस प्रकार हाथ आये शिकार को भागते हुए देखकर, शिकारी हाथ मलते हुए अपने घर चला गया और उस हिरन का शिकार करना छोड़ दिया।

Moral of Hindi Story for Class 4- जीवन में कितना भी संकट आ जाए हमें हमेशा सतर्क रहना चाहिए।

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(4) Short Story In Hindi For Class 4 चतुर लड़का

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एक सुबह की बात है । एक गांव में नारायण नाम का किसान अपने पिता को बैलगाड़ी में बैठने में मदद कर रहा था। उसका पुत्र रोहन ये सब देख रहा था। उसने सोचा क्यों ना में भी पिता से साथ गुमने जाऊ।

रोहन ने पिताजी से पूछा “पापा, दादाजी को कहा ले जा रहे हो?” नारायण ने जवाब दिया “दादाजी की तबियत ठीक नहीं है, इसलिए में उसे शहर में ले जा रहा हूँ।” रोहन बोला “पापा मुझे भी शहर देखना है”

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मगर पिताजी ने लड़के को घर रहने के लिए कहा। उसने अपने पत्नी को बुलाया और उसे अंदर ले जाने को कहा। मगर रोहन भागता हुआ गाड़ी में कूद गया। नारायण हार माने उसे अपने साथ ले गया। वे गाड़ी में आगे बड़े। कुछ मिनटों के बाद वे किसी अलग जगह पर पहुँच गए।

नारायण गाड़ी से उतरा और बोला ” रोहन, यहीं दादा के पास रहो| में थोड़ी ही देर में आ रहा हूँ।” नारायण थोड़ा दूर गया और उसने खोदना शुरू कर दिया। बहुत देर पिताजी वापस नहीं आने पर रोहन बेचैन हो उठा। वह गाड़ी से उतर कर पिता को देखने निकल पड़ा।

पिता को खुदाई करते देखकर रोहन ने पूछा “पापा, क्या कर रहे हो?” नारायण ने गुस्से से कहा ” में खोद रहा हूँ। तुम यहाँ क्या कर रहे हो? मैंने कहा था ना दादाजी की साथ गाड़ी में रुकने के लिए।”

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पर रोहन ने फिर से पूछा ” पापा, यहाँ क्या है? आप क्यों खोद रहे हो?” रोहन अपने पिताजी से पूछता ही चला जा रहा था। नारायण अब छिपा न सका, उसे अपने बेटे से सच बोलना ही पड़ा। उसने कहा “बेटा, यह तुम्हारे दादा का कब्र है।” रोहन ने कहा ” पर पापा, दादाजी तो अभी भी जीवित है।”

पिता बोला ” हां, पर वह अब बूढ़े और बेकार हो गए है| वे अधिक दिनों तक नहीं जियेंगे। इसलिए उन्हें अभी गाड़ देने में कोई बुराई नहीं है।” “अच्छा!” कहते हुए रोहन ने एक और फावड़ा लिया और पास ही में खोदना शुरू किया। पिता ने पूछा “तुम क्या कर रहे हो बेटा? मैंने पहले ही खोद लिया है, तुम्हें नया नहीं बनाना है।”

तब रोहन ने जवाब दिया “जब तुम बूढ़े हो जाओगे तो में तुम्हे यहाँ ले आऊँगा और इधर गाड़ दूंगा।” नारायण हैरान हो गया, उसने पूछा “क्या? आप अपने पिता के साथ ऐसा बर्ताव करोगे?” “पिताजी, मैं अपनी पारिवारिक परंपरा को तोड़ना नहीं चाहता” रोहन ने जवाब दिया।

नारायण को अपनी गलती का एहसास हुआ “बेटे, तुमने आज मुझे घोर अपराध करने से बचा लिया है!” इसके बाद नारायण अपने पिता को घर ले गया और अपनी पत्नी को सब कुछ बताया!

Moral of Short Story In Hindi For Class 4– “इज़्ज़त भी मिलेगी, दौलत भी मिलेगी, सेवा करो…माता पिता की जनत भी मिलेगी…..!!”

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